संघ कार्य के 100 वर्ष: रतलाम में 83 साल पहले प्रारंभ हुआ था संघ कार्य

Update: 2026-01-29 05:54 GMT

रतलाम में संघ की पहली शाखा वर्ष 1942 में प्रारंभ हुई थी और इस हिसाब से रतलाम में संघ के अभी 83 वर्ष पूरे हुए है। इन 83 वर्षों में संघ और संघ के स्वयंसेवकों के कारण समाज में अनेक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। रतलाम में संघ कार्य को खड़ा करने वाले प्रारंभिक स्वयंसेवकों में से अधिकांश अब

भौतिक रुप से हमारे बीच उपस्थित नहीं है, लेकिन उनके द्वारा खड़ा किया गया संघ कार्य समाज संगठन की सबसे बड़ी मजबूती और एकता का पर्याय भी बना हुआ है। रतलाम नगर वैचारिक स्पष्टता के साथ संवकार्य का मजबूत केन्द्र है। रतलाम में आज के समाज जीवन में दिखाई दे रहे सकारात्मक परिवर्तनों की जड़ वहीं से प्रारंभ होती है, जहां संघ की पहली शाखा लगाई गई थी। वर्ष 1942 में धार निवासी हीरालालजी शर्मा (बाचा साहब) ने रतलाम में संघ की पहली शाखा प्रारंभ की थी। यह 1942 को जुलाई का महीना था, जब हीरालालजी शर्मा ने रतलाम के कुछ तरुणों को साथ में लेकर वर्तमान में स्टेशन रोड पर जहां महाराष्ट्र समाज भवन है, उसी स्थान पर प्रथम शाखा का शुभांरभ किया था। इस पहली शाखा के मुख्य शिक्षक श्री मुकुन्द चौक थे। यहां साखा प्रारंभ हुई और संघ कार्य से समाजजन जुड़ने लगे।

शासकीय कार्यालय में रहा आधे दिन का अवकाश

संघ के कार्यक्रम का असर यह था कि उस दिन बैंक और शासकीय कार्यालयों में आधे दिन का अवकाश घोषित करना पड़ा। कॉलेज में छात्र पहुंचे ही नहीं, इसलिए कॉलेज में भी जुझे कर दी गई। उस समय रतलाम के एकमात्र बड़े उद्योग सज्जन मिल को भी अपना काम रोकना पड़ा, क्योंकि मजदूर और अधिकारी मिल में नहीं पहुंचे। सारे लोगों के कदम कार्यक्रम स्थल की और बड़ रहे थे, लेकिन अचानक अंतिम समय पर प्रशासन ने बिना किसी कारण के कार्यक्रम की अनुमति निरस्त कर दी

जब प्रशासन ने निरस्त अनुमति को बहाल किया: रतलाम में संघ के कार्यक्रम की अनुमति निरस्त किए जाने का समाचार पूरे शहर में जंगल की आग की तरह एकनाथ रानडे फैला। प्रशासन ने अनुमति क्यो निरस्त की, इसका कारण किसी को नहीं पता था। लेकिन कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में जनसमूह उमड़ता था इसलिए यही निर्णय लिया गया कि अब कार्यक्रम को निरस्त नहीं किया जाएगा। कार्यक्रम हुआ और उसमें लगभग तीस हजार लोगों की उपस्थिति रही। तत्कालीन प्रान्त प्रचारक एकनाथ जी रानडे का बौद्धिक हुआ, जिसमें उन्होंने रतलाम के नागरिकों को संघ से परिचित कराया।

प्रथम जिला प्रचारक बने थे कुशाभाऊ ठाकरे

भाजपा के गठन के बाद भाजपा के पितृ पुरुष कहे गए कुशाभाऊ ठाकरे रतलाम के प्रथम जिला प्रचारक बन कर रतलाम पहुंचे थे। उनके रतलाम में आने के बाद पूरे रतलाम जिले में संघ का कार्य तेजी से आगे बढ़ा और जिले के ग्रामीण क्षेत्रों तक संघ की शाखाओं का विस्तार होने लगा। भारत की स्वतंत्रता के वर्ष 1947 तक जिले में 25 स्थानों पर संघ की शाखाएं स्थापित हो चुकी थी।

संघ कार्य के व्यापक विस्तार को देखते हुए वर्ष 1947 में ही संघ का प्रकट कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह प्रकट कार्यक्रम 20 जनवरी 1947 की लोकेन्द्र सिनेमा के सामने स्थित मैदान पर आयोजित किया गया था। इस मैदान को कार्यक्रम आयोजन के उपयुक्त बनाने के लिए लगभग मी स्वयंसेवकों ने पूरे एक समाह तक मैदान में डेरा डाल दिया था। उस समय देश के विभाजन की विभीषिका सामने थी और पाकिस्तान की ओर से हिन्दू शरणार्थियों का भारत में आना प्रारंभ हो गया था। कई विस्थापित बन्धु रतलाम में भी आ चुके थे। इसी कारण से हिन्दुत्व की भावना बहुत प्रबल हो गई थी और संथ के कार्यक्रम के लिए हजारों लोग उमड़ने लगे थे।

रतलाम में प्रारंभिक स्वयंसेवक

रतलाम नगर में प्रारंभिक दौर में संघ कार्य से जुड़ने वाले स्वयंसेवकों में हजारीलाल लोदा, चांदमल वाडोदिया, कृष्ण स्थरूप जौहरी, ओकारलाल सेठ, रतनलाल विरोदिया लक्ष्मीदास सेठ, घनश्याम व्यास, रामचंद्र व्यास, हरस्वरूप दवे, रामप्रसाद मेहता, माणिकलाल गोयल, भवरतात भाटी, बागमल गादिया, कृष्ण स्वरूप सक्सेना, हीरालाल सुरेका, केसरसिंह सिसौदिया, नर्मदाप्रसाद वापर, गेंदालाल नाहर, सूरजमल जैन (विधायक), झमकलाल गांधी, शशिकांत मेहता, रामभाऊ शौचे, रघुनाथसिंह सिसौदिया रामबंद्र सांकला और रामचंद्र आंबेकर इत्यादि प्रमुख थे। वर्ष 1951 तक हजारीमल लोळ रतलाम के नगर कार्यवाह थे, उनके बाद में धन्त्रयाम व्यास 1951 से 1958 तक नगर कार्यवाह रहे। बाद में उन्होंने जिला कार्यवाह का दायित्व भी निभाया।

संघ तो केवल हिन्दुस्थान हिन्दुओं का, इस ध्येय वाक्य को प्रत्यक्ष में लाना चाहता है। जैसे अन्य लोगों के अपने देश हैं, वैसा ही यह हिन्दुओं का देश है।

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार

Similar News