टाइगर स्टेट में थम नहीं रही बाघों की मौत

Update: 2026-01-24 05:59 GMT

रातापानी में संदिग्ध मौत से कटघरे में खड़ी हुई सुरक्षा

प्रदेश में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नर्मदापुरम के सोनतालई में बुधवार को एक बाघ का शव मिलने के ठीक दूसरे दिन, राजधानी से सटे रातापानी अभ्यारण्य के बुधनी वन परिक्षेत्र के भीमकोठी जंगल से एक और बाघ का शव मिला। इस संदिग्ध मौत ने राज्य में बाघों की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक, बीते एक साल में 55 बाघों की मौत के मामले सामने आए हैं। साल 2025 में मृत बाघों की संख्या और कारणों के अनुसार, इनमें 11 बाघों का शिकार किया गया। वहीं, 6 बाघ अंग तस्करी के लिए मारे गए हैं। प्राकृतिक कारणों से 38 बाघों की मृत्यु हुई, जो कुल मौतों का 69 प्रतिशत है। इनमें आपसी संघर्ष, बीमारी, वृद्धावस्था, दुर्घटनाएं और रेल व सड़क हादसे शामिल हैं।

नए साल में रातापानी में दूसरी बाघ की मौत

नए साल के जनवरी महीने में बाघों की यह रातापानी अभ्यारण्य में दूसरी मौत है। प्रारंभिक परीक्षण के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बाघ के शव का पोस्टमार्टम किया गया। बाघ की मौत संदिग्ध बताई जा रही है। यह अनुमान है कि मौत 24 से 36 घंटे पूर्व हुई थी।

पहले एक जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए 11 फरवरी का समय हाईकोर्ट जबलपुर ने तय किया है और सरकार से जवाब तलब किया गया है। बाघ के नमूने सुरक्षित रखकर जांच के लिए भेजे जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या किसी अन्य संदिग्ध वजह से। इसी तरह, बांधवगढ़ नेशनल पार्क में एक जनवरी से अब तक चार बाघों की मौत हो चुकी है।

2022 में मप्र में थे सबसे अधिक बाघ

रातापानी अभ्यारण्य में संकटग्रस्त जीवों में शुमार ढोल डॉग की भी हाल ही में साइटिंग हुई। जंगल की जैवविविधता के दृष्टिकोण से यह सकारात्मक संकेत है। इससे आने वाले समय में भोपाल में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

गुरुवार को संकटग्रस्त (एंडैंगर्ड) प्रजाति के वन्य प्राणी ढोल डॉग की साइटिंग हुई। शुक्रवार को रातापानी टाइगर रिजर्व के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीरें साझा की गईं। अधिकारियों के अनुसार इससे पहले बाघ, भालू, भेड़िया, तेंदुआ, गिद्ध और कई दुर्लभ पक्षियों की गतिविधियां वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के कर्मचारियों के कैमरों में कैद हो चुकी हैं।

ढोल डॉग एशियाई जंगली कुत्तों की प्रजाति है। यह लाल-भूरे रंग का फुर्तीला जानवर है, जो 14 से 20 के झुंड में रहता है। यह आईयूसीएन की रेड लिस्ट, यानी लुप्त-प्राय की सूची में शामिल है। ये बड़े खुरदार जानवरों जैसे हिरण और सांभर का शिकार करते हैं और कभी-कभी बाघों या भालुओं से भी शिकार छीन लेते हैं। इसी वजह से वन्यप्राणी प्रेमियों में इसकी खासी रुचि है।

महत्त्वपूर्ण है कि रातापानी टाइगर रिजर्व में लगभग 80-90 बाघ हैं। तेंदुओं की संख्या भी करीब 200 के आसपास है। देश में कुल 3,682 बाघ पाए गए थे, जिनमें से 785 बाघ मध्यप्रदेश में हैं। यह संख्या देश में सबसे अधिक है।

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