भारत का केंद्रीय बजट 2026-27ःविकास, सुधार और वैश्विक जुड़ाव की दिशा

अरुण आनंद

Update: 2026-02-02 04:54 GMT

केद्रीय बजट 2026-27 जब दुनिया की अर्थव्यवस्था अनिश्चितता से गुजर रही है। कई देशों में युद्ध और तनाव हैं, सप्लाई चेन टूट रही हैं और वैश्विक व्यापार दबाव में है। ऐसे माहौल में यह बजट केवल आय-व्यय का हिसाब नहीं है, बल्कि यह बताता है कि भारत आने वाले वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जाना चाहता है और दुनिया में अपनी भूमिका को कैसे मजबूत करना चाहता है।

यह बजट तीन मुख्य कर्तव्यों पर आधारित है-तेज और स्थायी आर्थिक विकास, लोगों की क्षमता का निर्माण और समाज के हर वर्ग को विकास से जोड़ना। सरकार का संदेश साफ़ हैः भारत अब अगले आर्थिक चरण में प्रवेश कर रहा है। आधुनिक उद्योग, सेमीकंडक्टर, डिजिटल और भौतिक ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा, सेवाएँ और मजबूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ-इन सभी पर जोर देकर भारत खुद को एक भरोसेमंद और स्थिर विकासशील अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना चाहता है।

सुधारों पर जोर : इस बजट की एक बड़ी खासियत इसके भीतर छिपे संरचनात्मक सुधार हैं। कर व्यवस्था को सरल बनाना, निवेश नियमों को स्पष्ट करना, डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना और कस्टम्स सिस्टम में भरोसे पर आधारित व्यवस्था लागू करना-ये सभी कदम व्यापार और उद्योग के लिए रुकावटें कम करते हैं। सरकार का प्रयास है कि टैक्स भरना आसान हो, नियम स्पष्ट हों और सरकारी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी न हो। इससे न सिर्फ़ बड़े उद्योगों को बल्कि छोटे व्यापारियों, स्टार्ट-अप्स और उद्यमियों को भी राहत मिलेगी।

कल्याण के साथ वित्तीय दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक कल्याण योजनाएँ चला रही है-जैसे लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज, पेंशन और अन्य सहायता तो दूसरी ओर वित्तीय अनुशासन भी बनाए रखे हुए है। वर्ष 2026 27 के लिए राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से थोड़ा कम है। कर्ज का अनुपात भी घटकर 55.6 प्रतिशत होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि सरकार खर्च भी कर रही है और देश की आर्थिक सेहत का ध्यान भी रख रही है।

पहला कर्तव्यः विकास को तेज़ करना पहला कर्तव्य आर्थिक विकास को तेज़ और टिकाऊ बनाना है। इसके लिए सरकार सात प्रमुख क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है। बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत अगले पाँच वर्षों में 210,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे, ताकि भारत दवाओं और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बन सके। इसके साथ नए और उन्नत नाइपर संस्थान और क्लिनिकल ट्रायल नेटवर्क भी विकसित किए जाएंगे। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के ज़रिये चिप निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश है। इलेक्ट्रॉनिक पुजों के निर्माण, रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर, केमिकल पार्क, निर्माण उपकरण और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग जैसे कदम भारत के औद्योगिक आधार को मजबूत करेंगे।

छोटे उद्योग और ढांचा छोटे और मध्यम उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हें आगे बढ़ाने के लिए?10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड बनाया गया है। माइक्रो उद्योगों को भी विशेष सहायता दी जाएगी, ताकि वे आगे चलकर बड़े उद्योग बन सकें। साफ़ दिखता है। पूंजीगत खर्च बढ़ाकर ?12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है। साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड जैसे नए उपाय निजी निवेश को आकर्षित करने और परियोजनाओं के जोखिम कम करने के लिए लाए गए हैं।

रचनात्मक अर्थव्यवस्था, आईटी और निवेश सरकार अब नए विकास क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रही है। ऑरेंज इकॉनमी यानी मीडिया, गेमिंग, एनीमेशन और कंटेंट निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एवीजीसी लैब, स्किलिंग प्रोग्राम और यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाई जाएंगी। आईटी सेक्टर के लिए नियम सरल किए गए हैं। सुरक्षित कर नियम, तेज मूल्य निर्धारण समझौते और ऊँची सीमा से इस क्षेत्र को और गति मिलेगी। वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाओं, वेयरहाउसिंग और बॉन्डेड मैन्युफैक्चरिंग जोन में कर प्रोत्साहन दिए गए हैं।

व्यापार, निर्यात और जीवन को आसान बनाना केंद्रीय बजट 2026-27 का एक बड़ा फोकस व्यापार और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को बेहतर बनाना है। कस्टम प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है, ताकि अलग-अलग विभागों की मंजूरी एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिल सके। नई तकनीक, जोखिम आधारित जांच, एआई स्कैनिंग और कम शारीरिक जांच से सामान की आवाजाही तेज और सस्ती होगी।इससे भारत का व्यापार वैश्विक मानकों के करीब पहुंचेगा। निर्यातकों के लिए एक अहम फैसला यह है कि कूरियर के जरिये भेजे जाने वाले सामान पर 10 लाख की सीमा पूरी तरह हटा दी गई है। इससे छोटे व्यापारी, कारीगर, स्टार्ट-अप और एमएसएमई बिना रुकावटसकेंगे। मत्स्य उद्योग को भी बढ़ावा दिया गया है। भारतीय जहाजों द्वारा भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) या खुले समुद्र में पकड़ी गई मछलियों को निर्यात पर शुल्क मुक्त माना जाएगा। इससे समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय यात्रा को भीआसान बनाने के लिए सामान (बैगेज) से जुड़े नियमों को सरल किया जा रहा है और ड्यूटी-फ्री सीमा बढ़ाई जा रही है। ईमानदार करदाताओं के लिए छोटे विवादों को आसानी से निपटाने की व्यवस्था भी की गई है, ताकि लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से बचा जा सके।

निष्कर्ष कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 यह दिखाता है कि भारत विकास, सुधार और वैश्विक जुड़ाव तीनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है। यह बजट आम नागरिक, किसान, व्यापारी, उद्यमी और उद्योग सभी के लिए अवसर पैदा करने की कोशिश करता है। सरल नियम, डिजिटल व्यवस्था, मजबूत ढांचा और वित्तीय अनुशासन के साथ यह बजट यह भरोसा देता है कि भारत न केवल आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ रहा है, बल्कि दुनिया में एक मजबूत और जिम्मेदार आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी जगह भी बना रहा है।


(लेखक अरुण आनंद पत्रकार एवं स्तंभकार हैं)

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