वेनेजुएला में अमेरिका पर सोनिक हथियार इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप
वेनेजुएला में ऑपरेशन के दौरान अमेरिका ने किया था, इस शक्तिशाली हथियार का इस्तेमाल
अमेरिका द्वारा जिस तरह से वेनेजुएला में ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, उसे देखकर पूरी दुनिया में हलचल मच गई। 2 जनवरी 2026 को अमेरिका ने ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को ड्रग तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। लेकिन क्या आपको पता है कि इस कार्रवाई के दौरान अमेरिका ने किस हथियार का इस्तेमाल किया, जिसका अब तक दुनिया में कभी उपयोग नहीं किया गया था, और जिसकी वजह से वेनेजुएला सैनिकों को पीछे हटना पड़ा?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ,ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने एक बेहद शक्तिशाली हथियार का इस्तेमाल किया था । जिसका इस्तेमाल अभी तक कही नहीं हुआ है और इसी वजह से मजबूरन वेनेजुएला पूरी तरह बेबस हो गए थे।
दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने इस कार्रवाई के दौरान ऐसे अत्याधुनिक सोनिक या डायरेक्टेड एनर्जी हथियारों का इस्तेमाल किया, जिनका प्रभाव अब तक किसी युद्ध में खुलकर देखने को नहीं मिला था। इस आरोप के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएला की सुरक्षा व्यवस्था कुछ ही पलों में पूरी तरह चरमरा गई। स्थानीय सुरक्षा बलों के अनुसार, हमला शुरू होते ही रडार सिस्टम अचानक काम करना बंद कर गए, जिससे किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देना नामुमकिन हो गया।
ड्रोन और रहस्यमयी तरंगों से फैला आतंक
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,रडार फेल होने के कुछ ही सेकेंड बाद आसमान में बड़ी संख्या में ड्रोन दिखाई देने लगे। इसी बीच एक अजीब किस्म की तेज तरंग महसूस हुई, जिसे वह किसी अत्यधिक शक्तिशाली साउंड वेव या एनर्जी वेपन जैसा बता रहा है। उस तरंग के संपर्क में आते ही सिर के अंदर असहनीय दर्द शुरू हो गया। कई सैनिकों की नाक से खून बहने लगा, जबकि कुछ जवानों को खून की उल्टियां तक हुईं। हालात ऐसे हो गए कि अधिकांश सैनिक जमीन पर गिर पड़े और खड़े रहने की स्थिति में नहीं थे।
क्या था यह गुप्त हथियार?
हालांकि यह स्पष्ट नहीं हुआ है,कि यह सोनिक हथियार था या कोई और तकनीक, लेकिन उसके लक्षणों ने कई सैन्य विशेषज्ञों को चौंका दिया है। अमेरिका के एक पूर्व खुफिया अधिकारी का कहना है कि ऐसे लक्षण डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स से मेल खाते हैं, जिनमें माइक्रोवेव या लेजर जैसी ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। ये हथियार शरीर को अस्थायी रूप से पंगु बना सकते हैं और गंभीर आंतरिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सिर्फ 8 हेलिकॉप्टर, फिर भी पूरा इलाका कब्जे में
रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन में अमेरिका ने महज आठ हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया था, जिनसे करीब 20 सैनिक उतरे। हैरानी की बात यह रही कि इतनी कम संख्या के बावजूद अमेरिकी सेना ने कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके पर नियंत्रण हासिल कर लिया। इस मुठभेड़ को “लड़ाई” नहीं बल्कि “एकतरफा हमला” बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, वेनेजुएला की ओर से सैकड़ों जवान मौजूद थे, लेकिन अमेरिकी सैनिकों की तकनीक, गति और सटीक फायरिंग के सामने वे टिक नहीं सके।
100 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की मौत का दावा
वेनेजुएला के गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि 3 जनवरी को हुई इस अमेरिकी कार्रवाई में करीब 100 सुरक्षाकर्मियों की जान गई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इनमें से कितनी मौतें कथित गुप्त हथियार के कारण हुईं।
वहीं, व्हाइट हाउस की ओर से इस पूरे मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। प्रेस सेक्रेटरी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट को लेकर भी यह साफ नहीं किया गया है कि उसे सरकारी पुष्टि माना जाए या नहीं।