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प्रेमिका के तोहफे में भी तुम्हें मुनाफा नजर आता हैं

मेला रंगमंच पर हुआ बड़ी जीजी, गजफुट इंच नाटक का मंचन

Update: 2020-01-10 23:45 GMT

ग्वालियर।  हास्य रस से सराबोर गज फुट इंच नाटक के कलाकारों ने  अभिनय और संवादों से दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर दिया। इस  नाटक में दो अलग अलग विचारधारा के लोगो के आपसी प्रेम और तालमेल बैठाने के प्रयास करते हैं. उनके इन प्रयासों से जो परिस्थितियां निर्मित हुई उनसे कोई भी दर्शक हँसे बिना नहीं रह सका।  केपीसिंह द्वारा रचित इस नाटक में की शुरुआत दो कपडे के व्यापारियों से शुरू हुई। जिसमे पोखर मल का एक लड़का हैं टिल्लू , जो बहुत ही सीधा एवं अपनी दुनिया में रहने वाला लड़का हैं ,जो दुनियादारी की समझ से दूर सिर्फ अपने धंधे के बारे में ही सोचता रहता हैं।  आधुनिक युग के इंच सेंटीमीटर से अनजान गज फुट और मुनाफा एवं नुक्सान का हिसाब का लगा कर आराम से व्यतीत हो रही होती हैं। उसी समय उसके घरवाले उसकी शादी के लिए साई दास की लड़की जुगनी से उसकी शादी तय कर देते हैं। जोकि बेहद मॉडर्न ख्यालातों की एवं पढ़ी लिखी होती हैं।  दोनों के परिवार शादी से पहले आय करते हैं की टिल्लू और जुगनी किसी  पार्क में बैठकर आपस में बात करें एवं एक दूसरे को समझे। यहीं से शरू होता हैं नाटक में हास्य का दौर पहली बार जुगनी से मिल कर टिल्लू सिर्फ व्यापर और मुनाफे की बात करता हैं।  जुगनी उसे अपनी और से एक पेन गिफ्ट करती हैं।  उस पेन को लेकर टिल्लू चला जाता हैं।  दूसरी बार पार्क में वह दोबारा मिलते उस समय टिल्लू अपनी होने वाली पत्नी को सौ रूपए देता हैं। सौ रूपए देने क कारण पूछने पर ख़ुशी से बताता हैं की जो पेन तुमने दिया था उस पेन को मैंने मुनाफे के साथ बेच दिया।  इस बात को सुनकर जुगनी नाराज हो जाती हैं और कहती हैं की प्रेमिका के  तोहफे में भी तुम्हे प्रेम नहीं बल्कि फायदा नजर आता हैं।  टिल्लू को अपनी गलती का एहसास होता हैं और वह उसे मनाने का प्रयास करता हैं।अंत में जुगनी टिल्लू की सादगी और सच्चाई से प्रभावित होकर उससे शादी के लिए हां कर देती है।

प्रेमचंद की कहानी बड़े भाईसाहब के रूपांतरण बड़ी जीजी नाटक में छोटी  बहन एकदम मस्तमौला की तरह हमेशा खिल खिलाकर हंसती रहती है और  खेल कूद में रमा रहती  है। वही उसकी बड़ी बहिन उसे अधिकारपूर्वक डांटती हैं। कर्तव्य की याद दिलाती  हैं। हालांकि सालाना परीक्षा में खुद फेल हो जाती  हैं,  अपनी छोटी बहन से पांच साल बड़ी जीजी हर साल फ़ैल होती जाती हैं और छोटी लल्ली बड़ी जीजी  के बराबर उसकी क्लास में आ जाती हैं। इतने पर भी बड़ी बहन नहीं रुकती और तर्क देकर छोटी को उपदेशो  की माला पहनाती रहती  हैं। एक दिन लल्ली के मुंह चलाने पर बड़ी जीजी कहती हैं।  जिंदगी का असल पथ पढ़ाते हुए कहती हैं ,  इस साल पास हो गई  और अव्वल आ गई  तो तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है। महज इम्तिहान पास कर लेना काफी नहीं, असल चीज है बुद्धि का विकास। मेरे फेल होने पर न जाओ। मेरे दर्जे में आई हो तो अब दांतो से पसीना आएगा। अलजबरा और जामेंट्री के लोहे के चने चबाने पड़ेंगे और इंग्लिस्तान का इतिहास पढ़ना पढ़ेगा। मगर इन परीक्षकों को क्या परवाह। परीक्षक चाहते हैं कि बच्चे अक्षर अक्षर रट लगाए और इसी रटंत का नाम शिक्षा रख छोड़ा है। जिस पर सभागार में उपस्थित सभी दर्शक हंसने लगे। 

आगे कहती हैं तुम भले ही मेरी बराबरी में आ गई पर जो अंतर् हमारी उम्र का हैं वह कभी कम नहीं हो सकता।  जीवन का मेरा अनुभव हमेशा तुमसे अधिक हैं और रहेगा। शिक्षा में तुम मुझसे भले ही आगे निकल जाओ लेकिन अनुभव मुझसे कम ही रहेगा।  जीवन की परीक्षा में अनुभव ही काम आता हैं शिक्षा नहीं।  बड़ी जीजी की बात सुन लल्ली को अपनी गलती का एहसास होता हैं और वह जीजी से माफ़ी मांगती हैं।  

मेला रंगमंच में हुए इस कार्यक्रम में गज फुट इंच का निर्देशन अरुण पाठक ने किया एवं बड़ी जीजी नाटक का निर्देशन गीतांजलि ग्रेवाल ने किया।   

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