जबलपुर में रफ्तार का कहर; सड़क किनारे खाना खा रहे 13 मजदूरों को कार ने कुचला
जबलपुर में तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे खाना खा रहे 13 मजदूरों को कुचला। हादसे में 2 की मौत, 7 गंभीर हालत में भर्ती।
जबलपुरः मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में रविवार के दिन दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। इसके चलते मौके पर चीख पुकार मच गई। दरअसल, रविवार की दोपहर कुछ मजदूर काम के बीच सुकून के दो पल निकालकर सड़क किनारे बैठे थे। उन्हें क्या पता था कि यही पल उनकी जिंदगी का सबसे भयावह मोड़ बन जाएगा। तेज रफ्तार कार ने 13 मजदूरों को रौंद दिया। हादसे में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात मजदूर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
एकता चौक पर हुआ दर्दनाक हादसा
यह हादसा बरेला थाना क्षेत्र के एकता चौक पर दोपहर करीब 2 बजे हुआ। मंडला जिले के बीजाडांडी थाना क्षेत्र के बिहारिया गांव के रहने वाले मजदूर पिछले डेढ़ महीने से यहां मजदूरी कर रहे थे। रविवार को वे सड़क के डिवाइडर में लगी लोहे की जालियों की सफाई कर रहे थे।
खाना खाते वक्त आई मौत
काम खत्म करने के बाद सभी मजदूर सड़क किनारे बैठकर खाना खा रहे थे। तभी बरेला से जबलपुर की ओर आ रही एक सफेद कार तेज रफ्तार में आई और मजदूरों को कुचलते हुए आगे निकल गई। चंद सेकेंड में मौके पर चीख-पुकार मच गई।
दो की मौत, सात की हालत गंभीर
हादसे में चैनवती बाई (40) और लच्छो बाई (40) की मौके पर ही मौत हो गई। कुल 11 मजदूर घायल हुए, जिनमें से सात की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। हादसे में घायल हुए मजदूर महंत उइके ने बताया कि कार अचानक सामने आ गई। कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। देखते ही देखते कई साथी सड़क पर पड़े थे और कार भाग चुकी थी।
प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचे
हादसे की सूचना मिलते ही बरेला थाना प्रभारी अनिल पटेल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। डायल 108 की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय भी अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल जाना। पुलिस ने फरार कार चालक की तलाश शुरू कर दी है। आसपास लगे CCTV कैमरों और टोल नाकों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। थाना प्रभारी का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
रफ्तार और लापरवाही पर फिर सवाल
यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग पर सवाल खड़े करता है। रोजी-रोटी के लिए शहरों में काम करने वाले मजदूर अक्सर सड़क किनारे ही वक्त बिताने को मजबूर होते हैं, और ऐसे हादसे उनकी असुरक्षा को उजागर कर देते हैं।