MP में 9 फरवरी से स्वास्थ्य सेवाएं होंगी ठप? 30 हजार कर्मी आंदोलन पर
मध्य प्रदेश में 9 फरवरी से 30 हजार संविदा-आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों के आंदोलन से सरकारी अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
भोपालः मध्य प्रदेश की राजधानी समेत सभी जिलों की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं आगामी 9 फरवरी से बुरी तरह चरमरा सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले करीब 30 हजार संविदा व आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी अब अपने अधिकारों के लिए राजधानी समेत सभी जिलों में सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।
दरअसल, मध्य प्रदेश में संविदा-आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने वर्षों से लंबित मांगों को लेकर फरवरी से अप्रैल तक चरणबद्ध प्रदेशव्यापी आंदोलन करने की घोषणा कर दी है। संघ ने आगामी हड़ताल को लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक सूचना दे दी है।
संविदा और आउटसोर्स के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं
बता दें कि प्रदेश के 75 फीसदी सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं संविदा आउटसोर्स के भरोसे चल रही है। ये कर्मचारी शासकीय मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और संजीवनी क्लिनिकों में कार्यरत ये कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दैनिक संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं, तो सरकारी अस्पतालों की सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इसलिए बढ़ रहा है आक्रोश
संविदा-आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारी वर्षों से अस्पतालों में कार्य कर रहे हैं। लेकिन न तो उन्हें नियमित दर्जा मिला और न ही संवैधानिक श्रम अधिकार मिला है। मंहगाई के इस दौर में भी वेतन इतना कम है कि परिवार को बड़ी मुश्किल से चला पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा स्वीकृत 20 से 25 हजार रुपए वेतन के स्थान पर कर्मचारियों को केवल 8 से 12 हजार रुपए ही दिए जा रहे हैं। ठेकेदारी व्यवस्था के कारण वेतन में कटौती, असमानता और सामाजिक सुरक्षा का घोर अभाव बना हुआ है।
मानदेय में वर्षों से वृद्धि नहीं
कोमल सिंह ने बताया कि जहां नियमित कर्मचारियों को वेतन संशोधन और महंगाई भत्ता मिलता है, वहीं समान कार्य करने वाले आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय में वर्षों से कोई वृद्धि नहीं होती। इससे न केवल आर्थिक असमानता बढ़ रही है, बल्कि कार्य-प्रेरणा और प्रशासनिक दक्षता भी प्रभावित हो रही है। इसलिए हमने अब चरणबद्ध आंदोलन करने का निर्णय लिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो स्वास्थ्य सेवाओं में उत्पन्न होने वाली स्थिति की जिम्मेदारी शासन की होगी।
इन स्टेप्स में बढ़ेगा आंदोलन
-9-10 फरवरी- सीएमएचओ के माध्यम से ज्ञापन।
-16-18 फरवरी- काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन
-23-24 फरवरी- भोपाल में धरना
-2 मार्च- जिला स्तर पर लेंगे प्रेस कांफ्रेस
-10-11 मार्च - कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन
-7 अप्रैल - भोपाल में जंगी प्रदर्शन
ये हैं प्रमुख मांगेंः-
- 5 वर्ष से सेवा दे रहे कर्मचारियों को बिना शर्त नियमित या संविदा में मर्ज किया जाएं।
- यूपी और हरियाणा की तर्ज पर स्थायी नीति बनाकर समाधान
- न्यूनतम 21,000 रुपए मासिक वेतन निर्धारित की जाए।
- 1 अप्रैल से लागू पुनरीक्षित वेतन वृद्धि के अनुसार 11 माह का एरियर भुगतान।
- निजी आउटसोर्स एजेंसियों को समाप्त कर सीधे विभाग से हो वेतन भुगतान।
- नियमित कर्मचारियों की तरह सभी शासकीय अवकाश।
- नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण।
- आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी सुविधा लागू की जाए।