गजब MP सरकार का अजब फरमान, BU के प्रोफेसर को कुत्तों को भगाने की जिम्मेदारी

स्कूलों के बाद कॉलेजों में अवारा कुत्तों को हटाने के सरकार का फरमान जारी हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग के दिए आदेश के अनुसार कॉलेजों में प्रोफेसर आवारा कुत्तों की निगरानी करेंगे।

Update: 2026-01-03 15:38 GMT

भोपालः बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों ने लोगों को परेशान कर दिया है। स्ट्रीट डॉग्स से अब स्टूडेंस से लेकर बीयू का स्टाफ तक डरने लगा है। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने आवारा कुत्तों को भगाने का जिम्मा नोडल अधिकारियों यानी कि प्रोफेसरों को दिया है। इस आदेश से प्रोफेसर अचंभित है। इनके सामने समस्या खड़ी हो गई है कि कुत्ते भगाएं या स्डूडेंस को पढ़ाएं।

मिली जानकारी के अनुसार, राजधानी के शैक्षणिक संस्थानों कॉलेज और स्कूलों में लगातार आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए निर्देश दिए कि शैक्षणिक परिसरों में आवारा कुत्तों का अब तक प्रबंधन करें। इन कुत्तों का भगाने का जिम्मा संबंधित विभाग प्रमुखों को दें, ताकि शैक्षणिक परिसर कुत्तों से मुक्त रहेंगे।

उच्च शिक्षा विभाग का आदेश हुआ जारी

इस आधार पर उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक परिसरों से कुत्तों को हटाने के लिए अब संस्थानों को बाकायदा एक प्रोफेसर अथवा नोडल अधिकारी को नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसकी ड्यूटी परिसर को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने की होगी। संबंधित नोडल अधिकारी का नाम मेन गेट सहित अन्य स्थानों पर बोर्ड पर लिखा होना चाहिए। बीयू परिसर में कई स्ट्रीट डॉग्स स्थायी रूप से रह रहे हैं। इनको पालने वालों ने लाल सिंह, रूपा और पारो जैसे नाम इन कुत्तों को दिए गए हैं। इन कुत्तों का निवास मुख्यत: प्रशासनिक भवन और विभिन्न विभाग हैं।

कुत्ता भगाओ अधिकारी का प्रभार लेने को कोई भी तैयार नहीं

यूजीसी के इस निर्देश को बीयू के अधिकांश प्रोफेसर बेतुका और औपचारिक बता रहे हैं। बीयू के प्रोफेसर डॉ शंशाक शेखर का कहना है कि कुत्ता भगाओ अधिकारी का प्रभार कोई प्रोफेसर लेने तैयार नहीं होगा। वैसे भी अभी इस आदेश का क्रियान्वयन नहीं होगा। शिक्षकों ने बीयू प्रबंधन से मांग की कि कुत्तों को भगाने के लिए अलग से कर्मचारी रखें।

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