भोपाल से दिग्विजय सिंह होंगे कांग्रेस प्रत्याशी

Update: 2019-03-23 19:19 GMT

भोपाल। दस साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह विगत 16 सालों से राजनीतिक वनवास झेल रहे हैं। कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दिग्विजय सिंह अब लोकसभा चुनावों में भोपाल से कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे। दिग्विजय सिंह को कांग्रेस द्वारा भोपाल से लोकसभा प्रत्याशी बनाए जाने का खुलासा शनिवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पत्रकारों के समक्ष किया। कमलनाथ ने कहा कि मैंने ही उनसे कहा था कि वह भोपाल, इंदौर या जबलपुर में कहीं से लडि़ए, तो दिग्विजय सिंह ने उनसे कहा कि आप तय करिए और मैंने भोपाल कहा, केन्द्रीय चुनाव अभियान समिति ने भी इसे मान लिया। उल्लेखनीय है कि कमलनाथ ने एक रैली में भी दिग्विजय सिंह से कहा था कि वह पार्टी के लिए किसी कठिन सीट से चुनाव लड़ें।

कमलनाथ की तुरुप चाल

मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार बनने के बाद से ही यह देखा जा रहा है कि मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो अथवा प्रशासनिक पदस्थापनाएं, सरकार की नीतियां हों अथवा निर्णय सभी जगह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का प्रभावी हस्तक्षेप है। माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह के समर्थन से मुख्यमंत्री बने कमलनाथ उनके इस हस्तक्षेप के कारण अपने तरीके से सरकार नहीं चला पा रहे हैं। इस कारण वह किसी भी तरह सत्ता की राजनीति से अलग करना चाहते हैं। इसी कारण उन्होंने यह पांसा फैंका है। भोपाल सीट से दिग्विजय सिंह अगर जीते तो भी प्रदेश की राजनीति में उनका हस्तक्षेप नगण्य हो जाएगा। दिग्विजय सिंह जीते तो इसका सीधा श्रेय भी कमलनाथ को जाएगा जो संगठन के समक्ष उनका कद बढ़ाएगा। अगर दिग्विजय सिंह जीत नहीं सके तो माना जा रहा है कि केन्द्रीय नेतृत्व के समक्ष उनका प्रभाव कम हो जाएगा तथा संभवत: प्रदेश सरकार में उनका हस्तक्षेप भी नगण्य हो जाएगा और उम्र के उत्तरार्ध में वह राजनीति से संन्यास भी ले सकते हैं। इस तरह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह को मध्यप्रदेश की राजनीति से दूर करने के लिए यह तुरुप चाल चली है।

कांग्रेस ने 1984 में जीती थी भोपाल सीट

भोपाल लोकसभा सीट 30 साल से भाजपा के कब्जे में है। 1984 में केएन प्रधान कांग्रेस के टिकट पर भोपाल सीट से जीते थे। इसके बाद 1989 से लगातार यहां से भाजपा प्रत्याशी जीत रहे हैं। मप्र के गठन के बाद से अब तक हुए 16 चुनाव में सिर्फ पांच बार ही कांग्रेस यहां जीत सकी है। दो बार मैमूना सुल्तान और दो बार शंकरदयाल शर्मा यहां से लोकसभा सदस्य रहे। शर्मा मप्र राज्य के गठन से पहले भोपाल स्टेट के मुख्यमंत्री थे। भाजपा नेता उमा भारती और कैलाश जोशी भी भोपाल से सांसद रहे। ये दोनों मप्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

16 साल बाद हुई वापसी

मुख्यमंत्री रहते दिग्विजय सिंह अंतिम बार 2003 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन प्रदेश में सत्ता चले जाने के बाद उन्होंने 10 साल तक कोई चुनाव नहीं लडऩे की घोषणा कर दी थी। वर्ष 2014 में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया था। इस बार दिग्विजय सिंह ने खुद ही प्रदेश की किसी सीट से लोकसभा चुनाव लडऩे की इच्छा संगठन के सामने व्यक्त की थी। 

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