संसदीय समिति ने रेल मंत्रालय को दिया सुझाव
संसदीय समिति ने मंगलवार को कहा कि आरएसी श्रेणी के तहत बुक किए गए टिकटों के लिए यात्रियों से पूरा किराया लेना सही नहीं है। समिति ने रेल मंत्रालय को सुझाव दिया कि ऐसे यात्रियों को आंशिक किराया वापस करने के लिए नियम बनाए जाने चाहिए।
RAC में पूरा किराया, लेकिन आधी सुविधा?
मौजूदा नियमों के तहत रेलवे आरएसी श्रेणी में ट्रेनों में बर्थ बुक करने के लिए यात्रियों से पूरा किराया वसूलता है। हालांकि यात्री आरएसी श्रेणी में रहते हुए बर्थ दूसरे आरएसी यात्री के साथ साझा करता है। इस स्थिति में दोनों यात्रियों से पूरा किराया लिया जाता है। वहीं समिति ने यह भी कहा कि सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए 55 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार का बेंचमार्क बेहद कम है। वर्ष 2007 से सुपरफास्ट ट्रेनों के कैटेगराइजेशन के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
संसद में रिपोर्ट पेश की गई
लेखा समिति ने संसद में पेश की गई अपनी रिपोर्ट ‘भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन में समय की पाबंदी और यात्रा का समय’ में कहा कि आरएसी (कैंसलेशन के बदले आरक्षण) श्रेणी के तहत टिकटों के लिए पूरा किराया लेना उचित नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार्ट बनने के बाद भी टिकट धारक को बिना बर्थ की सुविधा के आरएसी श्रेणी में यात्रा करनी पड़ती है।
समिति ने रेलवे से आग्रह किया कि ऐसे यात्रियों को आंशिक किराया वापस करने के लिए कदम उठाए जाएं और इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी समिति को दी जाए।