पढ़ते हैं, फिर भूल जाते हैं? परीक्षा पे चर्चा में पीएम मोदी ने बताया आसान रास्ता
परीक्षा पे चर्चा में पीएम मोदी ने छात्रों को पढ़ाई भूलने की समस्या, मार्क्स के दबाव और AI के सही इस्तेमाल पर व्यावहारिक सलाह दी।
नई दिल्ली। परीक्षा से पहले तनाव, नंबरों का दबाव और ये डर कि जो पढ़ा है वो याद रहेगा या नहीं, यही सवाल हर छात्र के मन में घूमता है। इसी बीच परीक्षा पे चर्चा के 9वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों से बातचीत की और उन्हीं सवालों को सीधे छुआ, जिनसे बच्चे रोज़ जूझते हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान मंच से नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक की तरह बात की, कहीं हल्की मुस्कान, तो कहीं सीधी सीख.
जो पढ़ते हैं, वो भूल जाते हैं – इस सवाल पर क्या बोले पीएम
छात्रों ने पीएम मोदी से पूछा कि कई बार पूरी मेहनत से पढ़ने के बावजूद सब भूल क्यों जाता है। इस पर पीएम ने कहा कि जो चीज़ हमें याद रहती है, उसमें हम पूरी तरह शामिल होते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज का दिन आपको इसलिए याद रहेगा क्योंकि आप इसमें पूरी तरह इनवॉल्व हैं। पढ़ाई भी तभी असर करती है, जब उसे बोझ नहीं, अपनी प्रक्रिया बनाया जाए। पीएम ने मज़ाकिया लहज़े में ये भी कहा कि खुद को कम होशियार मानिए, और दूसरों से सवाल पूछने में संकोच मत कीजिए, सीखने की यही शुरुआत है।
मार्क्स को लेकर बोले पीएम- ये बीमारी बन गई है
पीएम मोदी ने साफ कहा कि मार्क्स आजकल एक तरह की बीमारी बन चुके हैं। बच्चे, माता-पिता, यहां तक कि समाज भी इंसान को नंबरों से आंकने लगा है। उन्होंने कहा कि अगर मन सिर्फ नंबरों से जुड़ा रहेगा, तो जीवन की दिशा भटक सकती है। ज़रूरी ये है कि आप ये सोचें कि आगे जाना कहां है, क्या बनना है, और उस रास्ते में सीख क्या रहे हैं. यह बात सुनते ही हॉल में बैठे कई छात्रों ने तालियां बजाईं, शायद खुद को उस बात से जोड़ पा रहे थे।
AI मददगार है, लेकिन समाधान नहीं
पीएम मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को AI का इस्तेमाल ज़रूर करना चाहिए, ये सीखने का एक अच्छा साधन है। लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी साफ किया कि AI हर लक्ष्य को हासिल करने का शॉर्टकट नहीं है। सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता इंसान को खुद ही विकसित करनी होगी। टेक्नोलॉजी साधन है, सहारा नहीं.