भारत का सौर ऊर्जा क्षमता निर्माण बाजार 2026 में छह प्रतिशत की वृद्धि के साथ अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा सोलर बाजार बन जाएगा। यह जानकारी वैश्विक ऊर्जा बाजार अनुसंधान फर्म ब्लूमबर्ग एनईएफ (बीएनईएफ) की बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वर्तमान सौर ऊर्जा निर्माण गति से 2030 तक पांच लाख मेगावाट की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करना संभव है। हालांकि, 2024 में नीलामी हुई कई परियोजनाओं का अभी भी बिजली खरीदारों का इंतजार है, जो इस लक्ष्य की राह में एक जोखिम बना हुआ है। देश में सौर ऊर्जा मॉड्यूल की उत्पादन क्षमता घरेलू मांग से अधिक हो चुकी है, जबकि कुछ कच्चे माल और पुर्जों के लिए आयात निर्भरता बनी हुई है।
बीएनईएफ ने रिपोर्ट में यह भी कहा कि इस वर्ष चीन की सौर निर्माण गति धीमी रहेगी, जिससे वैश्विक सौर निर्माण में पहली बार कुल उत्पादन में कमी देखने को मिल सकती है।
अमेरिकी बाजार में गिरावट
अमेरिका में जनकल्याण योजनाओं पर सब्सिडी कटौती वाले ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट’ के कारण वहां सौर बिजली परियोजनाओं में इस साल लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है। इस विधेयक के तहत अमेरिकी परियोजनाओं को विदेशी संस्थाओं से संबंधित नियमों का पालन करना होगा, जिससे अमेरिका में सौर ऊर्जा निर्माण और धीमा हो जाएगा।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अमेरिका में सौर ऊर्जा स्थापना (इंस्टॉलेशन) में केवल नाम मात्र की वृद्धि होगी। इसी दौरान भारत में सौर बिजली क्षमता निर्माण छह प्रतिशत बढ़कर लगभग 50,000 मेगावाट से थोड़ा अधिक रह जाएगा। नई क्षमता में अधिकांश बड़ी परियोजनाओं के माध्यम से आएगी, वहीं सरकारी सब्सिडी से आवासीय रूफटॉप सौर प्रणाली को भी बढ़ावा मिल रहा है।
चीन में वार्षिक वृद्धि में अपेक्षित गिरावट के बावजूद, यह देश अभी भी काफी बड़े अंतर से दुनिया का सबसे बड़ा सोलर बाजार बना हुआ है।