पाक बॉर्डर पर 8 आतंकी कैंप एक्टिव, ऑपरेशन सिंदूर जारी: आर्मी चीफ का सख्त संदेश

आर्मी चीफ बोले- पाकिस्तान बॉर्डर पर 8 आतंकी कैंप एक्टिव, ऑपरेशन सिंदूर जारी है, किसी भी दुस्साहस का जवाब भारत देगा।

Update: 2026-01-13 09:13 GMT

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को फिर से साफ कर दिया कि भारत अब किसी भी दुस्साहस को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और अगर पाकिस्तान की ओर से कोई हरकत हुई, तो जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा ।

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ऑपरेशन सिंदूर अब भी एक्टिव, सेना पूरी तरह तैयार

जनरल द्विवेदी ने बताया कि पाकिस्तान बॉर्डर और एलओसी के पास 8 आतंकी कैंप अब भी सक्रिय हैं. इन कैंपों में ट्रेनिंग और मूवमेंट की जानकारी लगातार मिल रही है । उनका कहना था कि थलसेना वायुसेना और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल का सबसे बड़ा उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर है. इसी ऑपरेशन में करीब 100 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि आतंकी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया गया ।

7 मई से 10 मई तक बदले रणनीतिक समीकरण

आर्मी चीफ के मुताबिक 7 मई को 22 मिनट की शुरुआती कार्रवाई और इसके बाद 10 मई तक 88 घंटे चला समन्वित अभियान । इस पूरे ऑपरेशन में 9 में से 7 आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नष्ट किया गया. इससे पाकिस्तान की पुरानी परमाणु धमकी वाली रणनीति भी कमजोर पड़ी ।

ड्रोन मूवमेंट पर सेना की पैनी नजर

हाल के दिनों में बॉर्डर के पास ड्रोन दिखने की घटनाओं पर भी आर्मी चीफ ने स्थिति साफ की. उन्होंने बताया कि ये छोटे, लाइट जलाकर उड़ने वाले ड्रोन थे, जो ज्यादा ऊंचाई पर नहीं उड़ते। 10 जनवरी को करीब 6 ड्रोन, 11 और 12 जनवरी को 2 से 3 ड्रोन दिखे इनका मकसद भारतीय सेना की सतर्कता जांचना था. ताकि आतंकियों को घुसपैठ का मौका मिल सके. लेकिन सेना हर मूवमेंट पर नजर रखे हुए है ।

1963 का पाक-चीन समझौता अवैध: आर्मी चीफ

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनरल द्विवेदी ने एक अहम कूटनीतिक मुद्दे पर भी भारत का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुआ समझौता भारत के लिए अवैध है. जिसके तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी चीन को सौंपी थी । साथ ही उन्होंने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को भी अवैध बताया और साफ कहा कि भारत इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा ।

2025 में आतंक के खिलाफ बड़ा एक्शन

आर्मी चीफ के मुताबिक, 2025 में अब तक 31 आतंकवादी मारे गए, जिनमें ज्यादातर पाकिस्तानी थे. इनमें पहलगाम हमले से जुड़े आतंकी भी शामिल थे, जिन्हें ऑपरेशन महादेव के तहत ढेर किया गया ।

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