छत्तीसगढ़ में माशिमं ने बढ़ाया बोर्ड परीक्षा शुल्क, 5 साल बाद छात्रों पर बढ़ा बोझ

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा शुल्क बढ़ाया। 2026-27 से छात्रों को अब 800 रुपये देने होंगे। इसके साथ ही अन्य मदों में भी फीस बढ़ाई है।

Update: 2026-02-09 09:54 GMT

रायपुरः छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने करीब पांच साल बाद 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े शुल्क में बढ़ोतरी कर दी है। यह नई दरें शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होंगी। संशोधित व्यवस्था के तहत अब नियमित परीक्षार्थियों को बोर्ड परीक्षा शुल्क, अंकसूची और प्रति विषय प्रायोगिक शुल्क मिलाकर कुल 800 रुपये देने होंगे। इससे पहले छात्रों को इसके लिए 460 रुपये चुकाने पड़ते थे।

इसके साथ ही बोर्ड परीक्षा आवेदन फॉर्म के शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। आवेदन शुल्क को 80 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया है। हालांकि प्रवेश पत्र की द्वितीय प्रति के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पहले की तरह 80 रुपये ही रहेगा।

इन 22 काम में बढ़ाया गया शुल्क

10वीं और 12वीं के परीक्षा शुल्क में यह वृद्धि माशिमं की कार्यपालिका समिति की बैठक में तय की गई। समिति ने करीब 22 अलग-अलग मदों के शुल्क बढ़ाने को मंजूरी दी है। इनमें नामांकन शुल्क, अतिरिक्त विषय, एक या दो विषय की द्वितीय मुख्य/अवसर परीक्षा, स्वाध्यायी छात्रों के पंजीयन और अनुमति शुल्क समेत कई अन्य मद शामिल हैं।

प्राइवेट वाले छात्रों पर भी भार

शुल्क बढ़ोतरी का असर स्वाध्यायी छात्रों पर भी पड़ेगा। प्रदेश के एससी/एसटी वर्ग के स्वाध्यायी छात्रों के पंजीयन और अनुमति शुल्क को करीब डेढ़ गुना बढ़ा दिया गया है। पहले जहां इसके लिए 560 रुपये लगते थे, अब छात्रों को 800 रुपये चुकाने होंगे। वहीं राज्य के नए छात्रों और राज्य से बाहर के छात्रों के लिए पंजीयन व अनुमति शुल्क 1,540 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है।

विषयवार परीक्षा शुल्क में भी इजाफा किया गया है। एक विषय की परीक्षा का शुल्क 280 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये कर दिया गया है, जबकि दो विषयों (द्वितीय मुख्य/अवसर परीक्षा) के लिए शुल्क 340 रुपये से बढ़कर 600 रुपये हो गया है।

5 साल बाद की गई बढ़ोतरी

गौरतलब है कि माशिमं ने इससे पहले वर्ष 2021 में बोर्ड परीक्षा और संबंधित शुल्कों में वृद्धि की थी। पांच साल बाद एक बार फिर शुल्क बढ़ने से छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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