स्टेरॉयड, तनाव और बिगड़ी दिनचर्या युवाओं को बना रही शुगर मरीज
पोस्ट कोविड असरः 15 से 25 साल के युवाओं में भी बढ़े टाइप-2 डायबिटीज के केस
रायपुर। कोविड संक्रमण से उबर चुके लोगों, विशेषकर युवाओं में डायबिटीज के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। चिंताजनक तथ्य यह है कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनके परिवार में पहले डायबिटीज का कोई इतिहास नहीं था। कोविड के बाद वे इस बीमारी की चपेट में आए और अब नियमित दवाइयों पर निर्भर हैं। 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग के किशोर और युवा भी इसमें शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कोविड के दौरान मरीज दो तरह से डायबिटीज के शिकार हुए। पहले वे, जिनका ब्लड शुगर अस्थायी रूप से बढ़ा और कुछ समय तक दवा लेने के बाद सामान्य हो गया। दूसरे वे मरीज, जिनमें डायबिटीज स्थायी रूप से विकसित हो गई और अब तक नियंत्रित नहीं हो पाई है। इन मरीजों में अधिकांशतः टाइप-2 डायबिटीज पाई जा रही है।
सीएमएचओ रायपुर डॉ. मिथिलेश चौधरी का कहना है कि कोविड के दौरान लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग, शारीरिक निष्क्रियता, मानसिक तनाव और अनियमित खानपान ने युवाओं के मेटाबॉलिज्म पर गहरा असर डाला है। यही कारण है कि अब कम उम्र में भी टाइप-2 डायबिटीज के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। जिन मरीजों की कोविड के दौरान स्थिति गंभीर रही, उनमें यह जोखिम और अधिक पाया गया है। हालांकि समय पर जांच, नियमित मॉनिटरिंग, संतुलित आहार, व्यायाम और डॉक्टर की सलाह से दवाइयों के सही उपयोग से इस स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और जटिलताओं से बचा जा सकता है।
ओपीडी में रोज बढ़ रहे नए मरीज
शहर के अंबेडकर अस्पताल, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना 200 से 250 मरीज डायबिटीज के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से 20 से 25 मरीज ऐसे होते हैं, जिनमें पहली बार डायबिटीज की पुष्टि होती है। खास बात यह है कि 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग में भी टाइप-2 डायबिटीज के नए मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इसके पीछे कोविड के दौरान स्टेरॉयड का उपयोग, मानसिक तनाव, बिगड़ी दिनचर्या, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खानपान प्रमुख कारण हैं।
बचाव के उपाय
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का सेवन न करें
- सप्ताह में कम से कम तीन दिन कुल 150 मिनट या रोज 45 मिनट वॉक करें
- योग, मेडिटेशन और नियमित व्यायाम अपनाएं
- संतुलित आहार लें, प्रोटीन और साबुत अनाज शामिल करें
- समय पर और नियंत्रित मात्रा में भोजन करें
- लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं
- लक्षणों को न करें नजरअंदाज
सीनियर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अभिनय गुप्ता का कहना है कि यदि अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, असामान्य भूख, वजन में अचानक बदलाव, थकान, घाव का देर से भरना, त्वचा संक्रमण या धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण नजर आएं, तो तुरंत ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए। जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।