जन्म–मृत्यु पंजीयन अब मुफ्त नहीं, सरकार ने तय किया शुल्क का दायरा

नगर निगम क्षेत्रों में नई व्यवस्था लागू, राजपत्र में अधिसूचना जारी हो गई है।

Update: 2026-02-07 08:44 GMT

रायपुर। नगर निगम क्षेत्र में अब जन्म और मृत्यु पंजीयन से जुड़ी सेवाओं के लिए नागरिकों को निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। इस संबंध में राज्य सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद नगर निगम और पंजीयन कार्यालयों में नई शुल्क व्यवस्था लागू कर दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को जन्म या मृत्यु से संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी निकालनी है और रिकॉर्ड एक वर्ष के भीतर का है, तो इसके लिए 20 रुपये शुल्क देना होगा। यदि रिकॉर्ड एक वर्ष से अधिक पुराना है, तो हर अतिरिक्त वर्ष की तलाशी के लिए भी 20 रुपये शुल्क तय किया गया है। इसके अलावा जन्म या मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी कराने पर 50 रुपये शुल्क लिया जाएगा। वहीं, यदि किसी जन्म या मृत्यु का रिकॉर्ड कार्यालय में उपलब्ध नहीं है और इसके लिए अनुपलब्धता प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है, तो इसके लिए 20 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

एक वर्ष बाद मजिस्ट्रेट से आदेश लेना जरूरी

राजपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद दी जाती है, तो इसे विलंबित पंजीयन माना जाएगा। ऐसे मामलों में पंजीयन केवल सक्षम अधिकारी के आदेश पर ही किया जाएगा। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा अधिकृत कार्यपालिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। साथ ही 100 रुपये विलंब शुल्क जमा करने के बाद ही पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सर्टिफिकेट में नाम दर्ज कराने पर भी शुल्क

यदि किसी बच्चे का जन्म पंजीयन बिना नाम के किया गया है, तो माता-पिता या अभिभावक जन्म पंजीयन की तिथि से 12 माह के भीतर नाम की जानकारी रजिस्ट्रार को दे सकते हैं। यदि यह सूचना 12 माह के बाद लेकिन 15 वर्ष की अवधि के भीतर, या 15 वर्ष के बाद दी जाती है, तो राज्य शासन की 4 अगस्त 2023 की अधिसूचना के अनुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस स्थिति में जन्म रजिस्टर उपलब्ध होने पर 250 रुपये विलंब शुल्क जमा करने पर नाम की प्रविष्टि की जाएगी।

डिजिटल भुगतान की सुविधा

नई व्यवस्था के तहत बैंक चालान, ई-चालान और डिजिटल भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। नगद भुगतान की स्थिति में आवेदक को विधिवत रसीद देना अनिवार्य होगा।

शुल्क वसूली और लेखा-जोखा पर सख्त निर्देश

सरकार ने शुल्क वसूली को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यदि रजिस्ट्रार द्वारा नगद शुल्क लिया जाता है, तो उसे पूरी राशि का सही लेखा-जोखा रखना होगा। प्रत्येक माह के अंत में यह राशि बैंक चालान, ई-चालान या अन्य स्वीकृत भुगतान माध्यमों से शासन के खाते में जमा करानी होगी। जमा की गई राशि की चालान प्रति मासिक प्रगति रिपोर्ट के साथ जिला रजिस्ट्रार को देना अनिवार्य किया गया है।

Similar News