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ITR फाइलिंग शुरू, ITR-1 और 4 जारी

ITR फाइलिंग सीजन शुरू, आयकर विभाग ने जारी किए ITR-1 और ITR-4 फॉर्म; जानिए किसे मिलेगा फायदा

आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ITR-1 और ITR-4 फॉर्म जारी कर दिए हैं। जानिए कौन भर सकता है ये फॉर्म, क्या हैं नियम और जल्दी रिटर्न फाइल करने के फायदे।


itr फाइलिंग सीजन शुरू आयकर विभाग ने जारी किए itr-1 और itr-4 फॉर्म जानिए किसे मिलेगा फायदा

अगर आप नौकरीपेशा हैं, पेंशन लेते हैं या छोटा कारोबार करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 यानी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ITR फाइलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने ITR-1 और ITR-4 की एक्सेल यूटिलिटीज जारी कर दी हैं, जिससे करदाता अब अपना रिटर्न दाखिल करना शुरू कर सकते हैं।  हर साल आखिरी तारीख के करीब पोर्टल पर बढ़ते दबाव और तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में इस बार जल्दी फाइलिंग शुरू होना लाखों करदाताओं के लिए राहत माना जा रहा है।

आखिर ITR-1 और ITR-4 फॉर्म क्या हैं?

दरअसल, आयकर विभाग अलग-अलग तरह के करदाताओं के लिए अलग ITR फॉर्म जारी करता है। ITR-1 उन लोगों के लिए है जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी कमाई वेतन, पेंशन, दो मकानों तक की संपत्ति या ब्याज से होती है।

इसके अलावा 5 हजार रुपये तक की कृषि आय वाले लोग भी इस फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन वाले करदाता भी ITR-1 भर सकते हैं। दूसरी ओर, ITR-4 छोटे कारोबारियों और पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है। यह फॉर्म उन लोगों के लिए उपयोगी है जो धारा 44AD, 44ADA या 44AE के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम चुनते हैं।

जल्दी ITR भरना क्यों फायदेमंद?

विशेषज्ञ मानते हैं कि समय से पहले ITR फाइल करने से कई फायदे मिलते हैं।  सबसे बड़ा फायदा यह है कि आखिरी समय में वेबसाइट पर बढ़ते ट्रैफिक और तकनीकी समस्याओं से बचा जा सकता है।

अब समझिए इसका दूसरा बड़ा फायदा। अगर आपका टैक्स रिफंड बनता है, तो जल्दी रिटर्न भरने पर रिफंड भी जल्दी मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा बैंक लोन, वीजा और वित्तीय दस्तावेजों के लिए भी ITR एक अहम दस्तावेज माना जाता है। ऐसे में समय पर रिटर्न दाखिल करना भविष्य में काम आता है।

ऑफलाइन यूटिलिटी से कैसे होगा फायदा?

आयकर विभाग ने जो एक्सेल यूटिलिटी जारी की है, उससे करदाता ऑफलाइन मोड में अपनी जानकारी भर सकते हैं। इसके बाद JSON फाइल बनाकर उसे ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है।

यानी इंटरनेट की धीमी स्पीड या पोर्टल की समस्या होने पर भी लोग आराम से अपनी तैयारी पूरी कर सकते हैं। फिलहाल विभाग का फोकस इस बार फाइलिंग प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने पर दिख रहा है, ताकि वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनभोगी और छोटे व्यवसायी बिना परेशानी समय सीमा से पहले अपना रिटर्न दाखिल कर सकें।

31 जुलाई की डेडलाइन क्यों अहम?

आयकर रिटर्न दाखिल करने की सामान्य अंतिम तारीख 31 जुलाई मानी जाती है। हालांकि हर साल आखिरी दिनों में भारी संख्या में लोग रिटर्न भरते हैं, जिससे पोर्टल पर दबाव बढ़ जाता है।

यही वजह है कि टैक्स विशेषज्ञ अभी से फाइलिंग शुरू करने की सलाह दे रहे हैं। खासकर उन लोगों को, जिनकी आय के कई स्रोत हैं या जिन्हें टैक्स रिफंड का इंतजार रहता है। फिलहाल ITR-1 और ITR-4 यूटिलिटी जारी होने के बाद करदाताओं के लिए फाइलिंग प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है।

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