ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे में हनीमून विवाद के बाद रेलवे नियम चर्चा में हैं। क्या कूपे निजी जगह माना जाता है और नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है, जानिए पूरी जानकारी।
भारतीय रेलवे की एक ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे में कथित हनीमून की तैयारी का मामला सामने आया था। इसके बाद रेलवे के नियमों को लेकर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर कई लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या ट्रेन का कूपे किसी होटल के कमरे की तरह पूरी तरह निजी माना जा सकता है। यदि नहीं किया जा सकता है और कोई ऐसा कर नियम तोड़ता है तो क्या कार्रवाई हो सकती है?
हालांकि ताजा मामले में रेलवे ने संबंधित चीफ टिकटिंग इंस्पेक्टर को निलंबित कर जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही यह सवाल भी चर्चा में है कि सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की प्राइवेसी और सार्वजनिक शालीनता के बीच कानून की सीमा आखिर कहां तक जाती है।
क्या ट्रेन का कूपे निजी जगह माना जाता है?
भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार फर्स्ट एसी कूपे यात्रियों को गोपनीयता और आराम देने के लिए बनाया गया है। लेकिन इसे पूरी तरह निजी स्थान नहीं माना जाता। वैध टिकट के आधार पर यात्री सीट या कूपे का उपयोग कर सकते हैं, हालांकि रेलवे कर्मचारी, टीटीई, आरपीएफ या अन्य अधिकृत अधिकारी आवश्यकता पड़ने पर कूपे खुलवाने का अधिकार रखते हैं। यानी कूपे होटल के कमरे जैसी निजी संपत्ति नहीं है।
हनीमून मनाने पर क्या कहते हैं नियम
रेलवे नियमों में 'हनीमून' शब्द का अलग से कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन यदि किसी गतिविधि से अन्य यात्रियों को असुविधा होती है, सुरक्षा प्रभावित होती है या सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन होता है, तो शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए कूपे में मिली प्राइवेसी का अर्थ यह नहीं है कि वहां सार्वजनिक स्थानों पर लागू कानून लागू नहीं होंगे।
किस मामले के बाद उठे सवाल
वायरल वीडियो में ट्रेन संख्या 11002 बल्हारशाह–मुंबई नांदेड़ग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कूपे को नवविवाहित जोड़े के लिए सजाए जाने का दावा किया गया। रेलवे के अनुसार एक बाहरी डेकोरेटर को ऑनलाइन बुलाकर कूपे सजाया गया था। इसे सुरक्षा और रेलवे नियमों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित चीफ टिकटिंग इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है और पूरे मामले की जांच जारी है।
कब हो सकती है कानूनी कार्रवाई
यदि ट्रेन के भीतर कोई हरकत सार्वजनिक अश्लीलता की श्रेणी में आती है या अन्य यात्रियों की शिकायत मिलती है, तो रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 145 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 के तहत भी मामला दर्ज किया जा सकता है। कार्रवाई का निर्णय हर मामले के तथ्य, उपलब्ध साक्ष्य और जांच के आधार पर तय होता है।
नियम तोड़ने पर क्या हो सकती है सजा
रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत अशोभनीय व्यवहार, अश्लील हरकत या यात्रियों को असुविधा पहुंचाने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को ट्रेन से उतारा जा सकता है। इसके अलावा छह महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। वहीं BNS की धारा 296 के तहत सार्वजनिक अश्लीलता के मामलों में तीन महीने तक की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है। अंतिम फैसला अदालत परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर करती है।
प्राइवेसी और सार्वजनिक शालीनता की सीमा क्या है
भारतीय कानून दो वयस्कों को आपसी सहमति से संबंध बनाने का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार निजी स्थान तक सीमित माना जाता है। ट्रेन का कूपे पूरी तरह निजी जगह नहीं है, इसलिए वहां की कोई भी गतिविधि यदि दूसरे यात्रियों को दिखाई देती है, सुनाई देती है या उससे किसी को आपत्ति होती है, तो मामला सार्वजनिक शालीनता के दायरे में आ सकता है। ऐसे मामलों में BNS की धारा 296 सहित अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। कानून में अश्लीलता की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है, इसलिए हर मामले का फैसला उसकी परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायत के आधार पर किया जाता है।