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बार-बार सर्दी-जुकाम? हो सकता है हे फीवर

बार-बार हो रहा है सर्दी-जुकाम? कहीं ये हे फीवर तो नहीं, जानिए इसके लक्षण और बचाव

अगर मौसम बदलते ही छींक, नाक बहना और आंखों में खुजली शुरू हो जाती है, तो इसे सामान्य वायरल फीवर न समझें। जानिए हे फीवर के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके।


बार-बार हो रहा है सर्दी-जुकाम कहीं ये हे फीवर तो नहीं जानिए इसके लक्षण और बचाव

अगर मौसम बदलते ही आपको छींकें आने लगती हैं, नाक बहने लगती है या आंखों में खुजली शुरू हो जाती है, तो इसे सिर्फ सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कई बार लोग जिसे वायरल फीवर मान लेते हैं, वह असल में Hay Fever भी हो सकता है।

डॉक्टरों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में बदलते मौसम, बढ़ते प्रदूषण और धूल-एलर्जी की वजह से हे फीवर के मामले तेजी से बढ़े हैं। खासकर जिन लोगों को पहले से एलर्जी या अस्थमा की समस्या है, उनमें इसका खतरा ज्यादा रहता है।

आखिर हे फीवर होता क्या है?

हे फीवर को मेडिकल भाषा में एलर्जिक राइनाइटिस कहा जाता है। यह किसी वायरस की वजह से नहीं बल्कि एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के कारण होता है। दरअसल, जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली धूल, परागकण, फफूंदी या जानवरों के बाल जैसी सामान्य चीजों को नुकसानदायक मानकर प्रतिक्रिया देने लगती है, तब हे फीवर की सम स्या शुरू होती है। यही वजह है कि इसके लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे दिखते हैं, लेकिन असल कारण अलग होता है।

कैसे पहचानें कि आपको हे फीवर है?

हे फीवर में बार-बार छींक आना सबसे सामान्य लक्षण माना जाता है। इसके अलावा नाक बहना, नाक बंद होना, आंखों में पानी आना और खुजली जैसी दिक्कतें भी होती हैं।कई लोगों को गले में खराश, सिरदर्द और कानों में दबाव महसूस होने की शिकायत भी रहती है। कुछ मामलों में आंखों के नीचे सूजन और लगातार थकान भी देखी जाती है। हालांकि  सबसे अहम बात यह है कि हे फीवर में आमतौर पर बुखार नहीं आता। यही इसे वायरल संक्रमण से अलग बनाता है।

वायरल फीवर और हे फीवर में क्या अंतर है?

यही सवाल सबसे ज्यादा लोगों को उलझन में डालता है। डॉक्टर बताते हैं कि सामान्य सर्दी-जुकाम या वायरल फीवर वायरस के कारण होता है और आमतौर पर 3 से 7 दिनों में ठीक हो जाता है। वहीं Hay Fever तब तक बना रह सकता है, जब तक व्यक्ति एलर्जी पैदा करने वाली चीजों के संपर्क में रहता है। अब समझिए आसान भाषा में फर्क

  • वायरल फीवर में शरीर दर्द और हल्का बुखार आम होता है।
  • हे फीवर में लगातार छींक, खुजली और पानी जैसी समस्या ज्यादा दिखती है।
  • वायरल संक्रमण कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन हे फीवर बार-बार लौट सकता है।

अस्थमा मरीजों के लिए क्यों खतरनाक हो सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों को Asthma की समस्या है, उनमें हे फीवर सांस फूलने और खांसी की परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे में अगर एलर्जी के साथ सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न या लगातार खांसी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। फिलहाल डॉक्टर यही सलाह देते हैं कि एलर्जी पैदा करने वाली चीजों से दूरी बनाना ही सबसे प्रभावी बचाव है।

हे फीवर से बचने के लिए क्या करें?

अगर आपको धूल या परागकण से एलर्जी है, तो मौसम बदलने के दौरान सावधानी बेहद जरूरी है।

  • बाहर से आने के बाद हाथ और चेहरा अच्छी तरह धोएं।
  • घर में धूल जमा न होने दें।
  • तेज परागकण वाले मौसम में खिड़कियां बंद रखें।
  • जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से एंटी-एलर्जिक दवाएं लें।

हालांकि, बार-बार छींक या नाक बहने जैसी समस्या को हल्के में लेना सही नहीं है। क्योंकि कई बार यह शरीर की एलर्जी से जुड़ी बड़ी चेतावनी भी हो सकती है।

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