EPF New Rules 2026: 12% Contribution Not Mandatory

EPF के नियम बदले! अब बेसिक सैलरी का 12% जमा करना अनिवार्य नहीं, इन-हैंड सैलरी बढ़ने का रास्ता खुला

EPF के नए नियम लागू। अब बेसिक सैलरी का 12% जमा करना अनिवार्य नहीं रहेगा। जानिए नए नियम से कर्मचारियों, कंपनियों, इन-हैंड सैलरी और रिटायरमेंट बचत पर क्या असर पड़ेगा।

By : स्वदेश डेस्क
EPF के नियम बदले! अब बेसिक सैलरी का 12% जमा करना अनिवार्य नहीं, इन-हैंड सैलरी बढ़ने का रास्ता खुला

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने नई कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026 अधिसूचित कर दी है, जिसने वर्ष 1952 की पुरानी ईपीएफ योजना की जगह ले ली है। नए नियमों के तहत अब कर्मचारियों और कंपनियों के लिए बेसिक सैलरी का पूरा 12 प्रतिशत EPF में जमा करना अनिवार्य नहीं रहेगा। कानूनी रूप से अब केवल 15 हजार रुपए की वैधानिक वेतन सीमा का 12 प्रतिशत यानी अधिकतम 1,800 रुपए का अंशदान अनिवार्य होगा।

क्या बदला नए नियम में?

पहले अधिकांश कंपनियां कर्मचारियों की बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत EPF में जमा करती थीं और उतना ही योगदान कंपनी भी देती थी। अब कंपनियों के लिए 1,800 रुपए से अधिक EPF योगदान देना कानूनी रूप से जरूरी नहीं होगा। यदि कर्मचारी अधिक राशि जमा करना चाहता है, तो यह कंपनी और कर्मचारी की आपसी सहमति तथा कंपनी की नीति पर निर्भर करेगा।

इन-हैंड सैलरी बढ़ सकती है, लेकिन बचत घटेगी

नए नियम के बाद कई कर्मचारियों की मासिक इन-हैंड सैलरी बढ़ सकती है, क्योंकि EPF में कम कटौती होने पर शेष राशि वेतन में मिल सकती है। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह है कि EPF में जमा होने वाली राशि कम होने से रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फंड भी पहले की तुलना में कम हो सकता है। ऐसे कर्मचारियों को लंबे समय की वित्तीय योजना बनाकर फैसला लेने की सलाह दी जा रही है।

कंपनियों को भी मिलेगी अधिक लचीलापन

नई व्यवस्था से कंपनियों को भी राहत मिलेगी। अब वे उच्च वेतन वाले कर्मचारियों के लिए कानूनी रूप से केवल 1,800 रुपए तक का EPF योगदान देने के लिए बाध्य होंगी। हालांकि कई कंपनियां कर्मचारियों को आकर्षित करने या अपनी HR नीति के तहत पहले की तरह अधिक योगदान जारी रख सकती हैं।

20 दिन में निपटाने होंगे EPF क्लेम

नई योजना में EPF निकासी, पेंशन और बीमा से जुड़े दावों के निपटारे के लिए 20 दिन की समय-सीमा तय की गई है। यदि बिना उचित कारण के देरी होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और 12 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज भी देना पड़ सकता है, जिसकी राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से वसूली जाएगी।

कर्मचारियों के लिए क्या है सलाह?

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अधिक इन-हैंड सैलरी के लिए EPF अंशदान कम करने का फैसला लेने से पहले रिटायरमेंट की जरूरतों पर भी विचार करना चाहिए। EPF पर मिलने वाला ब्याज लंबे समय में बेहतर रिटर्न देता है, इसलिए जिन कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति अनुमति देती है, वे स्वैच्छिक रूप से पहले जितना या उससे अधिक योगदान जारी रख सकते हैं।

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