पूर्व IAS अधिकारी वेदप्रकाश शर्मा ने स्वदेश से खास बातचीत में प्रशासन, संघ संस्कार, कोरोना सेवा और सख्त फैसलों पर खुलकर अपनी बात रखी। पूर्व आईएएस अधिकारी वेदप्रकाश शर्मा से खास बातचीत
हितेंद्र शर्मा
भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी वेदप्रकाश शर्मा बुधवार को स्वदेश कार्यालय पहुंचे। यहां विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि “संस्कार, सेवा और दृढ़ निर्णय ही प्रशासन की असली ताकत है।” उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
पहली बार आपने संघ को कब देखा?
मैं पाँचवीं कक्षा में पढ़ता था। झारखंड में हमारे पिताजी नौकरी करते थे। वहाँ के कुछ बच्चे शाखा जाते थे, तो मैं भी उनके साथ चला गया। शुरू में खेल खेलने का आकर्षण था। वहीं पहली बार ध्वज को प्रणाम करते देखा। धीरे-धीरे कुछ बातें समझ में आने लगीं, हालांकि उस उम्र में बहुत गहराई से समझ नहीं आती। लेकिन वहीं से एक लगाव शुरू हो गया।
उस समय की कोई खास घटना जो आपको याद हो?
हाँ, एक घटना मुझे आज भी याद है। मैं संघ के स्वयंसेवकों के साथ वनसंचार कार्यक्रम के लिए झुमरी तलैया बांध गया था। वहाँ मुझे पहली बार पत्तल में हलवा खाने को मिला, बहुत आनंद आया।उसी दौरान एक बच्चा नदी में फिसलकर गिर गया। तुरंत तीन बच्चे उसे बचाने के लिए कूद पड़े। वे खुद भी संघर्ष कर रहे थे, लेकिन मिलकर उसे बाहर निकाल लिया। वह दृश्य बिल्कुल फिल्म जैसा था। बिना किसी निर्देश के स्वाभाविक रूप से मदद के लिए कूद जाना। उस घटना ने मेरे मन पर गहरा प्रभाव डाला। निस्वार्थ भाव से दूसरों के लिए सोचने और काम करने की सीख वहीं से मिली।
आपका जुड़ाव कैसे बना रहा?
इसके बाद पढ़ाई-लिखाई में लग गया। ट्रांसफर होते रहे, लेकिन जहाँ भी गया, संपर्क बना रहा। छत्तीसगढ़, ग्वालियर और जबलपुर हर जगह संघ के लोगों से जुड़ाव रहा।प्रशासनिक सेवा में आने के बाद आपने देखा होगा कि संघ को लेकर लोगों की सोच अलग-अलग थी। आपको कैसा लगता था? हाँ, उस समय कुछ लोगों की सोच नकारात्मक थी। यह काफी हद तक राजनीतिक दृष्टिकोण के कारण था। कुछ विचारों को रोकने के लिए ऐसी धारणाएँ बनाई जाती हैं। लेकिन मेरा अनुभव अलग था।
बचपन में मिले संस्कारों का प्रशासनिक सेवा पर क्या प्रभाव पड़ा?
बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा। असल चरित्र कठिन परिस्थितियों में सामने आता है। हमेशा यह ध्यान रहता था कि जो काम कर रहा हूँ, वह समाज का काम है। इसलिए निर्णय लेते समय डर नहीं लगता था। लोक कल्याण के लिए यदि कोई कठोर निर्णय लेना हो, तो उसे पूरी दृढ़ता से लेना चाहिए।
कोई ऐसा उदाहरण जो आप साझा करना चाहें?
ग्वालियर में हमने सड़क चौड़ीकरण का बड़ा काम किया। ऐसे कामों में विरोध होता है, लेकिन हमने पारदर्शिता के साथ काम किया। हमारे खिलाफ एक भी केस हाई कोर्ट में नहीं गया। लोगों का विश्वास बना रहा।कोरोना काल का आपका अनुभव कैसा रहा? कोरोना काल बहुत चुनौतीपूर्ण समय था। जब पूरी दुनिया घर में थी, तब हमें लोगों तक पहुँचना था। भोजन पहुँचाना, मदद करना और रात में भी निकलना पड़ता था। उस समय स्वयंसेवक समाज के लिए हमेशा तैयार खड़े थे। उन्हें इसी का प्रशिक्षण दिया जाता है।
आपने नकली घी और दूध के खिलाफ भी कार्रवाई की थी?
हाँ, ग्वालियर में नकली घी और दूध के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई। कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्ती से काम किया गया। कई लोग वह व्यवसाय छोड़कर चले गए।