अनुराग तागड़े
इंग्लैंड के एजबेस्टन मैदान में 14 जून 2026 को जब भारत और पाकिस्तान की महिला टीमें आमने-सामने उतरीं, तब यह केवल एक क्रिकेट मैच नहीं था। यह उस परिवर्तन का प्रतीक था जो पिछले एक दशक में महिला क्रिकेट ने विश्व खेल जगत में स्थापित किया है। स्टेडियम में मौजूद 18,814 दर्शकों ने महिला टी-20 विश्व कप के इतिहास का सबसे बड़ा ग्रुप चरण दर्शक रिकॉर्ड बना दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड भी भारत-पाकिस्तान मुकाबले के नाम था, जब 2024 में दुबई में 15,935 दर्शक मैच देखने पहुंचे थे। लगातार दो विश्व कप में इस मुकाबले द्वारा रिकॉर्ड तोड़ना यह बताता है कि महिला क्रिकेट अब विश्व खेल उद्योग की सबसे तेजी से बढ़ती संपत्तियों में शामिल हो चुका है।
यह रिकॉर्ड ऐसे समय में बना है जब 2026 महिला टी-20 विश्व कप अपने इतिहास का सबसे बड़ा संस्करण बन चुका है। पहली बार 12 टीमें प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं और 33 मुकाबले सात प्रतिष्ठित मैदानों पर खेले जा रहे हैं। लॉर्ड्स, एजबेस्टन, ओल्ड ट्रैफर्ड, द ओवल और हेडिंग्ले जैसे ऐतिहासिक मैदान महिला क्रिकेट के उत्सव के केंद्र बने हुए हैं। 5 जुलाई को लॉर्ड्स में होने वाला फाइनल इस बढ़ती लोकप्रियता का चरम होगा।
दिलचस्प तथ्य यह है कि एजबेस्टन में भारत-पाकिस्तान मुकाबले के टिकट मैच से पहले ही पूरी तरह बिक चुके थे। आयोजकों को अतिरिक्त मांग का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड के लिए यह संकेत है कि महिला क्रिकेट अब केवल पारिवारिक दर्शकों का खेल नहीं, बल्कि व्यावसायिक दृष्टि से भी एक बड़ा आकर्षण बन चुका है।
महिला क्रिकेट की इस उड़ान को समझने के लिए पिछले छह वर्षों के सफर पर नजर डालना आवश्यक है। वर्ष 2020 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए महिला टी-20 विश्व कप फाइनल को 86,174 दर्शकों ने देखा था, जिसने दुनिया को पहली बार यह एहसास कराया कि महिला क्रिकेट भी विशाल जनसमर्थन जुटाने की क्षमता रखता है। आज एजबेस्टन, लॉर्ड्स और दुनिया के अन्य मैदान उसी बदलाव की अगली कड़ी बन चुके हैं।
महिला क्रिकेट की इस क्रांति के पीछे सबसे बड़ी भूमिका पेशेवर लीगों की रही है। भारत की महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल), ऑस्ट्रेलिया की महिला बिग बैश लीग और इंग्लैंड की द हंड्रेड ने खेल की पूरी अर्थव्यवस्था बदल दी है। जिन खिलाड़ियों को कभी सीमित अवसर मिलते थे, वे आज करोड़ों रुपये के अनुबंध प्राप्त कर रही हैं। फ्रेंचाइजी क्रिकेट ने खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और वैश्विक पहचान प्रदान की है। यही कारण है कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों के प्रदर्शन में भी निरंतर सुधार दिखाई दे रहा है।
भारतीय महिला क्रिकेट की प्रगति का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि आज भारत विश्व क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में गिना जाता है। एजबेस्टन में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की 64 रन की जीत केवल स्कोरबोर्ड की कहानी नहीं थी, बल्कि उस मजबूत संरचना का परिणाम थी जो पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट ने विकसित की है। स्मृति मंधाना की 68 रन की शानदार पारी और दीप्ति शर्मा का 5 विकेट का प्रदर्शन इस बढ़ती गहराई को दर्शाता है। दीप्ति शर्मा इस प्रदर्शन के साथ महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की सर्वाधिक विकेट लेने वाली गेंदबाजों में शामिल हो गईं।
महिला क्रिकेट का विस्तार अब केवल भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड तक सीमित नहीं है। नीदरलैंड जैसी टीम पहली बार विश्व कप में पहुंची है। नेपाल, थाईलैंड, ब्राजील, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों में भी महिला क्रिकेट तेजी से बढ़ रहा है। 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी इस विकास को और अधिक गति देने वाली है। ओलंपिक खेल बनने से महिला क्रिकेट में सरकारी निवेश, कॉर्पोरेट प्रायोजन और जमीनी ढांचे का विस्तार अभूतपूर्व स्तर पर होने की संभावना है।
भारत में महिला क्रिकेट की वास्तविक शक्ति अब राज्यों में दिखाई देने लगी है। मध्यप्रदेश इसका सबसे सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। कुछ वर्ष पहले तक महिला क्रिकेट को सीमित अवसर मिलते थे, लेकिन आज मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग (एमपीएल) जैसी प्रतियोगितियां नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर रही हैं। पिछले वर्ष जहां महिला वर्ग में केवल तीन टीमें थीं, वहीं इस वर्ष टीमों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इसका सीधा अर्थ है कि अधिक खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक क्रिकेट, बेहतर कोचिंग, लाइव प्रसारण और चयनकर्ताओं की निगाह में आने का अवसर मिल रहा है।
मध्यप्रदेश की कई महिला क्रिकेटर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। एमपीएल जैसे मंचों ने खिलाड़ियों को केवल मैच नहीं दिए, बल्कि आत्मविश्वास और पेशेवर माहौल भी प्रदान किया है। आज इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और छोटे शहरों की बेटियां भी यह विश्वास लेकर मैदान में उतर रही हैं कि वे भारत का प्रतिनिधित्व कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले पांच से दस वर्षों में महिला क्रिकेट के प्रसारण अधिकारों, प्रायोजन राशि और दर्शक संख्या में कई गुना वृद्धि होगी। जिस प्रकार आईपीएल ने पुरुष क्रिकेट की अर्थव्यवस्था को बदल दिया, उसी प्रकार डब्ल्यूपीएल और राज्य स्तरीय लीगें महिला क्रिकेट के लिए वही भूमिका निभाने जा रही हैं। अधिक कंपनियां प्रायोजन में रुचि दिखा रही हैं, मीडिया कवरेज बढ़ रही है और दर्शकों का आधार लगातार विस्तृत हो रहा है।
एजबेस्टन के 18,814 दर्शक केवल एक रिकॉर्ड संख्या नहीं हैं। वे उस नए युग की घोषणा हैं जिसमें महिला क्रिकेट अब किसी तुलना का विषय नहीं, बल्कि स्वयं एक सशक्त और स्वतंत्र खेल उद्योग बन चुका है। लॉर्ड्स से लेकर इंदौर तक, डब्ल्यूपीएल से लेकर एमपीएल तक और अंतरराष्ट्रीय मंच से लेकर गांव-कस्बों तक महिला क्रिकेट एक नई सामाजिक और खेल क्रांति का नेतृत्व कर रहा है।
यदि वर्तमान गति बनी रही तो आने वाला दशक निस्संदेह महिला क्रिकेट का दशक होगा, और भारत विशेष रूप से मध्यप्रदेश जैसे उभरते क्रिकेट केंद्र इस स्वर्णिम परिवर्तन के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल होंगे।