माननीय प्रधानमंत्री जी का विज़न केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के उत्थान का संकल्प है। वे अक्सर हमें याद दिलाते हैं कि यदि हमें भविष्य की चुनौतियों का सामना करना है, तो हमें आज से ही अपनी जड़ों को मजबूत करना होगा। प्रसिद्ध शायर इकबाल की ये पंक्तियाँ इस विज़न को सटीक रूप में परिभाषित करती हैं:
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।
स्वतंत्रता और स्वावलंबन का मार्ग प्रधानमंत्री जी का संदेश स्पष्ट है: हमें अपने संसाधनों को बचाकर उसे सुरक्षित और संरक्षित करना होगा। उनका हर आह्वान—चाहे वह 'आत्मनिर्भर भारत' हो, 'स्वदेशी अपनाओ' हो, 'स्टार्टअप इंडिया' हो, 'ग्रीन इंडिया', 'मेक इन इंडिया', 'स्किल इंडिया' या 'डिजिटल इंडिया'—एक ही उद्देश्य की ओर इशारा करता है: हम इतने मजबूत बनें कि हमें किसी बाहरी मदद की आवश्यकता न पड़े।
यह कोई महज राजनीतिक भाषण नहीं है, बल्कि देश को हर वैश्विक संकट से निपटने के लिए तैयार करने की एक अग्रिम रणनीति है। समय रहते भविष्य की चुनौतियों को भांपना और उसके लिए देश को आज से ही तैयार करना, यह एक सच्चे नेतृत्व की पहचान है।
हमारा कर्तव्य: जिम्मेदारी और सजगता बहुत से लोग शायद इस दृष्टिकोण को समझने में कोताही बरतें या आलोचकों की तरह देखें। लेकिन, सच को कहना और उसे स्वीकार करना जरूरी है। भारत को 'सोने की चिड़िया' बनाने का सपना कोई रातों-रात पूरा नहीं होगा। इसके लिए:
सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग : हमें नवयुग के पथ पर आगे बढ़ने के लिए अपने संसाधनों के प्रति सजग रहना होगा।
आत्मविश्वास : जब देश का हर नागरिक अपने स्तर पर 'स्वदेशी' को अपनाएगा, तभी असली बदलाव आएगा।
सजग नागरिक: हमें केवल आलोचनाओं में न उलझकर, निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा बनना होगा।
देश का प्रधानमंत्री जब देश को विश्वशक्ति बनाने का सपना देखता है, तो एक नागरिक के रूप में हमारी जवाबदेही कहीं अधिक बढ़ जाती है। आइए, हम सब मिलकर इस विज़न को समझें और भारत को एक स्वावलंबी और सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ाएं।
सरल रहें, पर सजग रहें। क्योंकि देश का निर्माण हम सबके छोटे-छोटे प्रयासों से ही होगा।
जय हिंद, जय भारत! वंदे मातरम्

लेखिका सुमिता सिरौठिया वरिष्ठ पत्रकार और दूरदर्शन केंद्र भोपाल से संबद्ध है