AI निवेश की दौड़ में Microsoft, Meta और Amazon जैसी कंपनियां लागत घटाने में जुटी हैं। 2026 में 92 हजार से ज्यादा नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती होड़ अब टेक इंडस्ट्री में बड़े बदलाव ला रही है। माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, अमेजन और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियां AI पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं, इस भारी निवेश का असर अब कर्मचारियों पर दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 में दुनिया भर में करीब 92 हजार टेक कर्मचारियों की नौकरियां जा सकती हैं।
लेऑफ ट्रैक करने वाली वेबसाइट Layoffs.fyi के अनुसार इस साल अब तक 98 कंपनियां कर्मचारियों की संख्या घटाने की योजना जता चुकी हैं. कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर और नए मॉडल्स पर खर्च बढ़ा रही हैं, इसलिए दूसरी जगह लागत कम करने के लिए छंटनी का रास्ता अपनाया जा रहा है।
AI निवेश बढ़ने से कंपनियों पर बढ़ा दबाव
टेक कंपनियों के बीच AI में आगे निकलने की होड़ तेज हो गई है। मेटा ने AI को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बना दिया है। वहीं अमेजन, गूगल, टेस्ला और स्पेसएक्स भी AI प्रोजेक्ट्स में बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं माइक्रोसॉफ्ट ने संकेत दिए हैं कि वह AI योजनाओं के लिए लागत कटौती जारी रखेगी। इसी के तहत कंपनी अमेरिका में अपने करीब 7 फीसदी कर्मचारियों, खासकर वरिष्ठ अधिकारियों को जल्द रिटायरमेंट ऑफर दे रही है।
मेटा, अमेजन और गूगल भी कर रहे बड़े निवेश
मेटा ने अपने लगभग 10 फीसदी कर्मचारियों यानी करीब 8 हजार लोगों की छंटनी की घोषणा की है। दूसरी ओर अमेजन AI कंपनी एंथ्रोपिक में भारी निवेश कर रही है।
- अमेजन एंथ्रोपिक में 2.35 लाख करोड़ रुपए निवेश करेगी
- गूगल लगभग 3.76 लाख करोड़ रुपए AI पर खर्च करेगी
- टेस्ला के इस साल AI पर .35 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की संभावना है
एलन मस्क की स्पेसएक्स ने भी AI स्टार्टअप कर्सर के साथ करार किया है।
ओपनAI ने बदली अपनी बड़ी योजना
रिपोर्ट के अनुसार ओपनAI ने अपने बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट की योजना में बदलाव किया है। कंपनी अब खुद डेटा सेंटर बनाने की बजाय क्लाउड कंपनियों से सर्वर किराए पर लेने पर फोकस कर रही है.हालांकि इसके बावजूद कंपनी को भारी खर्च उठाना पड़ सकता है। अनुमान है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 56 लाख करोड़ रुपए तक खर्च हो सकते हैं।
AI टूल्स की सफलता भी बन रही चुनौती
ओपनAI और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों ने AI एजेंट टूल्स लॉन्च किए हैं, जो यूजर की ओर से कई काम खुद कर सकते हैं। इन टूल्स से नए सब्सक्राइबर तो बढ़ रहे हैं, लेकिन इन्हें चलाने में बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग पॉवर लग रही है विशेषज्ञों का मानना है कि AI इंडस्ट्री अब सिर्फ तकनीकी प्रतिस्पर्धा नहीं रह गई है। यह पूंजी, प्रतिभा और टिकाऊ बिजनेस मॉडल की लड़ाई बनती जा रही है।
चीन की कंपनियों से भी बढ़ी चुनौती
चीनी AI कंपनी डीपसीक ने नया ओपन-सोर्स मॉडल लाने की घोषणा की है। वहीं एंथ्रोपिक ने क्लॉड मायथोस मॉडल पेश कर प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है। इसके जवाब में ओपनAI ने GPT-5.5 लॉन्च किया है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी AI कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार बढ़ती लागत और मुनाफे के बीच संतुलन बनाए रखना है।