जिस लॉर्ड्स में कभी भारतीय महिला कप्तान को पवेलियन में प्रवेश नहीं मिला था, उसी मैदान पर क्रांति गौड़ ने पांच विकेट लेकर ऑनर्स बोर्ड में जगह बनाई और इतिहास रच दिया।
कभी लॉर्ड्स का मैदान भारतीय महिला क्रिकेट के लिए असमानता और उपेक्षा की याद समेटे हुए था। 1986 में तत्कालीन भारतीय कप्तान डायना एडुल्जी को इस ऐतिहासिक मैदान के पवेलियन में प्रवेश तक की अनुमति नहीं मिली थी। चार दशक बाद उसी लॉर्ड्स ने भारतीय महिला क्रिकेट की नई पहचान का गवाह बनकर इतिहास को नई दिशा दी। इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट में भारत की 270 रन की ऐतिहासिक जीत के केंद्र में रहीं मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़। उनके शानदार प्रदर्शन ने न सिर्फ भारत को मजबूत बढ़त दिलाई, बल्कि उन्हें लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड तक भी पहुंचा दिया।
40 साल बाद लॉर्ड्स ने देखा बदला हुआ दौर
1986 की घटना महिला क्रिकेट में बराबरी की लड़ाई का प्रतीक मानी जाती है। उस समय भारतीय कप्तान डायना एडुल्जी को लॉर्ड्स के पवेलियन में प्रवेश नहीं दिया गया था। अब उसी मैदान पर हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को 270 रन से हराकर पुरानी यादों को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया।
बॉलर क्रांति गौड़ ने रचा अनोखा रिकॉर्ड
22 वर्षीय क्रांति गौड़ ने पहली पारी में 17 ओवर में सिर्फ 37 रन देकर पांच विकेट झटके। इसके साथ वह लॉर्ड्स में टेस्ट की एक पारी में पांच विकेट लेने वाली दुनिया की पहली महिला गेंदबाज बन गईं। उनके इस प्रदर्शन के बाद उनका नाम लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज हुआ और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
इंग्लैंड की बल्लेबाजी पर पूरी तरह हावी रहीं क्रांति
नई गेंद से क्रांति गौड़ ने लगातार सटीक लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी की। माया बाउचर, टैमी ब्यूमॉन्ट, नैट साइवर-ब्रंट, एलिस कैपसी और लॉरेन बेल जैसे बल्लेबाज उनके सामने टिक नहीं सके। उनकी घातक गेंदबाजी की बदौलत इंग्लैंड पहली पारी में सिर्फ 170 रन पर सिमट गया और भारत ने 115 रन की निर्णायक बढ़त हासिल की।
झूलन गोस्वामी का रिकॉर्ड भी हुआ पीछे
लॉर्ड्स में पांच विकेट लेने के साथ क्रांति गौड़ भारतीय महिला टेस्ट क्रिकेट में एक पारी में पांच विकेट लेने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय तेज गेंदबाज बन गईं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने झूलन गोस्वामी का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। यह प्रदर्शन भारतीय महिला क्रिकेट को एक नई तेज गेंदबाजी स्टार मिलने का संकेत भी माना जा रहा है।
बुंदेलखंड से निकली कहानी बनी पूरे देश की प्रेरणा
छोटे शहर से निकलकर क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान पर इतिहास रचने वाली क्रांति गौड़ अब युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके कोच राजीव विल्थरे के अनुसार, यह उपलब्धि सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड के लिए गर्व का क्षण है। लॉर्ड्स में लिखा गया यह अध्याय आने वाले वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे प्रेरक कहानियों में गिना जाएगा।