आईपीएल 2026 का फाइनल बेंगलुरु से क्यों हटाया गया? बीसीसीआई ने ऑपरेशनल वजहें बताईं, साथ ही पहली बार 3 शहरों में प्लेऑफ कराने का फैसला क्यों लिया, जानें पूरी खबर।
आईपीएल 2026 को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। बीसीसीआई ने 6 मई को प्लेऑफ शेड्यूल जारी करते हुए साफ कर दिया कि इस बार फाइनल मुकाबला बेंगलुरु में नहीं होगा। यह फैसला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु डिफेंडिंग चैंपियन है और परंपरा के मुताबिक फाइनल उनके होम ग्राउंड पर होना था।
सिर्फ यही नहीं, इस बार प्लेऑफ मुकाबले भी दो की बजाय तीन शहरों जिसमें धर्मशाला, चंडीगढ़ और अहमदाबाद में आयोजित किए जाएंगे। बीसीसीआई ने इसे 'स्पेशल केस' बताया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि परंपरा तोड़नी पड़ी?
बेंगलुरु से क्यों छीना गया फाइनल?
बीसीसीआई के अनुसार, शुरुआत में फाइनल की मेजबानी बेंगलुरु को ही दी गई थी। लेकिन स्थानीय क्रिकेट संघ और अधिकारियों की कुछ मांगें बोर्ड के तय प्रोटोकॉल से बाहर थीं। इसी वजह से बीसीसीआई ने अंतिम समय में फैसला बदलते हुए फाइनल को अहमदाबाद शिफ्ट कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर टिकट को लेकर मांगें उठीं। बताया जा रहा है कि कुछ जनप्रतिनिधि हर मैच के लिए टिकट कोटा चाहते थे। यही मुद्दा विवाद की वजह बना और अंततः बेंगलुरु से मेजबानी वापस ले ली गई।
3 शहरों में क्यों होंगे प्लेऑफ मुकाबले?
आमतौर पर आईपीएल प्लेऑफ सिर्फ दो शहरों में होते हैं। लेकिन इस बार बीसीसीआई ने तीन शहरों को चुना है—धर्मशाला, चंडीगढ़ और अहमदाबाद। बोर्ड ने अपनी आधिकारिक रिलीज में कहा कि यह फैसला 'ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक कारणों' की वजह से लिया गया है। इसका मतलब है कि टीमों की यात्रा, सुरक्षा, स्टेडियम उपलब्धता और आयोजन प्रबंधन जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है।
क्या है नया प्लेऑफ फॉर्मेट और वेन्यू प्लान?
इस बार चारों प्लेऑफ मैच अलग-अलग शहरों में बांटे गए हैं। इसमें पहला क्वालीफायर 1, एलिमिनेटर, क्वालीफायर 2 और फाइनल शामिल है। जहां पहले दो मैच एक शहर में और बाकी दो दूसरे शहर में होते थे, वहीं इस बार मैचों को तीन अलग-अलग वेन्यू में शिफ्ट किया गया है। यह बदलाव आईपीएल के इतिहास में काफी अलग और खास माना जा रहा है।
आम दर्शकों पर क्या होगा असर?
इस फैसले का सीधा असर फैंस पर पड़ेगा। बेंगलुरु के दर्शक फाइनल होस्ट करने का मौका खो बैठे। अलग-अलग शहरों में मैच होने से यात्रा खर्च बढ़ सकता है। लेकिन दूसरी ओर, ज्यादा शहरों में मैच होने से अधिक फैंस को लाइव देखने का मौका मिलेगा। बीसीसीआई का यह फैसला दिखाता है कि आयोजन से जुड़े नियमों और प्रोटोकॉल पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा, भले ही इसके लिए परंपरा ही क्यों न बदलनी पड़े।