टी20 विश्व कप जीतने के कुछ ही महीनों बाद टीम इंडिया लगातार दूसरी टी20 सीरीज हार गई। जानिए इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर किन रणनीतिक गलतियों ने विश्व विजेता टीम को मुश्किल में डाल दिया।
टी20 विश्व कप जीतने के बाद जिस टीम इंडिया से लंबे समय तक दबदबा बनाए रखने की उम्मीद थी, वही अब लगातार दूसरी टी20 सीरीज हार चुकी है। पहले आयरलैंड और अब इंग्लैंड ने भारत को मात देकर टीम प्रबंधन, रणनीति और खिलाड़ियों की तैयारी पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
ब्रिस्टल में सीरीज हार के साथ भारत ने छह टी20 मुकाबलों में पांचवीं हार झेली। यह सिर्फ नतीजों की कहानी नहीं है। बल्लेबाजी से लेकर टीम चयन और विदेशी परिस्थितियों में खुद को ढालने तक कई ऐसी कमियां सामने आईं जिन्होंने विश्व विजेता टीम की लय बिगाड़ दी।
विदेशी परिस्थितियों का सही जवाब नहीं मिला
आयरलैंड और इंग्लैंड दोनों दौरों में भारतीय बल्लेबाज हालात के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी नहीं बदल सके। आयरलैंड में स्विंग और सीम मूवमेंट के बावजूद लगातार बड़े शॉट खेलने की कोशिश महंगी पड़ी। वहीं इंग्लैंड में टीम जरूरत से ज्यादा सतर्क नजर आई। आक्रामक बल्लेबाजी के लिए तैयार की गई लाइनअप अचानक रक्षात्मक अंदाज में खेलती दिखी। कप्तान श्रेयस अय्यर भी पहले स्वीकार कर चुके हैं कि आयरलैंड में टीम परिस्थितियों को सही तरह पढ़ने में सफल नहीं रही थी।
टीम चयन ने बढ़ाई मुश्किल
पूरे दौरे में बल्लेबाजी क्रम और प्लेइंग इलेवन लगातार बदलती रही। तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ी, जिन्होंने नंबर तीन पर शानदार प्रदर्शन किया है, उन्हें निचले क्रम में भेजा गया। शिवम दुबे की भूमिका भी हर मैच में अलग दिखाई दी। इसका असर बल्लेबाजी की स्थिरता पर पड़ा और कई खिलाड़ी अपनी स्वाभाविक भूमिका में नजर नहीं आए। इंग्लैंड की गेंदबाजी योजना के सामने श्रेयस अय्यर को छोड़ अधिकांश बल्लेबाज संघर्ष करते दिखे।
गेंदबाजी इकाई भी नहीं बन पाई स्थिर
भारत ने लगभग हर मुकाबले में गेंदबाजी संयोजन बदला। लगातार बदलाव के कारण गेंदबाज अपनी तय भूमिका में लय नहीं बना सके। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित ओवरों की क्रिकेट में एक स्थिर गेंदबाजी इकाई रणनीति को मजबूत बनाती है, लेकिन इस दौरे पर ऐसा नहीं दिखा। इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने इस अस्थिरता का फायदा उठाते हुए खुलकर रन बनाए।
घरेलू पिचों की तैयारी विदेश में नहीं आई काम
विश्व कप के बाद भारत ने अधिकतर टी20 मुकाबले घरेलू मैदानों पर खेले, जबकि आईपीएल में भी बल्लेबाजों के अनुकूल सपाट पिचें देखने को मिलीं। आयरलैंड और इंग्लैंड की तेज तथा सीम मूवमेंट वाली विकेटों पर पहुंचते ही टीम की तकनीकी कमजोरियां सामने आ गईं। 2028 टी20 विश्व कप दक्षिण अफ्रीका में खेला जाना है। ऐसे में विदेशी परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
विश्व कप वाली स्पष्ट रणनीति गायब दिखी
2022 टी20 विश्व कप के बाद भारत ने लंबी योजना के साथ टीम तैयार की थी, जिसका फायदा लगातार दो विश्व खिताब के रूप में मिला। इस बार विश्व कप जीतने के तुरंत बाद कप्तानी में बदलाव हुआ और नई दिशा को लेकर स्पष्टता कम दिखाई दी। आईपीएल में लगातार सफलता पाने वाले कुछ खिलाड़ियों को मौका नहीं मिला, जबकि लंबे समय बाद लौटे खिलाड़ी को कप्तानी सौंपे जाने पर भी सवाल उठे।
बाएं हाथ के बल्लेबाजों पर ज्यादा निर्भरता
पूरे दौरे में बल्लेबाजी क्रम में बाएं हाथ के खिलाड़ियों की संख्या लगातार चर्चा का विषय बनी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि लेफ्ट-राइट संयोजन की जगह एकतरफा संतुलन बनने से बल्लेबाजी क्रम प्रभावित हुआ। इसका असर कई खिलाड़ियों की बल्लेबाजी स्थिति पर भी पड़ा और टीम को अपेक्षित लचीलापन नहीं मिल सका।
वॉशिंगटन सुंदर के चयन पर बहस
इंग्लैंड की परिस्थितियों में टीम संयोजन को लेकर वॉशिंगटन सुंदर के लगातार चयन पर भी सवाल उठे। कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त विशेषज्ञ बल्लेबाज या तेज गेंदबाज टीम के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता था। आंकड़ों पर नजर डालें तो सुंदर ने अब तक 62 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 279 रन और 51 विकेट लिए हैं। हालांकि 2026 में खेले गए चार टी20 मुकाबलों में वह एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके, जिससे चयन को लेकर बहस और तेज हो गई।
रणनीति और कोचिंग पर भी उठे सवाल
लगातार दोनों सीरीज में भारत की सबसे बड़ी कमजोरी परिस्थितियों के अनुसार रणनीति नहीं बदल पाना रही। बल्लेबाज कठिन गेंदबाजी स्पेल में स्ट्राइक रोटेट करने के बजाय लगातार बड़े शॉट खेलने की कोशिश करते रहे। दूसरी ओर इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने ब्रिस्टल में छोटी बाउंड्री और स्थानीय हालात का बेहतर इस्तेमाल किया। इसी वजह से मुख्य कोच गौतम गंभीर की रणनीति और टीम की तैयारी पर भी सवाल उठ रहे हैं। पूर्व कप्तान अनिल कुंबले और वरुण एरॉन समेत कई विशेषज्ञ भी टीम प्रबंधन की स्पष्ट योजना को लेकर चिंता जता चुके हैं।
ब्रिस्टल में हार के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है और खिलाड़ियों को समय देने की जरूरत है। हालांकि लगातार दो टी20 सीरीज गंवाने के बाद इतना साफ हो गया है कि सिर्फ प्रतिभा के भरोसे विदेशी दौरों पर सफलता नहीं मिलेगी। टीम इंडिया को रणनीति, टीम चयन और परिस्थितियों के अनुसार खेलने की तैयारी में तेजी से सुधार करना होगा, तभी आने वाली चुनौतियों का सामना करना आसान होगा।