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West Bengal Election 2026: TMC vs BJP Clash

पश्चिम बंगाल में चुनाव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC और BJP के बीच कड़ा मुकाबला। 294 सीटों पर मतदान दो चरणों में होगा। ममता बनर्जी और भाजपा के बीच सीधा टकराव।


पश्चिम बंगाल में चुनाव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार घमासान कुछ अलग ही तरह का होने वाला है। यहां मुख्य मुकाबला लगातार सत्ता में आ रही तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच है। बंगाल में 294 सीटों के लिए दो चरणों 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा और परिणाम की घोषणा 4 मई को होगी। इस चुनाव में ममता बनर्जी को रोकने भारतीय जनता पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह चुनाव की बागडोर संभालते हुए रैलियां कर रहे हैं। इनका इरादा सभी राज्यों में भाजपा की सरकारें बनाकर ताकत दिखाने का है। वैसे भी लंबे समय से भाजपा के निशाने पर ममता बनर्जी और उनकी नीतियां रही हैं। यह टकराहट बार-बार किसी न किसी कारण से सामने आती रही है। ममता बनर्जी भी इस लड़ाई में भले ही अकेली पड़ रही है लेकिन झुकने को तैयार नहीं है। जिससे मुकाबला रोचक स्थिति में है। 

खास बात यह है कि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह 15 दिनों तक राज्य में रुककर बूथ-स्तरीय प्रबंधन संभाल रहे हैं। यानी कि भाजपा किसी भी तरह की चूक नहीं होने देना चाहती। इसीलिए रणनीति की पूरी जिम्मेदारी अमित शाह के पास है। भाजपा ने ममता बनर्जी के खिलाफ आक्रामक प्रचार करते हुए 170 प्लस सीटों का लक्ष्य रखा है। भाजपा की बूथ-स्तरीय रणनीति माइक्रो-लेवल पर काम कर रही है, जिसमें बूथ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जहां तक प्रचार की बात है तो इसके लिए 40 से अधिक प्रमुख नेताओं और स्टार प्रचारकों की सूची जारी की गई है, जिसमें बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जैसे चेहरे भी शामिल हैं। अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर सीट पर जीत को 'शॉर्टकट' बताया है और वहां सुवेंदु अधिकारी को कमान सौपी है। पिछले विधानसभा चुनाव में सुर्वेदु ने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को पराजित किया था। 

चुनाव प्रचार में भाजपा भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा, बेरोजगारी और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर ममता सरकार को घेर रही है। 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा 170 से अधिक सीटों पर जीत का दावा कर रही है। बंगाल के चुनावी परिदृश्य में भाजपा का यह आक्रामक रुख 2021 की हार के बाद राज्य में सत्ता हासिल करने की उसकी दृढ़ता को दर्शाता है। वैसे भारतीय जनता पार्टी के सबसे पहले संगठन जनसंघ की स्थापना बंगाल के श्याम प्रसाद मुखर्जी ने की थी। हालांकि बंगाल में एक बार भी इनकी सरकार नहीं बन सकी है। 2016 के बाद से भाजपा ने खुद को बंगाल में मजबूत जरूर किया है। जबकि 2001 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को शून्य सीटें मिली थीं, उसका वोट शेयर भी मात्र पाच फीसदी था। 

लेकिन 2016 में पहली बार बंगाल की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन आया जब विधानसभा चुनाव में तीन सीटें जीती और उसका वोट शेयर 10 फीसदी हो गया। इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला और भाजपा सीधे मुख्य विपक्षी दल के रूप में सामने आई। इस चुनाव में उसने 77 सीटें अपने नाम की और वोट शेयर 38 प्रतिशत दर्ज किया गया। यह ऐसा चुनाव रहा जिसमें दो स्थानों से चुनाव लड़ी ममता बनर्जी को नंदीग्राम से पराजय का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर यह चुनाव ममता के राजनीतिक भविष्य को तय करेगा जबकि भाजपा के लिए एक और राज्य पर शासन करने की मंशा को पूर्ण कर सकता है।

 

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