सिया गोयल और सोनम की कहानियों ने विवाह पूर्व हत्याकांड की ओर ध्यान खींचा। प्रेम प्रसंग, सामाजिक दबाव और वैवाहिक जीवन की चुनौतियाँ सामने आईं।
राज कुमार सिंह
सिया गोयल द्वारा होने वाले पति केतन अग्रवाल की हत्या ने राजा रघुवंशी हत्याकांड की याद दिला दी। राजा रघुवंशी की मां ने तो चाल-ढाल के आधार पर सिया को 'छोटी सोनम' भी करार दे दिया है, जिसे अपने किए पर कोई पश्चाताप नहीं लगता। सोनम ने प्रेमी के साथ मिलकर पिछले साल मई में राजा की तब हत्या करवा दी थी, जब दोनों हनीमून के लिए शिलांग गए थे। राजा का सड़ा-गला शव 2 जून को ईस्ट खासी हिल्स जिले में एक गहरी खाई से बरामद हुआ था।
खुलासा हुआ कि सोनम का पहले से राज कुशवाहा नामक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था, लेकिन संभवतः परिजनों ने उस पर राजा से विवाह करने का दबाव बनाया। सोनम की कुंडली में मंगल दोष की कहानी भी सामने आई, जिसके निवारण के लिए वह राजा से विवाह करने को तैयार हो गई। उम्मीद है कि पुलिस जांच से सच सामने आएगा और दोषियों को कठोर दंड भी मिलेगा, लेकिन केतन हत्याकांड यह बता रहा है कि कम-से-कम समाज ने तो उससे कोई सबक नहीं सीखा।
सोनम ने विवाह के बाद हनीमून यात्रा के दौरान प्रेमी की खातिर और उसकी मदद से पति को मौत के घाट उतार दिया, तो सिया ने प्रेमी के साथ मिलकर होने वाले पति की विवाह से पहले ही हत्या कर दी। सच तो सिया और उसका प्रेमी चेतन ही जानते होंगे, लेकिन हत्या का जो कारण बताया जा रहा है, वह हास्यास्पद प्रतीत होता है। कहा जा रहा है कि केतन विग पहनता था और थोड़ा हकलाता था। बेशक यह दिखावे का दौर है, लेकिन केतन के पिता का कहना है कि विग पहनने की बात पहले ही बता दी गई थी। मेल-मुलाकातों में हकलाने की बात भी सामने आ ही गई होगी। फिर विवाह से इनकार करने के बजाय हत्या जैसा क्रूर और आपराधिक विकल्प क्यों चुना गया?
इस सवाल के सही जवाब की उम्मीद भी पुलिस जांच से ही की जा सकती है, जिसके लिए एसआईटी का गठन किया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने चर्चित वकील उज्ज्वल निकम को पब्लिक प्रॉसीक्यूटर भी नियुक्त कर दिया है।निस्संदेह हर अपराधी को उचित दंड मिलना चाहिए, लेकिन क्या समाज को मूकदर्शक बने रहना चाहिए? बेवफाई में जान गंवाने वाला राजा रघुवंशी पहला व्यक्ति नहीं था और केतन अग्रवाल भी आखिरी नहीं होगा।आधुनिक दौर में वैवाहिक जीवन का सबसे खूबसूरत और यादगार समय मानकर हनीमून का इंतजार हर युवा करता है, लेकिन राजा के लिए वही दुखांत बन गया। केतन के विवाह की तैयारियां भी जोरों पर थीं। इसी वर्ष नवंबर में विवाह के लिए उदयपुर में महल और परिजनों के लिए चार्टर्ड विमान बुक किया गया था। प्री-वेडिंग शूट के लिए दोनों विदेश जाने वाले थे, लेकिन आरोप है कि साजिश के तहत सिया ने पासपोर्ट गुम कर दिया। जिस लोहागढ़ किले पर 18 जून को केतन को खाई में धकेला गया, वहां भी सिया उसे तीसरी बार लेकर गई थी।
केतन की हत्या से स्वयं को स्तब्ध बता रहे सिया के परिजन यह तक कह रहे हैं कि यदि वह दोषी साबित होती है तो उसे उसी खाई में फेंक देना चाहिए। निस्संदेह देर-सवेर सिया को उसके किए की सजा मिलेगी, लेकिन सवाल फिर उसी खतरनाक प्रवृत्ति का है, जिसकी चिंता कहीं नजर नहीं आती। क्या सोनम और सिया को केवल व्यक्ति मानकर छोड़ दिया जाए, या उन्हें एक खतरनाक सामाजिक प्रवृत्ति के प्रतीक के रूप में भी देखा जाए?अपराधों के आंकड़े बताते हैं कि ऐसे मामलों में अक्सर प्रेम प्रसंग की भूमिका होती है। लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता देने वाली व्यवस्था से तो आप विवाह पूर्व या विवाहेतर संबंधों पर नसीहत की उम्मीद नहीं कर सकते, लेकिन परिवार नई पीढ़ी को सही संस्कार देने के दायित्व से कैसे मुक्त हो सकते हैं?
वर्जित संबंधों पर समाज यदि मूकदर्शक बना रहेगा तो सत्ताधीशों को क्या फर्क पड़ेगा? हमें अपनी महान विरासत पर गर्व करने के उपदेश तो अक्सर दिए जाते हैं, लेकिन उसे विकृतियों से बचाने की चिंता कहीं दिखाई नहीं देती। सावित्री-सत्यवान जैसे आदर्शों वाले देश में यदि सोनम और सिया जैसी प्रवृत्तियां पनप रही हैं, तो समाज अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही से मुंह नहीं मोड़ सकता।रफ्तार और बदलाव के इस युग में सात जन्मों के साथ की बात भले ही पुरातनपंथी लगे, लेकिन एक जन्म का साथ तो ईमानदारी से निभाया ही जाना चाहिए। निस्संदेह विवाह संबंध में लड़का और लड़की, दोनों को पसंद-नापसंद का समान अधिकार होना चाहिए। फिर भी यदि साथ चलना संभव न हो, तो अलगाव को भी गलत नहीं माना जाना चाहिए। लेकिन रिश्तों में बेवफाई किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
हत्या कानूनी अपराध है, तो बेवफाई सामाजिक अपराध है। विवाह पूर्व और विवाहेतर संबंधों की बढ़ती प्रवृत्ति तथा उनसे जुड़े आपराधिक दुखांत यह संकेत देते हैं कि संबंधित परिवार और समाज भी अपना दायित्व पूरी तरह नहीं निभा पा रहे हैं।कभी साहित्य और सिनेमा को समाज का दर्पण कहा जाता था, लेकिन आज उनके नाम पर भी पश्चिम से आयातित अप-संस्कृति ही घर-घर परोसी जा रही है। ओटीटी कार्यक्रमों और उनकी भाषा ने तो पारिवारिक मर्यादाओं तक को चुनौती दे दी है।पिछले वर्ष मेरठ में एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर उसका शव ड्रम में सीमेंट भरकर छिपा दिया था। जिस साहिल की आशिकी में मुस्कान ने सौरभ की हत्या की साजिश रची, उन दोनों की तुलना कोई समझदार व्यक्ति नहीं कर सकता। "प्यार अंधा होता है" कहकर ऐसे अपराधों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
इसके बाद पत्नियों द्वारा प्रेम प्रसंग में बाधक पतियों को "ड्रम में सीमेंट बना देने" जैसी धमकियों की खबरें यह बताती हैं कि बेवफा पत्नी द्वारा पति की सुनियोजित हत्या शर्मिंदगी के बजाय कहीं-कहीं हौसला-अफजाई का कारण बन रही है।रिश्तों के कत्ल की फेहरिस्त बहुत लंबी है। आत्महत्या के लिए मजबूर कर देने वाले पति-पत्नियों के किस्से भी कम नहीं हैं। केवल पत्नियां ही नहीं, पति या प्रेमी भी अपने साथी की हत्या करने या करवाने में पीछे नहीं हैं। प्रेमिका से लेकर लिव-इन पार्टनर और पत्नी तक की सुनियोजित हत्याओं के दिल दहला देने वाले मामले सामने आ रहे हैं। कहीं शव सूटकेस में बंद मिलता है तो कहीं फ्रिज में।
हरियाणा के रेवाड़ी में एक युवक ने अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या कर स्वयं भी आत्महत्या कर ली। प्रेम विवाह करने वाला दो बच्चों का पिता यह युवक तीन बच्चों की मां के साथ लिव-इन में रह रहा था। युवक का शव पंखे से लटका मिला, जबकि उसकी लिव-इन पार्टनर का शव बेड के अंदर पाया गया।हत्या के तरीके बताते हैं कि अधिकांश घटनाएं तात्कालिक गुस्से का परिणाम नहीं थीं, बल्कि सोच-समझकर और सुनियोजित ढंग से अंजाम दी गईं। हर रिश्ते में नोकझोंक होती है, लेकिन बात यदि जान लेने तक पहुंच जाए तो स्पष्ट है कि वहां प्रेम नहीं था।
नैतिक मूल्यों, संस्कारों और पारिवारिक संस्कृति के लिए विश्वभर में सराहा जाने वाला भारतीय समाज यदि आत्मघाती कगार पर पहुंचता दिखाई दे रहा है, तो संयुक्त परिवारों का विघटन और आधुनिकता के नाम पर अप-संस्कृति का विस्फोट इसके प्रमुख कारणों में शामिल प्रतीत होते हैं।विवाह पूर्व और विवाहेतर संबंध फैशन बनते जा रहे हैं। व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मुखर आकांक्षाओं वाले इस दौर में जहां वर्जनाएं तोड़ने की होड़ मची हुई है, वहीं नैतिक मूल्यों और संस्कारों के प्रश्नों पर चारों ओर चिंताजनक और आत्मघाती मौन पसरा हुआ है।