ट्रंप के 15% ग्लोबल टैरिफ ऐलान के बाद भारत समेत एशिया में हलचल। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली अमेरिकी व्यापार नीति का असर क्या होगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित नई विश्वव्यापी शुल्क दरें ने अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद व्यापारी समुदाय में अनिश्चितता की लहर उठा दी है। यह निर्णय विशेष रूप से एशियाई देशों, जैसे कि भारत और इंडोनेशिया, के लिए चिंताजनक है जिन्होंने अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर बातचीत करने में कई महीनों का समय लगाया था।
ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिका में आने वाले सभी सामान पर 15 प्रतिशत की नई ग्लोबल लेवी (टैक्स) लगाएंगे। इसके प्रभाव से अमेरिकी कस्टम विभाग व्यापार नीति से जुड़े टैरिफ का आदान-प्रदान रोक देगा, जिसका उपयोग ट्रंप ने वैश्विक ट्रेड वार शुरू करने के लिए किया था।
चीन ने कहा कि वह इस फैसले के तथ्यों और असर का पूरी तरह से आकलन कर रहा है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि चीन ने हमेशा एकतरफा टैरिफ बढ़ोतरी का विरोध किया है और बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि ट्रेड वार में कोई नहीं जीतता।
अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को 6-3 के मत से गैरकानूनी घोषित किया था। इसके तुरंत बाद ट्रंप ने दूसरे कानून (ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122) का सहारा लेते हुए पहले 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लगाने और फिर इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की।
तात्कालिक प्रभाव के बारे में भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने आगे कहा कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर वाणिज्य मंत्रालय स्थिति की समीक्षा कर रहा है।
यह फैसला आने के कुछ घंटों के भीतर ही ट्रंप ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत के नए टैरिफ ऐलान कर दिया, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया। यह नयी दर, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील में तय 18 प्रतिशत के टैरिफ की दरें से कम है। ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील के बारे में कहा था कि कुछ नहीं बदलेगा। वे टैरिफ चुकाएंगे और हम टैरिफ नहीं चुकाएंगे।