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Afwah vs Awareness: War Impact on Common People

अफवाहों के दौर में कसौटी पर नागरिकों की जागरूकता...

पश्चिम एशिया युद्ध के बीच अफवाहों से बाजार में अस्थिरता बढ़ी। पीएम मोदी ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की। तेल संकट और महंगाई के बीच जागरूकता ही समाधान है।


अफवाहों के दौर में कसौटी पर नागरिकों की जागरूकता

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से उपजे संकट का असर जैसे-जैसे पांव पसारता जा रहा है, वैसे-वैसे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि इसकी गंभीर मार आम लोगों पर पड़ने वाली है। बाजार में जिस तेजी से वस्तुओं की कीमतें चढ़नी शुरू हो गई हैं, उसमें बहुत से लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरी चीजों की खरीदारी करते समय यह सोचने की स्थिति आ गई है कि युद्ध कब खत्म होगा और सामान्य स्थिति कब बहाल होगी।

लेकिन इसमें कहीं न कहीं बहुत सारी बातें अफवाहों के कारण भी पंख लगाकर अव्यवस्था फैलाने का कारण बन रही हैं। तभी तो ‘मन की बात’ के 132वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आम जनता से ऐसी किसी भी अफवाह को लेकर सावधान रहने की अपील की।प्रधानमंत्री का यह आह्वान कि जागरूक रहें, बहकावे में न आएं, वास्तविकता में पूरे मसले की गंभीरता को इंगित करते हुए आमजन को राष्ट्रीय सरोकारों के प्रति संवेदनशील रहने का भी संकेत देता है। क्योंकि किसी भी तरह की अव्यवस्था का अराजक तत्व तुरंत लाभ उठाने की कोशिश करते हैं।

ऐसे सभी मंसूबों को विफल जागरूक नागरिक ही कर सकते हैं। तभी तो प्रधानमंत्री ने एकजुट होकर देशहित को सर्वोपरि रखते हुए वैश्विक चुनौतीकाल में देशवासियों से जागरूकता के साथ ही एकजुटता का आह्वान किया। क्योंकि राजनीतिक बयानबाजी और गैर-जिम्मेदार आलोचना से 140 करोड़ नागरिकों का भविष्य भी दांव पर लग सकता है।ऐसे में प्रधानमंत्री का आह्वान आमजन को सचेत करने के साथ ही जागरूक नागरिक कर्तव्य को भी रेखांकित करता है। सरकार अपने स्तर पर सतर्क और सख्त है। तभी तो जैसे ही कई जगहों से सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें आईं, तो इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करते हुए जमाखोरी और कालाबाजारी से सख्ती से निपटने को कहा है।

ध्यान रखना होगा कि जब तक सरकार इस संकट के दौर में वैकल्पिक उपायों या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तेल और गैस की आपूर्ति को सामान्य बनाने की व्यवस्था कर रही है, तब तक राष्ट्रीय संकट के दौर में नागरिकों को भी अपनी सजगता और सतर्कता बनाए रखनी होगी।उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार ने जिस तरह पेट्रोल और डीजल के उत्पाद शुल्क में कटौती करके कंपनियों को राहत दी है, उसी तरह आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कीमतें नियंत्रण में रखने से लेकर रसोई गैस के सिलेंडरों की सहज आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगी। सरकार ने इस दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि ईरान के खिलाफ इजराइल और अमेरिका के हमले के बाद जिस तरह दुनियाभर में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, उसकी वजह से वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ी हैं। ऐसे में भारत में भी यह चुनौती खड़ी है कि इस समस्या के बीच आम लोगों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।उत्पाद शुल्क में कटौती से खुले बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम को स्थिर रखने में मदद जरूर मिल सकती है, लेकिन अभी असली समस्या उपलब्धता की है। हालांकि यह इतनी भी गंभीर स्थिति नहीं है कि पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी लाइन लगाकर माहौल को अनावश्यक रूप से पैनिक बनाया जाए।

वैश्विक संकट में पेट्रोल-डीजल की अतिरिक्त खरीदारी को लेकर होड़ दिखना यह बताता है कि संकट से लड़ने के बजाय आमजन उसे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। घोषित तौर पर सरकार यह आश्वासन दे रही है कि घबराने की बात नहीं है, क्योंकि देश के पास तेल और गैस का पर्याप्त भंडार है।कच्चे तेल की खरीद के लिए सरकार ने अन्य विकल्पों की ओर भी ध्यान दिया है। अतः सरकार के प्रयासों में आम नागरिक सहयोगी बनकर इस संकट से पार पा सकते हैं।

 

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