बुरहानपुर में 1933 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की उपस्थिति में संघ की पहली शाखा लगी थी। संघ कार्य के 100 वर्ष पूरे होने पर यह इतिहास फिर चर्चा में है।
बुरहानपुर। इतिहास कभी अचानक नहीं बनता... वह किसी संकल्प, किसी त्याग और किसी दूरदर्शी सोच से जन्म लेता है। दक्षिण दरवाजे के नाम से विख्यात बापुर अर्थात् बुरहानपुर की पवित्र धरा पर भी ऐसा ही एक क्षण आया था, जब 1 जनवरी 1933 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने एक पत्र लिखा... और उसी पत्र ने प्राचीन ब्रह्मपुर वर्तमान नाम बुरहानपुर में एक ऐसी विचारधारा की नींव रख दी, जो आज भी उतनी ही जीवंत है।
एक पत्र... एक संकल्प, और ब्रह्मपुर में जन्मी 93 साल पुरानी विरासत
७. हेडगेवार ने बुरहानपुर के बाबा साहेब मुजुमदार को पत्र लिखकर यहां शाखा प्रारंभ करने का आह्वान किया। यह सिर्फ एक पत्र नहीं था... यह था एक विश्वास, एक आह्वान और एक नई शुरुआत का संदेश।
भाऊ साहब भुस्कुटे बने थे गृहस्थ प्रचारक : बुरहानपुर से सबसे पहले गृहस्थ प्रचारक बुरहानपुर से निकले भाऊ सह व भुस्कुटे। 14 जून 1915 क बुरहानपुर में जन्मे गोविंद कृष्ण भुस्कुटे भाऊसाहब भुस्कुटे के नाम से प्रसिद्ध हुए। उच्च शिक्षण के लिए नागपुर आने के बाद 1932 की विजयादशमी से ही वे नियमित शाखा पर जाने लगे। उन्होंने संघ शिक्षा वर्गों का प्रशिक्षण भी पूरा किया और संघ योजना से प्रतिवर्ष शिक्षक के रूप में देशभर के वर्गों में जाने लगे। उन्होंने प्रचारक बनने का निश्चय किया है, लेकिन वे अपने माता-पिता की एकमात्र संतान थे, इसलिए डॉ. हेडगेवार ने उन्हें गृहस्थ जीवन अपनाकर प्रचारक जैसा काम करने की अनुमति दी। इस प्रकार के प्रथम गृहस्थ प्रचारक बने।
प्रचारक बनकर की सेवा प्राचीन शहर बुरहानपुर से प्रचारक के रूप में पूनमचंद उस्ताद (बुरहानपुर), श्रीकांत मुजुमदार और वर्तमान में वैभव पाटिल (निवासी-डाभियाखेड़ा नेपानगर) महाराष्ट्र के कोकण में स्वयंसेवको को तैयार कर राष्ट्र प्रतिबंध लगने पर भूमिगत होकर किया काम पूर्व तहसील प्रमुख रहे मनोज लघचे ने बताया कि 1948 में संघ पर प्रतिबंध लगने के बाद भी बुरहानपुर से कई स्वयंसेवक भूमिगत होकर समाज जागरण का काम करते रहे। मुश्किल दौर में भी संघ के स्वयंसेवकों ने देशसेवा के लिए कदम पीछे नहीं किए। इसके बाद 1975 में लगी इमरजेंसी के समय भी कई लोग जेल में डाले गए, लेकिन संघ देशसेवा के लिए आगे बढ़ता गया।
13 फरवरी 1933: जब बुरहानपुर ने इतिहास को जन्म दिया
सिर्फ 43 दिन बाद 13 फरवरी 1933 की वह शाम 6:30 बजे महाजनापेठ, ताप्ती किनारे स्थित पपू गोविंदनाथ महाराज की समाधि के पास यहीं पहली बार डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की उपस्थिति में संघ की शाखा लगी और बुरहानपुर ने एक नई पहचान हासिल की। उस पहली शाखा में मौजूद रहे-श्री कावतकर, श्री वाईकर, बालकृष्ण चापोरकर, अन्ना महाजन, भाऊसाहब भुस्कुटे, बापू सोनार ये केवल नाम नहीं थे. ये वो लोग थे जिन्होंने एक विचार को जमीन दी, उसे दिशा दी और उसे भविष्य दिया।
जब स्वयं डॉ. हेडगेवार पहुंचे ब्रह्मपुर धरा पर
इतिहास गवाह है डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार स्वयं दो दिवसीय प्रवास पर बुरहानपुर आए। उनके कदमों की आहट ने इस शहर को ऊर्जा दी, मार्गदर्शन दिया और एक अटूट विश्वास दिया। जब किसी विचार को आकार देना होता है, तो त्याग भी जरूरी होता है ठोके मास्टर साब ने संघ की शाखा लगाने के लिए जमीन दान में दी। यही जमीन आगे चलकर एक संगठन की जड़े मजबूत करने वाली भूमि बन गई। दरअसल यह वही स्थान है पपू गोविदनाथ महाराज की समाधि जिन्हें अहिल्याबाई होलकर का गुरु माना जाता है। यह धरा पहले से ही पवित्र थी...और 1933 में यहां लगी शाखा ने इसे इतिहास का तीर्थ बना दिया।
1918 से 2023: 105 साल की भावनात्मक यात्रा
इस स्थल की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। सन 1918 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने बुरहानपुर में पपू गोविंदनाथ महाराज को समाधि का जीर्णोद्धार कराया था। यह समाधि ताप्ती नदी के किनारे महाजनापेठ में है। पपू गोविंदनाथ महाराज अहिल्याबाई होलकर के गुरु माने जाते हैं। अब उसी समाधि का 105 साल बाद अप्रैल 2023 में फिर से जीर्णोद्धार हुआ है। यहां समाधि और राम दरबार का लोकार्पण करने आरएसएस के वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत बुरहानपुर आए। 1962 में तासी नदी में आई बाढ़ के कारण समाधि स्थल को नुकसान पहुंचा था। इसका जीणोद्धार कराया गया है, जिसका लोकार्पण सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने किया। साथ ही उन्होंने भगवान श्रीराम दरबार प्रतिमा स्थापना का लोकार्पण भी किया।
पहला प्रतिबंध: सन 1948
के प्रतिबंध के समय बुरहानपुर में 85 स्वयंसेवकों ने सत्याग्रह कर अपनी गिरफ्तारी दी थी। इन सबको 6 माह की कैद की सजा दी गई थी। पहले चक्की पीसना, फिर दाल बीनना, वरी के धागे निकालना आदि का काम दिया जाता था।आपातकाल सन 1975 में आपातकाल लगने पर जिले से 165 स्वयंसेवक जेल में रहे थे।
संघ शिक्षा वर्ग: बुरहानपुर से सर्वप्रथम सन 1938 में स्वयंसेवक संघ शिक्षा वर्ग करने गए थे। वर्तमान में जिले में 210 प्रथम वर्ष शिक्षित, 84 द्वितीय वर्ष शिक्षित और 46 तृतीय वर्ष शिक्षित स्वयंसेवक है।बुरहानपुर जिले में दायित्व लेकर काम करने वाले कार्यकर्ता निम्नलिखित है:-
जिला संघचालक : मा. वासुदेव चौधरी, जिला कार्यवाह रवीन्द्र हासानंदानी, दिनेश सुगंधी, शिवाजीराव पाटील, जिला प्रचारक संजय शर्मा, अजय ओसवाल, प्रमोद पंडित, जिले से निकले प्रचारक : पूनमचद उस्ताद, रामभाऊ पातोंडीकर, प्रवीण दुबे, श्रीकांत मुजुमदार, राजेश गवले। निर्माण में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे है।