अशोकनगर में संघ कार्य की 1942 से शुरुआत से लेकर आज तक की यात्रा। समर्पण, संघर्ष और विस्तार की प्रेरक कहानी, स्वयंसेवकों के योगदान के साथ।
मध्यप्रदेश का अशोकनगर, जो कभी गुना जिले की एक तहसील हुआ करता था और 'पछार' नाम से जाना जाता था, आज संघ कार्य की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहली शाखा सन् 1942 के आसपास गुना जिले के प्रचारक डॉ. प्रभाकर गोविंद घुड़े द्वारा स्वामीजी की बगिया में प्रारंभ की गई थी। साधारण वातावरण और सीमित संसाधनों के बावजूद यह शुरुआत एक बड़े उद्देश्य की नींव थी। इस पहली शाखा के मुख्य शिक्षक कैलाश खेरा बने, जिनके साथ हरिराम मिस्त्री, कोमल प्रसाद सोनी, राजकुमार शर्मा, बाबूलाल सिंघई, अमरचंद जैन, चुट्टा कुशवाह, द्वारका गुप्ता, काका कबूलचंद जैन और रमाशंकर अग्रवाल जैसे स्वयंसेवकों ने इस कार्य को आगे बढ़ाया।
संघर्ष और तपस्या का दौर- शुरुआती समय संघ कार्य के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। संसाधनों की कमी और सामाजिक स्वीकार्यता का अभाव था। डॉ. घुड़े स्वयं बोहरे जी के मंदिर में उहाकर कार्य संचालित करते थे। चिकित्सा विज्ञान में स्नातक होने के बावजूद उन्होंने समाज सेवा को जीवन का उद्देश्य बना लिया। बाद में वे रामकृष्ण आश्रम में संन्यासी बन गए, जो उनके त्याग और तपस्या का प्रतीक हैं।
संगठन का विस्तार और नई दिशा- प्रारंभमें अशोकनगर और गुना का संघ कार्य ग्वालियर विभाग के अंतर्गत आता था, जिसे बाद में उज्जैन विभाग में शामिल किया गया। सन् 1946 में नेमीचंद कक्कड़ को गुना जिले का प्रचारक नियुक्त किया गया, जिन्होंने संगठन को नई दिशा दी। कुछ समय के लिए इंदौर के श्याम देशमुख ने भी यहां कार्य किया। इनके प्रयासों से संघ कार्य गांव-गांव तक फैलने लगा। ईसागढ़, शादौरा और मुंगावली जैसे क्षेत्रों में भी शाखाएं प्रारंभ हुई। सोनकच्छ (देवास) के मोतीलाल वर्मा पहले तहसील प्रचारक बने और उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन को मजबूत किया.
प्रतिबंध का दौरः साहस और समर्पण: सन् 1948-49 में संघ पर लगे प्रतिबंध ने अशोकनगर के स्वयंसेवकों की परीक्षा ली। इस दौरान कालूराम शर्मा, रमाशंकर अग्रवाल और बाबूलाल सिंघई सहित लगभग 50 स्वयंसेवकों ने जेल भरो आंदोलन में भाग लेकर गिरफ्तारी दी। यह दौर संघर्ष का प्रतीक बना और संगठन की जड़ों को और मजबूत कर गया।
मुंगावलीः विस्तार का केंद्र मुंगावली में संघ कार्य की शुरुआत ग्वालियर से आए नारायण राव तटें ने की। यहां संगठन ने तीव्र गति से विकास किया और 1956 तक नगर के प्रत्येक मोहल्ले में शाखाएं लगने लगीं। कुल 18 शाखाओं के साथ मुंगावली संघ कार्य का एक मजबूत केंद्र बन गया। हरिया मंदिर की मुख्य शाखा को ध्वज प्राप्त था। श्याम राठौर, सखाराम विपट और मोहनलाल अवस्थी जैसे प्रचारकों ने इस क्षेत्र में संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
संगठनात्मक संरचना और नेतृत्व- समय के साथ संघ कार्य को संगठित रूप मिला। अशोकनगर को संघ दृष्टि से जिला घोषित किया गया और कई कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली। जिला संघचालक के रूप में श्रीकृष्ण सोमानी, अरविंद रघुवंशी और वर्तमान में हरवीर सिंह रघुवंशी ने कार्य किया। जिला प्रचारकों में सुरेन्द्रपाल सिंह, जितेन्द्र सिंह पंवार और वर्तमान में राजेश चौधरी सक्रिय हैं। वहीं जिला कार्यवाह के रूप में सुखानंद रावत, महेन्द्र शर्मा और भूरेसिंह रघुवंशी ने योगदान दिया। जिले से रामकृपाल सिंह, रवि सोनी, राजेन्द्र यादव, भोलाराम रघुवंशी और कृपाण सिंह लोधी जैसे प्रचारक भी निकले।
स्थायित्व की ओर कदम अशोकनगर में संघ का कार्यालय पहले सुभाषगंज स्थित पन्ना सदन में किराए से संचालित होता था। बाद में यह नेहरू बाल उद्यान के पास रामप्रसाद चौधरी के मकान में स्थानांतरित हुआ। सन् 1998 के बाद संगठन का अपना भवन बन गया, जो संघ कार्य की स्थिरता और विकास का प्रतीक है।
समर्पण की अनूठी मिसाल
संघ कार्य में समर्पण के कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। एक बार पथ संचलन के लिए खाकी नेकर की आवश्यकता थी, लेकिन द्वारका बोहरे जी के पास केवल सफेद नेकर थी। तब प्रचारक जी ने गोबर से उसे रंगकर खाकी बना दिया और उसी नेकर को पहनकर ये संचलन में शामिल हुए। यह घटना बताती है कि संकल्प के आगे संसाधनों की कमी कोई बाधा नहीं होती। इसी प्रकार गुना के स्वयंसेवक नारायणसिंह यादव समर्पण की अद्भुत मिसाल हैं। रामजन्मभूमि आआंदोलन के दौरान गोली लगने से उनका पैर काटना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे रामकार्य में योगदान मानकर स्वीकार किया। आज भी वे संघ और बजरंग दल के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निर्माण हिंदू धर्म, हिंदू संस्कृति और हिंदू राष्ट्र की रक्षा के लिए हुआ है। इसलिए जो-जो बातें इस संस्कृति का प्रतीक हैं, उनकी संघ रक्षा करेगा। भगवा ध्वज हिंदू धर्म और हिंदू राष्ट्र का प्रतीक होने के कारण हमारा ध्वज मानना संघ का कर्तव्य है।
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार