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नियोगी आयोग रिपोर्ट 1956 क्या है?

मध्य प्रदेश के नियोगी आयोग की 1956 रिपोर्ट में क्या खुलासे हुए? कांग्रेस की पहली सरकार ने कन्वर्जन की जांच क्यों कराई?

मध्य प्रदेश के नियोगी आयोग की 1956 रिपोर्ट क्यों बनी और इसमें क्या खुलासे हुए? जानें पूरा मामला, तारीख, विवाद और इसका असर।


मध्य प्रदेश के नियोगी आयोग की 1956 रिपोर्ट में क्या खुलासे हुए कांग्रेस की पहली सरकार ने कन्वर्जन की जांच क्यों कराई

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मध्य प्रदेश में 1950 के दशक में एक ऐसी रिपोर्ट आई जिसने पूरे देश में कन्वर्जन और मिशनरी गतिविधियों पर बहस छेड़ दी। इसे नियोगी आयोग रिपोर्ट 1956 कहा जाता है। इस आयोग का गठन तत्कालीन सरकार ने 14 अप्रैल 1954 को किया था और इसकी रिपोर्ट 18 अप्रैल 1956 को सौंपी गई।

यह रिपोर्ट सिर्फ एक सरकारी दस्तावेज नहीं थी, बल्कि इसमें ऐसे दावे और निष्कर्ष थे, जिनके कारण देश विरोधी खेमे ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। अगर उस समय इसके आधार पर सरकार काम करती तो देश में कन्वर्जन की ऱफ्तार बहुत कम हो जाती। आज भी जब कन्वर्जन के खिलाफ कानूनों की बात होती है, तो इस रिपोर्ट का जिक्र जरूर होता है।

क्या था नियोगी आयोग और क्यों बनाया गया?

नियोगी आयोग को आधिकारिक रूप से “Christian Missionary Activities Enquiry Committee” कहा गया। इसका उद्देश्य था यह जांच करना कि मध्य प्रदेश के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में मिशनरी गतिविधियां किस तरह काम कर रही हैं। उस समय सरकार के पास कई शिकायतें आई थीं कि धर्मांतरण के लिए लालच, दबाव या अन्य तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी को जांचने के लिए यह आयोग बनाया गया। जांच में शिकायतें सही पाई गई। 

रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया?

नियोगी आयोग रिपोर्ट 1956 में कई अहम बातें सामने आईं

  • 11,000+ लोगों से संपर्क

  • 700 गांवों का दौरा

  • 375 लिखित बयान

  • 99 प्रश्नों वाला प्रश्नपत्र

  • स्कूल, अस्पताल, चर्च आदि का निरीक्षण 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आदिवासी समुदाय खास तौर पर प्रभावित हो रहा था।

क्यों इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू नहीं किया ?

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद देशभर में बहस शुरू हो गई। एक तरफ कुछ लोगों ने इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन” के लिए जरूरी बताया दूसरी तरफ कई ईसाई संगठनों और नेताओं ने इसे पक्षपाती कहा और आरोप लगाया कि रिपोर्ट एकतरफा है, यही वजह है कि सरकार दबाव में आ गई और नियोगी आयोग रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। Christian Missionary ने इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी । 

तारीख और तथ्य: कब बनी और कब आई रिपोर्ट?

  • गठन: 14 अप्रैल 1954
  • रिपोर्ट जमा: 18 अप्रैल 1956
  • स्थान: नागपुर (तत्कालीन मध्य प्रदेश की राजधानी)

यह रिपोर्ट दो वॉल्यूम में तैयार की गई थी और इसमें विस्तृत फील्ड सर्वे शामिल था।

आयोग की संरचना

अध्यक्ष: एम. भवानि शंकर नियोगी

अन्य सदस्य

  • एम.बी. पाठक

  • घनश्याम सिंह गुप्ता

  • एस.के. जॉर्ज

  • रतनलाल मालवीय

  • भानु प्रताप सिंह आदि 

 कुल मिलाकर यह एक 6 सदस्यीय समिति थी।

 

आज के समय में क्यों हो रही है चर्चा?

आज जब कई राज्यों में धर्मांतरण कानून (Anti-Conversion Laws) लागू हैं, तब लोग यह सवाल पूछ रहे हैं क्या नियोगी आयोग की रिपोर्ट ही इन कानूनों की नींव है? क्या उस समय जो मुद्दे उठे थे, वे आज भी मौजूद हैं? इसी वजह से Niyogi Commission 1956 एक बार फिर चर्चा में है और इतिहास से जुड़ा यह मुद्दा वर्तमान राजनीति और समाज में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

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