Breaking News
  • चेपॉक में भिड़ेंगे CSK और PKBS, इस मैदान में तीनों मैच में पंजाब की जीत
  • फिर 'फ्यूल बम' फूटने से पाकिस्तान में मचा हाहाकार! पेट्रोल ₹458 तो डीजल ₹520 के पार
  • खाड़ी देशों में अमेरिका से जुड़े स्टील और एल्युमीनियम प्लांट्स पर ईरान का हमला
  • राघव चड्ढा पर पार्टी की सख्ती! AAP ने राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाया
  • छत्तीसगढ़ के सुकमा में 5 लाख रुपए का इनामी नक्सली मारा गया
  • गुजरात के अमरेली में 3.1 मैग्नीट्यूड का भूकंप, 6 दिनों में दूसरा झटका

होम > विशेष

Nalanda Temple Stampede: 9 Dead in Bihar

शीतला माता मंदिर में मौत की भगदड़

बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर में भगदड़ से 9 श्रद्धालुओं की मौत। प्रशासनिक लापरवाही और भीड़ प्रबंधन पर सवाल, कई लोग घायल।


शीतला माता मंदिर में मौत की भगदड़

बिहार के नालंदा के मघडा गांव स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में मंगलवार सुबह भगदड़ मचने से नौ श्रद्धालु काल का ग्रास बन गए, जिनमें आठ महिलाएं शामिल हैं। घायलों की संख्या इससे कहीं अधिक है, जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। भगवान न करे मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी हो। हादसे के 36 घंटे बाद अभी तक भगदड़ के कारणों का पता नहीं चल सका है।

इसलिए इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया जा रहा है। लेकिन मौत का तांडव देखकर यह तो साफ है कि हमारे व्यवस्थापक, नीतिनियन्ता और अधिकारी दुर्घटनाओं से न तो सबक लेते हैं और न ही संभावित दुर्घटनाओं से निपटने के लिए इनके पास कोई ठोस समाधान है। नालंदा के शीतला माता मंदिर की दुर्घटना इसका ताजा उदाहरण है। यह ठीक है कि हादसे अचानक ही होते हैं, लेकिन इनके होने की वजह अवश्य होती है। फिर हाल के कुछ महिनों में भीड़ या भगदड में मरने वालों का आंकड़ा देखा जाए तो व्यवस्था के नाम सिर्फ छलावा ही नजर आता है। ऐसा लगता है कि भावुक जनता ऐसे ही भेड़ की चाल चल रही है और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी समझे बगैर केवल ढर्रा द्वोये जा रहा है। 

इस दुर्घटना ने एक बार देश को लहूलुहान कर दिया है। जहां तक श्रद्धालुओं का सवाल है तो उनमें इतना धैर्य ही नहीं होता कि व्यवस्था बना कर चले। अक्सर देखने में यह आता है कि सार्वजनिक अथवा धार्मिक स्थलों पर लोग पहले पाने की होड़ में धैर्य तो दूर की बात रही, नैतिकता भी त्याग देते हैं। एक-दो लोगों के गलत नजरिये का खामियाजा निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ता है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानी जाए तो शीतला माता मंदिर में भगदड़ का बहुत कुछ कारण वहां लोगों द्वारा की गई उदडयता ही है। श्रद्धालुओं में दर्शन की होड़ के कारण अफरा-तफरी मचने से हादसा हुआ। भीड़ अधिक होने के बावजूद पुलिस की तरफ से उसे नियंत्रित करने के कोई पुख्ता उपाय नहीं किए गए थे। 

अफरा-तफरी मचने पर कुछ श्रद्धालु जमीन पर गिर गए और फिर लोग एक दूसरे को कुचलते बले गए। कुछ स्थानीय लोगों ने तो यह भी आरोप लगाया है कि पैसों के लालच में ज्यादा लोगों को एक साथ आगे बढ़ने दिया गया जिससे यह हादसा हो गया। हाल के दिनों में देश में भगदड़ की घटनाओं में वृद्धि एक गंभीर चिंता का विषय है, जो भीड़ प्रबंधन और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है। 2025 में करूर (तमिलनाडु) में विजय की रैली, हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर, और बेंगलुरु (आरसीबी जश्न) में हुई भगदड़ की घटनाओं ने देश को चिंता में डाल दिया था। इन हादसों में सबसे बड़ा कारण प्रशासन की घोर निष्क्रियता है। जब किसी कार्यक्रम में बड़ी भीड़ जुटने की संभावना हो, तो पुलिस को पहले से ही सुरक्षा घेरा और निकासी योजना तैयार रखनी चाहिए। 

यह ठीक है कि भगदड़ में जान गंवाने वालों के परिवारों को मुआवजा देना सरकार का पुनीत कर्तव्य है, लेकिन यह त्रासदी को नहीं मिटा सकता। करूर और हरिद्वार जैसी घटनाओं से हमने सबक नहीं सीखा तो अब तो चेत जाइये। अगर हमने भीड़ प्रबंधन के प्रति लापरवाही जारी रखी, तो हम उत्सवों के देश में हर दिन शोक मनाने के लिए मजबूर होंगे।

 

Related to this topic: