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जो लिखूंगा सच लिखूंगा....

अनुराग उपाध्याय


जो लिखूंगा सच लिखूंगा

दतिया सीट पर रायता और राज्यसभा 

दतिया सीट पर भी कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के मामले में रायता फैल गया। अदालती फरमान आने के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा ने भी तुरंत कार्यवाही कर दतिया सीट रिक्त कर दी। इस एक सीट के आने जाने से भाजपा की सेहत पर कोई खास असर पड़ने वाला नहीं है। संख्याबल के हिसाब से भाजपा इतिहास के सबसे समृद्ध दौर में है। लेकिन इस मामले ने कांग्रेस की सांसें उखाड़ दी हैं। कांग्रेस जहाँ संख्याबल में कमजोर हो रही है वहीं इसका सबसे ज्यादा असर अगले महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव पर पड़ने वाला है। राज्यसभा की रिक्त होने वाली तीन सीटों में से दो भाजपा और एक कांग्रेस के पास जाना चाहिए। लेकिन जिस तरह के कांग्रेस के अंदरूनी हालात हैं, वे इशारा कर रहे हैं कि भाजपा की ज़रा सी मेहनत उसे तीनों सीटें दिलवा सकती है। हमें पता है कांग्रेस के कुछ विधायक, भाजपा की रीतिनीति से इतने प्रभावित हैं कि वे भाजपा उमीदवार के लिए वोट कर सकते हैं। कांग्रेस को ऐसे में समझ ही नहीं आ रहा है कि वो या करे और या नहीं करे। कांग्रेस ने दिल्ली से भोपाल निर्देश भेजे हैं कि राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर अपने विधायकों पर नजर रखी जाए।

योगी-यादव समीकरण

काशी में 'विक्रमादित्य महोत्सव' केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है। इसके सन्देश एकदम साफ हैं कि देश वापस अपनी जड़ों की तरफ लौट रहा है। एक कालखंड था जब सनातन या हिन्दू संस्कृति जैसे शब्दों और विषयों को किनारे पर किया जाता रहा है। लेकिन अब देश बदल रहा है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में काशी के साथ पूरे देश ने इसको अनुभव किया है।

काशी में मुख्यमंत्री द्वय डॉ. मोहन यादव और योगी आदित्यनाथ एक साथ नजर आए तो राजनीति के कैनवास पर भारतीय संस्कृति के रंग साफ नजर आए। यादव-योगी का साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति के भविष्य की एक तस्वीर है। यह तस्वीर समाजवादी पार्टी के साथ यूपी के सम्पूर्ण विपक्ष की नींद उड़ाने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में जब मोहन यादव सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बात करते हैं तो यकीन मानिए, अखिलेश यादव एंड कंपनी की चूलें हिल जाती हैं। ताजा वाय-वाय [योगी-यादव] समीकरण अब समाजवादियों के एमवाई समीकरण को जमींदोज कर देगा। काशी में 'विक्रमादित्य महोत्सव' सांस्कृतिक माइलस्टोन तो बन ही गया है।

यह रहा आपका टेक्स्ट, केवल गलतियों को ठीक करके (सही हिंदी में):

पप्पूपन की भी हद है

राहुल गांधी को राजनीति में ‘पप्पू’ कहकर संबोधित किया जाता है। इसका विरोध करने वाले कांग्रेसी भी अब उन्हें ‘पप्पू’ मानने लगे हैं। युद्ध के दौरान गैस की कुछ कमी होने पर राहुल गांधी ने सरकार पर जिस तरह का आक्रमण करने का प्रयास किया, उससे साफ हो गया कि उनकी राजनीतिक समझ कैसी है।

जहां कांग्रेस शासित सरकारें हैं, उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बयान राहुल गांधी की बकवास की पोल खोलने के लिए पर्याप्त थे। ऐसे में रही-सही कसर कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ ने पूरी कर दी। उन्होंने छिंदवाड़ा में साफ कहा कि युद्धकाल में ऐसा होता है, लेकिन हमारे यहां तो अब तक गैस की कोई कमी नजर नहीं आई है।

कमलनाथ का बयान राहुल गांधी से एकदम अलग था। ऐसा लगता है कि राहुल गांधी कभी भी कुछ भी बोलते वक्त अपने ही बड़े नेताओं से कोई सलाह-मशविरा नहीं करते हैं। कांग्रेस के एक प्रवक्ता तो अब कांग्रेस कार्यालय में यह कहते नजर आते हैं कि ‘पप्पूपन की भी हद है।’

 राजा का बदला मिजाज

या राजा का मिजाज बदल गया है या बात कुछ और है। राजा मतलब दिग्विजय सिंह। राजा ने शिक्षा में सुधार के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार की प्रशंसा की है। राजा ने डॉक्टर साहब को एक चिट्ठी भेजकर सार्वजनिक कर दी। इस चिट्ठी में शिक्षकों के प्रयासों से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की बात कही गई है।

दिग्विजय सिंह ने मोहन सरकार को सुझाव दिया है कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय में शिक्षकों का पक्ष रखे, जिससे शिक्षकों का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ेगा। इससे पहले दिग्विजय सिंह ने भाजपा संगठन की तारीफ की थी और हाल ही में अयोध्या में रामलला के यहां माथा भी टेक आए।

राजा का ये बदला मिजाज उनकी राजनीति का हिस्सा है या बात कोई और है, इसे लेकर कांग्रेसी बहुत हैरान परेशान हैं। कितनी सच्चाई है, हम नहीं जानते, लेकिन एक दिलजला कांग्रेसी नेता कह रहा था - राजा जीतू पटवारी को निपटाकर अपने पुत्र जेबी बाबा का रास्ता आसान कर रहे हैं।

भाजपा के मीडिया में 90 लोग

भाजपा मीडिया विभाग की जब सूची आ गई। कुल जमा 90 लोग प्रवक्ता या मीडिया पैनलिस्ट बनाए गए हैं। इनके प्रभारी आशीष अग्रवाल को जोड़ लें तो यह आंकड़ा 90 पर पहुंच जाता है। अगले विधानसभा चुनाव के महासंग्राम में ये 90 लोग मीडिया के मोर्चे पर अपने विरोधियों को अपने तर्कों से जवाब देते नजर आएंगे।

इधर कांग्रेस में इस सबके लिए एग्जाम चल रहे हैं। जो लोग मीडिया विभाग में हैं, वे बस रस्म अदायगी कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी की टीम भाजपा के लोगों से ज्यादा दमदार मीडिया टीम बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस की जब तक टीम बनेगी, तब तक भाजपा वाले प्रशिक्षण लेकर टीवी और अखबार के पन्नों पर उतर चुके होंगे।

युद्ध खा गया एक पानीपुरी

ईरान युद्ध का असर हमारे यहां भी पड़ रहा है। सब अपनी-अपनी बता रहे हैं कि फलां चीजों के दाम बढ़ गए हैं। यह सच भी है। लेकिन मैं अपनी बात कहूंगा। अभी ग्वालियर में समोसा खाने गया तो 15 रुपये वाला समोसा 20 में मिला। भोपाल में पानी बताशे (फुल्की, पानी पूरी, गुपचुप) खाने गया तो दस रुपये के पांच मिलने वाले अब दस रुपये के चार ही मिले।

उज्जैन में चाट खाने रुका तो 30 वाली छोले टिक्की 50 रुपये में मिली। आप ही बताइए ये दुख मैं किसको बताऊं। इनको तो हम स्टॉक करके भी नहीं रख सकते। इधर लोग युद्ध के नाम पर लगे हैं सामान इकट्ठा करने। कोई बेवजह रसोई गैस तो कोई दूसरे सामान जमा करने में लगा है।

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