मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भाजपा नेताओं को लेकर नई गाइडलाइन, कैलाश विजयवर्गीय का बंगाल चुनाव से दूरी और किसानों के मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान की सख्त टिप्पणी सामने आई ह
अनुराग उपाध्याय
भाजपा में अब समझाइश नहीं
भाजपा नेताओं के लिए बड़ा खुशनुमा वातावरण है। भीषण गर्मी में पदों की बारिश हो रही है। वहीं, भाजपा संगठन अपने कुछ बड़े नेताओं के कार्यव्यवहार से खिन्न है। भाजपा अपने कुछ बड़बोले नेताओं के कारण एक नई गाइडलाइन बना रही है। विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी के कांड और उसके बाद प्रीतम लोधी द्वारा आईपीएस अफसर को धमकाने और फिर मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई इन्दर सिंह चौहान ने आलीराजपुर जनपद पंचायत की महिला सीईओ प्रिया काग को 'जिंदा गाड़ने' और 'दांत तोड़ने' की धमकी दे दी। भाजपा संगठन ने इन नेताओं को अपनी हद में रहने की नसीहत दी है। लेकिन इसके बाद एक नई गाइडलाइन बना के नेताओं को दी जाएगी कि उनकी और उनके रिश्तेदारों की तरफ से पार्टी की छवि को धूमिल करने का मामला आया तो पार्टी से सीधे विदाई तय की जाएगी। भाजपा के बड़े नेताओं का कहना है अब समझाइश के दौर नहीं चलेंगे। बताते हैं मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इस बारे में चर्चा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री इस मामले पर कठोर कार्यवाही के पक्षधर हैं।
कैलाश बंगाल क्यों नहीं गए
मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इस बार बंगाल के चुनाव में नजर नहीं आए। जबकि पिछले चुनाव में कई महीने पहले से विजयवर्गीय ने कोलकाता में अपना अस्थाई निवास बना लिया था और पूरा बंगाल नाप कर भाजपा के लिए मैदानी काम किया था। गृह मंत्री अमित शाह तक ने विजयवर्गीय के प्रयासों की तारीफ की थी। उस दौरान टीएमसी समर्थकों ने कैलाश विजयवर्गीय पर कुछ जगह सुनियोजित हमले भी किए थे। तब तृणमूल कांग्रेस के नेता भी विजयवर्गीय के इलेक्शन मैनेजमेंट से परेशान नजर आए थे। इस बार कैलाश विजयवर्गीय के बंगाल प्रचार में न जाने का खुलासा भी खुद ही किया। उन्होंने बताया संगठन नहीं चाहता था मैं वहां जाऊं। ममता सरकार ने पिछले चुनाव के समय उन पर 38 फर्जी मुकदमे लाद दिए थे। कई सारे गिरफ्तारी वारंट उनके खिलाफ निकले हुए हैं। ऐसे में उनके वहां जाने से नया बखेड़ा खड़ा हो जाता। इसलिए उन्हें बंगाल के समर से अलग ही रखा गया।
किसानों के मसले पर नाराज शिवराज
इन दिनों किसानों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान खासे सचेत हैं और अफसर उनके निशाने पर हैं। शिवराज सिंह ने अफसरों की क्लास लगाते हुए साफ कहा किसानों के मसले पर लकीर के फकीर न बनें। उन्होंने देखा मध्यप्रदेश में कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी किसानों को बेवजह परेशान कर रहे हैं। ऐसे में शिवराज दो टूक समझा रहे हैं- 'नियम के लिए किसान नहीं है, किसान के लिए नियम है, गड़बड़ न हो।' बताते हैं शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी कहा है कि एक ही नियम के पालन में एक अधिकारी की दृष्टि अलग और दूसरे की अलग रहती है। इसलिए मानवीय दृष्टि और संवेदनाओं से नियमों का पालन हो। मुख्यमंत्री मोहन यादव किसानों के व्यापक हितों के लिए काम कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने अफसरों से साफ कहा है किसान को कोई समस्या नहीं आनी चाहिए ।
सपना रह गई कलेक्टरी
नए-नए और कई युवा इन दिनों कलेक्टर (जिलाधीश) बन रहे हैं। ऐसे में दो दर्जन से ज्यादा ऐसे आईएएस भी हैं जो कलेक्टरी का सपना लेकर मंत्रालय में यहां-वहां बैठ कर बुढ़ा रहे हैं। कलेक्टरी इनके लिए अब किसी सपने से कम नहीं है। 2008 के बाद से तीन मुख्यमंत्री बदल गए लेकिन इन आईएएस अफसरों की किस्मत नहीं बदली। इनमें भी प्रमोटी आईएएस तो अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। फिल्ड का जबरदस्त ज्ञान और भरपूर प्रशासनिक क्षमताएं होने के बाद भी ऐसा लगता है किस्मत इनके साथ नहीं है। इस साल 31 दिसंबर से इन अधिकारियों की विदाई बेला भी आ रही है।