मध्यप्रदेश की सियासत में हलचल तेज। सीएम मोहन यादव का वायरल वीडियो, मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा और दिग्विजय सिंह की अयोध्या यात्रा पर सियासी नजरें।
अनुराग उपाध्याय
मोहन की तलवारबाजी सबसे ज्यादा वायरल
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का तलवारबाजी का वीडियो सबसे अधिक वायरल हुआ है। इससे पहले ऐसे ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गाना गाने के वीडियो वायरल होते रहे हैं। पहलवानी और अखाड़ेबाजी के मामले में वैसे डॉक्टर साहब का कोई मुकाबला नहीं है। उज्जैन में अब भी लोग इसी वजह से उन्हें मोहन पेलवान' ही कहते हैं। हालाँकि इस विषय पर मुख्यमंत्री यादव से कुछ पूछो तो वे बड़े झेंपते हुए बताते हैं कि उज्जैन में महाकाल की शरण में अखाड़ेबाजी की परम्परा है तो हम भी हाथ आजम लेते थे। मुख्यमंत्री यादव तलवार और लठ्ठ चलाने के साथ अखाड़े के दांव पेच में भी सिद्धहस्त हैं। वैसे अखाड़े की पहलवानी का उनका कोई वीडियो अब तक सामने नहीं आया। फिलहाल तो राजनैतिक अखाड़े में उनकी कुशलता को देख पक्ष और विपक्ष सभी हैरान परेशान हैं।
मंत्राणी का क्या होगा ?
एक मंत्राणी बड़ी दुखी चल रही हैं। उनको सरकार ने उसी भाषा में समझा दिया है। जिसमें समझने की वे अभ्यस्त हैं। अब मंत्राणी सरकार की शिकायत अपने साथियों से कर रही हैं कि सरकार कुछ तो भी कर रहे हैं। हुआ यूँ मंत्राणी ने तैश तैश में सिस्टम को चुनौती दे डाली। सिस्टम ने बात ऊपर तक पहुंचा दी और बात का बतंगड़ बन गया। मंत्राणी ने सब कुछ ठीक करने के लिए कह दिया कि मैं तो मजाक कर रही थी। लेकिन उनके इस मजाक को भाजपा ने भी गंभीरता से लिया है। मंत्राणी के रिश्ते नातेदारों के कारनामों से सरकार पहले भी नाखुश रही है। अब मंत्राणी के बंगले में बैठे लोग ही कह रहे हैं मैडम ऐसी ऐसी गलतियां कर चुकी हैं कि इस बार तो भगवान् भी बचाने से रहे। माना जा रहा है भविष्य में मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल में फेरबदल होने जा रहा है उसमें मंत्राणी को मंत्रिमंडल से बाहर किया जाना है।
राम मंदिर और दिग्विजय
अरे, सनातनी दिग्गीराजा अयोध्या धाम पहुंचकर रामलला की शरण में हो ही आये। दिग्विजय सिंह इस मामले पर हमेशा से संदिग्ध रहे हैं। एक दौर में वे कहते थे मंदिर वहीं बनाएंगे, लेकिन तारीख नहीं बताएँगे ? उन्होंने मंदिर के लिए चंदे पर सवाल भी उठाये लेकिन मंदिर के लिए चन्दा भी दिया। अब कांग्रेस के बड़े नेता अयोध्या से कन्नी काट रहे हैं, ऐसे में दिग्विजय सिंह रामलला के दर्शन पा कर धन्य हो गए हैं। दिग्विजय सिंह हर कदम सोच समझ के रखते हैं। इसलिए उनकी अयोध्या यात्रा को सहज नहीं माना जा सकता। एक बड़ा सवाल यह भी है क्या राज्यसभा छोडने के बाद दिग्विजय सिंह कांग्रेस में सनातन के झंडा बरदार बनने जा रहे हैं या अयोध्या से उनकी राह वाकई बदलने वाली है। फिलहाल तो सभी बड़े कांग्रेसी दिग्विजय सिंह पर दूरबीन से नजर रखे हुए हैं।
संस्कृति में राग डेपुटेशन की चर्चा
संस्कृति के गलियारों में इन दिनों एक अलग ही 'राग' सुनाई दे रहा हैं - डेपुटेशन राग। चर्चा है कि एक साहब जल-भूमि वाले अपने पुराने ठिकाने से निकलकर संस्कृति के आंगन में आए, फिर लोक कला की चौखट छूते हुए आखिरकार संगीत की महफिल में जम गए। अब हाल यह है कि 'वापसी' का सुर छेड़ा जा रहा है, मगर कलाकार मंच छोड़ने को तैयार नहीं। कहने को तो आदेश साफ हैं, जहां से आए थे, वहीं लौटिए। मगर यहां तो फाइलों की चाल धीमी और मन की चाह तेज़ है। अटैचमेंट की ऐसी जुगलबंदी बनी कि नियम भी ताली बजाते रह गए और कुर्सी ने अपनापन दिखा दिया। सूत्रों की मानें तो यहां काम से ज्यादा 'ठिकाना' मायने रखता है। एक बार जो सुर जम गया, वह बदलना आसान नहीं। अब देखना है कि आदेश की तान ऊंची पड़ती है या डेपुटेशन का राग ही अंत तक गूंजता रहता है।
जमीन के धंधे में अफसर
भोपाल और इंदौर के बीच मुख्य मार्ग और प्रस्तावित नए मार्ग के बीच कौन कौन बड़े अफसर जमीन के सौदे कर रहे हैं। अब इस पर खुफिया विभाग ने अपनी नजरें गड़ा रखी हैं। केंद्र का खुफिया तंत्र इस मसले पर एलर्ट है। यह बात ऊपर तक पहुंची कि पेशेवर जमीनों के दलाल किसानों से सीधे सीधे खेत खरीदने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं और मुँह मांगी कीमत पर सौदे करवाना चाहते हैं। बताते हैं सामने तो ये दलाल हैं लेकिन इनके पीछे इस खेल में माहिर अफसरों का झुण्ड है। जमीन के धंधे में एमपी के अफसरों की छवि पहले भी बहुत अच्छी नहीं रही है। केंद्र को लग रहा है यहाँ भी अफसर अपने डमी खड़े कर कोई बड़ा गेम कर रहे हैं।
ईरानी भाईजान और छुटभैये नेता
भोपाल के ईरानी डेरे में सभी 'भाईजान टाइप' के लोग रहते हैं। इनमें से तमाम ईरानियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। कई तो देशभर में अपराध कर भोपाल में छुपे रहते हैं। अगर गलती से पुलिस डेरे में आ जाए तो महिलाएं और बच्चे पुलिस से भिड़ते हैं और अपराधी डेरे से फरार हो लेते थे। लेकिन इस बार ईरानी डेरे पर पुलिस ने इनके इस चक्रव्यूह को तोड़ा और अपराधी ईरानियों को उनकी सही जगह सलाखों के पीछे पहुँचाया। अब पता चला है पुलिस की ही एक टीम चुपचाप इस बात का पता लगा रही है कि कौन से' बड़े भोपाली' इन लोगों के मददगार बने हुए थे और हैं। पुलिस सब की कुंडली खंगाल रही है। पता चाला है दोनों ही राजनैतिक दलों के कुछ' छुटभैये नेता' इन ईरानियों के लिए ढाल बने हुए थे।