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Middle East War: Oil Crisis, India’s Key Role

तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर दुनिया

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध से वैश्विक संकट गहरा। तेल 115 डॉलर पार, सप्लाई प्रभावित। भारत की कूटनीतिक भूमिका और पीएम मोदी की पहल पर दुनिया की नजर।


तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर दुनिया

28 पश्चिम एशिया को एक ऐसे फरवरी 2026 की सुबह ने संकट में धकेल दिया। जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य ढांचे को हिलाकर रख दिया है। तेहरान की सड़कों पर उठता धुआं, सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद उपजी अस्थिरता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्धपोतों की तैनाती, ये सब इस बात का संकेत है कि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ी है। इस युद्ध की वजह से कई देशों में डीजल, पेट्रोल, गैस का संकट उत्पन्न हो गया है। 

हालांकि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बात मान ली है और ये ऐलान कर दिया है कि इजराइल अब ईरान के गैस और तेल ठिकानों पर बमबारी नहीं करेगा लेकिन गैस और तेल अमेरिका की कमजोर नस है। इसलिए ईरान खाड़ी देशों सऊदी अरब, अमीरात और कुवैत की रिफायनरी पर लगातार हमले कर रहा है। इन हमलों से जो नुकसान हुआ है। उसे दुरुस्त करने में कम से कम आठ महीने लगेंगे। इसीलिए तेल और गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। 

तेल और गैस ठिकानों पर हुए हमलों से खाड़ी के देशों व को गहरी चोट पहुंची है। ईरान ने पिछले तीन हफ्तों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल गैस से भरे एक दर्जन से ज्यादा जहाजों ने पर हमले किए हैं। रविवार को ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिका का एफ-15 फाइटर जेट मार गिराने का दावा किया है। इसलिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इलाका ट्रंप के गले की हड्डी बन गया है। पूरी दुनिया से अकेले लड़ने की ताकत रखने वाले डॉनाल्ड ट्रंप को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट ने दूसरे देशों से मदद मांगने पर मजबूर कर दिया है। वैश्विक संकट की इस घड़ी में जब संयुक्त राष्ट्र बेअसर नजर आ रहा है। 

महाशक्तियां एक-दूसरे के सामने खड़ी हैं और ज्यादातर देश अपना पक्ष चुन चुके हैं तब भारत की निष्पक्ष स्थिति और प्रधानमंत्री मोदी की 'संवाद ही समाधान' वाली अपील दुनिया के लिए अंतिम उम्मीद बन गई है। युद्ध के महज तीन हफ्तों में वैश्विक विशेषज्ञों ने खुलकर कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही इस संघर्ष को रोक सकते हैं। अमेरिकी कर्नल डॉगलस मैकग्रेगर, यूएई के पूर्व राजदूत हुसैन हसन मिर्जा, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध को रोकने के लिए एक मध्यस्थ चाहिए और वह आदर्श रूप से भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही हैं। मैकग्रेगर ने जोर दिया कि भारत की निष्पक्षता, पीएम मोदी की दोनों पक्षों तक व्यक्तिगत पहुंच और भारत की उभरती वैश्विक शक्ति इसे संभव बनाती है। 

चूंकि यह संघर्ष पिछले तीन हफ्तों में भयावह रूप ले चुका है। इस वजह से वैश्विक तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं। जिससे दुनिया भर में महंगाई का संकट पैदा हो गया है। इस संवेदनशील घड़ी में प्रधानमंत्री मोदी ने जो सक्रियता दिखाई। उसने दुनिया को अचंभित कर दिया। युद्ध शुरू होने के महज 48 घंटों के भीतर दो मार्च को उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। इसके बाद 12 मार्च को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से सीधा संवाद किया। हर बातचीत में एक ही संदेश था- सैन्य संघर्ष हल नहीं, संवाद और कूटनीति ही रास्ता है। 

मोदी ने नागरिक सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और क्षेत्रीय शांति पर जोर दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला, कतर के अमीर, कुवैत के क्राउन प्रिंस, ओमान के सुल्तान, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से भी बात की। यह फोन डिप्लोमेसी भारत की सक्रिय शांति कूटनीति का प्रमाण है। जब दुनिया में युद्ध छिड़ा हो तो कोई भी देश उसके प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता। भारत पर भी इसका असर हो सकता है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी असाधारण योग्यता और दूरदर्शिता के बल पर अब तक देश को इस संकट की आंच से बचाए कर रखा है।

 

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