बोमेन ईरानी के नाम से तो सभी परिचित हैं और लोग उन्हें एक अच्छा कलाकार मानते हैं। मगर यह भी बात सच है कि ऐसा नहीं होता कि जिसका नाम बड़ा हो, उसका चरित्र भी विशाल हो। चरित्र से अर्थ एक व्यापक चरित्र से है, कि आपदा में आप कैसा अपना आचरण रखते हैं। बोमेन ईरानी ने भी अमेरिका और ईरान के युद्ध को लेकर बहुत ही अजीब टिप्पणी की है।
उन्होनें इंस्टाग्राम पर अपनी प्रोफ़ाइल पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प का मजाक उड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं और कह रहे हैं कि ट्रम्प ईरानियों से बात करना चाहते हैं। और तीन लोगों को चुना है। स्मृति ईरानी, अरुणा ईरानी और बोमेन ईरानी के साथ बात होनी है। मगर मेरी एक प्रॉबलम है कि मैं वाशिंगटन नहीं जाऊंगा। और फिर उन्होनें सिलेंडर को लेकर भी टिप्पणी की कि ट्रम्प को बात करने के लिए यहीं आना होगा और एक सिलेंडर लाना होगा।“
इस पोस्ट पर हालांकि अधिकांश टिप्पणियाँ मजाक में है, परंतु एक टिप्पणी मँदाना करीमी की भी है। मँदाना करीमी बिगबॉस 9 में नजर आ चुकी हैं। और वे ईरानी अभिनेत्री और मॉडल हैं। उन्होनें बोमेन ईरानी के इस मजाक पर जबाव लिखा कि बोमन ईरानी सर, आचानक से आपको ईरान के बारे में बहुत कुछ कहना है।
उन्होनें लिखा कि काफी दिलचस्प बात है। सालों से, ईरानियों को गिरफ़्तार किया जा रहा है, उन्हें फाँसी दी जा रही है, और उनकी आवाज़ दबाई जा रही है। हज़ारों लोग मारे गए। परिवार बिखर गए। और मेरे जैसे लोग हमने यह सब जिया है। हमने इसके बारे में बात की है।
उसके बाद वे लिखती हैं कि "लेकिन अब... एक वीडियो है। अब चिंता है। अब गैस के बारे में, ट्रंप के बारे में, और 'मेरे घर आओ' के बारे में मज़ाक-मस्ती हो रही है। सर, पूरे आदर के साथ कह रही हूँ कि, आप और पारसी समुदाय ईरान से ही आए हैं। आप उस इतिहास को अपने साथ रखते हैं। उस आग को। तो जब ईरानी मर रहे थे, तब यह आवाज़ कहाँ थी? और अब अचानक, सिर्फ़ इसलिए कि इसका असर गैस, राजनीति और वैश्विक बातचीत पर पड़ रहा है तो अब इस पर टीका-टिप्पणी हो रही है? मेरा मतलब है... सच में, ज़ोरदार तालियाँ। चुप्पी से लेकर व्यंग्य तक यह तो बहुत तेज़ी से हुआ। खैर... बस एक छोटी सी बात कही है।"
यह भी सच ही बात है कि पारसी समुदाय ने भी ईरान की उन लड़कियों के पक्ष में खड़ा होने का साहस नहीं किया है, जिन्होनें ईरान के इस्लामी शासन के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई। जिन लड़कियों को केवल इसलिए मार डाला गया कि उन्होनें अनिवार्य हिजाब नहीं पहना था, उन्के लिए भारत में पारसी समुदाय से कोई भी आवाज नहीं उठी, जबकि उथनी चाहिए थी। वैसे तो पूरे बॉलीवुड की तरफ से ही ईरान की उन लड़कियों के लिए आवाज नहीं उठी है, जिन्होनें केवल अपने बाल खुले रखने की आजादी के लिए अपनी जान दे दी और किसी और के हाथों नहीं बल्कि अपनी ही सरकार के हाथों।
अभी मँदाना के इस जबाव पर बोमेन ईरानी का जबाव नहीं आया है।