ईरान और अमेरिका के बीच इन दिनों युद्ध विराम चल रहा है। हालांकि इस युद्ध विराम को लेकर भारत में ही एक बहुत बड़े वर्ग का यह कहना था कि यह ईरान की विजय है, परंतु ईरान में विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों का यह कहना था कि युद्ध के बाद सरकार क दमनचक्र बहुत तेजी से घूमेगा और यह उनपर कहर बनकर टूटेगा। और उनका डर अब सही साबित हो रहा है।
जो भी मीडिया रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, वे डराने वाली हैं। अब ईरान की महिलाएं वह बता रही हैं, जो किसी की भी आत्मा को झकझोर देने वाला है। ईरान की महिलाएं अब बता रही हैं कि कैसे उनके साथ अब डिटेन्शन सेंटर्स में यौन शोषण हो रहा है।
themedialine.org की रिपोर्ट के अनुसार ईरान में महिलाओं को सिक्युरिटी एजेंट्स शिकार बना रहे हैं। मगर यह दमनचक्र केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है। इनमें वे पुरुष भी हैं जो सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
मीडिया लाइन से बात करते हुए एक युवती ने बताया कि उसका यौन उत्पीड़न पूछताछ के दौरान हुआ और भारी-भरकम कद-काठी वाले अधिकारियों ने इस दुर्व्यवहार को अंजाम देने के लिए लाठियों का इस्तेमाल किया। हाल ही में डिटेन्शन सेंटर से रिहा हुई कामेलिया ने भी मीडिया लाइन से बात करते हुए कहा कि उसका यौन शोषण भी उसके साथी के सामने मुखौटा पहने हुए हथियारों से लैस आदमियों ने उसके घर पर किया। और उसके बार-बार विरोध करने के बाद भी उसे लगातार मारा गया और उसके साथ बलात्कार किया तो वहीं उसके साथी को भी पीटा गया।
कमेलिया के अनुसार उसे पहले दो हफ्तों तक एक 20 वर्ग मीटर के कमरे में आठ और महिलाओं के साथ रखा गया था। उसमें एक 16 वर्षीय लड़की भी थी, जिसके चेहरे पर सुरक्षा बलों द्वारा मारी गई पैलेट गोली अभी तक धँसी थी। उसे इसी हालत में गिरफ्तार कर लिया गया था और उसके घावों पर केवल पट्टी बांधी हुई थी।
उसके बाद कमेलिया को एक अकेले कमरे में भेजा गया और उससे फिर एक आदमी और एक महिला अधिकारी ने पूछताछ की और उसे तवायफ़ और जासूस की गाली दी गई। उन्होनें उस पर जबरन दबाव डाला कि वह विपक्षी समूहों से संबंध स्वीकारे और यह भी स्वीकारे कि उसने प्रदर्शनों को आयोजित किया था।
जब उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया, तो उस पर कई हट्टे कट्टे अधिकारियों ने हमला किया और उसके कपड़े फाड़े और उसके साथ एक मोटी लाठी के साथ बलात्कार किया। उसके शरीर को मारा पेटा और उसे सामूहिक बलात्कार की भी धमकी दी। द मीडिया लाइन की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली और डराने वाली है, जो कई प्रश्न उठाती है और साथ ही ईरान की महिलाओं की अदम्य इच्छा शक्ति की कहानी भी बताती है, जिन्होनें कट्टरता के सामने झुकने से इनकार कर दिया है।

लेखिका - सोनाली मिश्रा