ईरान इन दिनों चर्चा में है और वह युद्ध को लेकर चर्चा में है। भारत में भी काफी बड़ा वर्ग ईरान के साथ है और समर्थन में है। मगर ईरान से ही ऐसा समाचार आया है, जो हर किसी को दहला कर रख देगा। दुर्भाग्य की बात यही है कि भारत में ईरान के पक्ष में प्रदर्शन करने वाले वर्ग के लिए यह समाचार कोई समाचार होगा ही नहीं। यह समाचार है जनवरी 2026 में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर है।
ईरान में जनवरी 2026 में ईरान के तानाशाह शासन के खिलाफ उसके अपने ही लोगों ने प्रदर्शन किया था। किसी भी लोकतंत्र में यह आजादी आम लोगों को होती है कि वे सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर सकें। मगर ईरान की सरकार के साथ ऐसा नहीं है। वहाँ पर आप सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का साहस कर ही नहीं सकते हैं। अब जिस समय ईरान एक जंग में है और बार-बार यह कह रहा है कि उसके साथ गलत हो रहा है और उसके नेता मारे जा रहे हैं, मगर उसी समय वह अपने ही देश में अपने ही लोगों पर ज़ुल्म कर रहा है।
अब वह अपने ही उन लोगों को चुन-चुन कर मार रहा है, जिन्होनें उसके खिलाफ खड़े होने का दुस्साहस किया था। उसने अपने ही देश के युवाओं को फांसी पर लटकाना एक बार फिर से शुरू कर दिया है। मानवाधिकार के लिए काम करने वाले समूहों ने कहा कि ईरान ने तीन युवाओं को फांसी पर लटका दिया है। ये तीन भी कोई ऐसे नहीं थे, जिन्होनें अपना जीवन जी लिया हो। ये तो अभी किशोर ही थे। france.24 पोर्टल के अनुसार, तेहरान के दक्षिण में स्थित क़ोम शहर में मेहदी ग़ासेमी, सालेह मोहम्मदी और सईद दाऊदी को फाँसी दे दी गई। इन तीनों को अल्लाह के खिलाफ युद्ध छेड़ने के गंभीर अपराध का दोषी ठहराया गया था, जिसे ईरान के शरिया कानून के तहत 'मोहारेबेह' के नाम से जाना जाता है।
इन किशोरों पर आरोप था कि उन्होनें इजरायल और अमेरिका को मदद पहुंचाई थी और साथ ही वे दो पुलिसवालों की हत्या में शामिल थे। सालेह मोहम्मद तो देश का उभरता कुश्ती का खिलाड़ी था। वह कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भाग ले चुका था। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार उसे अपने बचाव का मौका नहीं दिया गया और उससे जबरन कूबूलनामे पर दस्तखत लिए गए थे। वहीं लोगों को अब यह डर है कि ईरान अमेरिका के साथ युद्ध के बाद व्यापक स्तर पर लोगों का कत्ले आम करेगा। ईरान मानवाधिकार के अनुसार युद्ध की आड़ में असंख्य लोगों का कत्लेआम सरकार द्वारा किये जाने की आशंका है। ईरान की निर्वासित महिला कार्यकर्ता मसीह आलिनेजाद ने एक्स पर पोस्ट लिखा कि ईरान में युद्ध के मध्य ही शासन ने 19 वर्षीय राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन को जनवरी के आंदोलन में शामिल होने के आरोप में फांसी पर लटका दिया।
उन्होनें भी यही कहा कि जबरन कूबूलनामे लिए जा रहे हैं और लोगों पर असंख्य अत्याचार किये जा रहे हैं, उन्हें उनके वकील नहीं दिए जा रहे हैं। एक और वीडियो सामने आया है जिसमें यह कहा जा रहा है कि तेहरान में घायल प्रदर्शनकारियों का इलजा करने के अपराध में दो नर्सों को गिरफ्तार किया गया और उनके साथ जेल में यौन शोषण किया गया। ईरान के साथ जो गलत हो रहा है, उसका विरोध होना चाहिए, मगर वह विरोध प्रदर्शन दबाने के लिए अपने ही नागरिकों के साथ जो कर रहा है, उसके विषय में भी लिखा जाना चाहिए।
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लेखिका- सोनाली मिश्रा