Breaking News
  • छत्तीसगढ़ के सुकमा में 5 लाख रुपए का इनामी नक्सली मारा गया
  • गुजरात के अमरेली में 3.1 मैग्नीट्यूड का भूकंप, 6 दिनों में दूसरा झटका
  • केंद्र सरकार का फैसला: पेट्रोल पम्प पर भी केरोसिन मिलेगा, हर जिले में 2 पम्प पर सुविधा
  • एमपी के 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्त
  • झांसी में कस्टडी से भागे बदमाश का एनकाउंटर, पैर में लगी गोली
  • सुल्तानपुर में वर्दी पहनते समय थाने में इंस्पेक्टर को लगी गोली, लखनऊ रेफर

होम > विशेष

Healthcare Funds: Safe Bet in Market Volatility?

जब सताए मंदी का डर, तब फार्मा फंड बेहतर

मंदी और बाजार गिरावट के दौर में हेल्थकेयर सेक्टर क्यों बन रहा है सुरक्षित निवेश विकल्प? जानें हेल्थकेयर म्यूचुअल फंड्स, फायदे और जोखिम।


जब सताए मंदी का डर तब फार्मा फंड बेहतर

ज्ञानेश पाठक

जब दुनिया में उथल-पुथल बढ़ती है फिर चाहे वो जंग हो, खाड़ी का युद्ध हो या अमेरिका या किसी भी देश का टैरिफ हो या फिर वैश्विक मंदी का डर। निवेशक सबसे पहले एक ही सवाल पूछते हैं कि पैसा कहां सुरक्षित रखा जाए? इस सवाल का जवाब समय के साथ बदलता रहा है। है। कभी एफएमसीजी को सबसे सुरक्षित ति माना म जाता था। लेकिन अब धीरे-धीरे यह जगह हेल्थकेयर सेक्टर, खासकर अस्पताल और पूरे हेल्थकेयर इकोसिस्टम ने ले ली है। इसलिए हम आपको यहां हेल्थकेयर सेक्टर से जुड़े म्यूचुअल फंड के बारे में बताएंगे। सेक्टर के बारे में समझाएंगे और जुड़े जोखिम भी बताएंगे ताकि आप उसे अपनी प्रोफाइल से जोड़ कर फैसला ले सकें।

देखिए कार खरीदना टाला जा सकता है। लग्जरी खर्च बाद में किया जा सकता है। लेकिन डायबिटीज की दवा, कैंसर का इलाज या इमरजेंसी सर्जरी, इन्हें टाला नहीं जा सकता है, ना रोका जा सकता है. यही वजह है कि हेल्थकेयर सेक्टर की मांग आर्थिक हालात से ज्यादा प्रभावित नहीं होती।

अगर आप बाजार का व्यवहार देखें, तो आईटी और ऑटो जैसे सेक्टर भू-राजनीतिक ज्ञानेश पाठक तनाव या आर्थिक कमजोरी में तेजी से गिरते हैं, क्योंकि इनके प्रोडक्ट्स पर खर्च टाला जा सकता है. लेकिन अस्पतालों में मरीज आना नहीं रुकता. इसलिए इनका नगदी प्रवाह स्थिर रहता है। इसका पहला बड़ा सबूत है प्राइवेट इक्विटी का बढ़ता भरोसा. अस्पताल सेक्टर में लगातार निवेश आ रहा है. कई अस्पताल कंपनियों के आईपीओ सफल रहे हैं, जिससे और पैसा इस सेक्टर में आया है। दूसरा सबूत शेयर बाजार का प्रदर्शन है. पिछले डेढ़ साल की कमजोरी में भी स्वास्थ्य से जुड़ी कंपनियों ने या तो नुकसान से बचाव किया या कई मामलों में बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया

हेल्थकेयर की मजबूती सिर्फ मांग तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई लंबे समय तक चलने वाले ट्रिगर हैं.

  1. पहला, बीमा का विस्तार. आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं और निजी स्वास्थ्य बीमा का बढ़ता इस्तेमाल इलाज के खर्च करने के तरीके को बदल रहा है. इससे अस्पतालों की प्रति बेड भराव और प्रति बेड कमाई दोनों बढ़ रही है.
  2. दूसरा, बीमारियों का बदलता स्वरूप. भारत में उम्र बढ़ रही है और इसके साथ मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही है. ये बीमारियां लंबे इलाज और हाई-वैल्यू ट्रीटमेट मांगती है, जिससे अस्पतालों की कमाई मजबूत होती है।
  3. तीसरा, मेडिकल टूरिज्म. भारत में इलाज की लागत पश्चिमी देशों से अभी भी 60 से 80 प्रतिशत कम है, इसलिए विदेशी मरीज लगातार आते हैं, चाहे वैश्विक माहौल कैसा भी हो।
  4. चौथा, ऑपरेटिंग लीवरेज. अस्पताल सेक्टर अब उस चरण में है जहां बड़े निवेश पहले हो चुके हैं. अब हर नया मरीज ज्यादा मार्जिन जोड़ता है, जिससे मुनाफा तेजी से बढ़ सकता है। एक और बड़ा फायदा यह है कि यह सेक्टर पूरी तरह घरेलू है. ग्लोबल टैरिफ, ट्रेड वॉर या अंतरराष्ट्रीय राजनीति का इस पर सीधा असर नहीं पड़ता।

वैश्विक माहौल कैसा भी हो।

चौथा, ऑपरेटिंग लीवरेज. अस्पताल सेक्टर अब उस चरण में है जहां बड़े निवेश पहले हो चुके हैं. अब हर नया मरीज ज्यादा मार्जिन जोड़ता है, जिससे मुनाफा तेजी से बढ़ सकता है। एक और बड़ा फायदा यह है कि यह सेक्टर पूरी तरह घरेलू है. ग्लोबल टैरिफ, ट्रेड वॉर या अंतरराष्ट्रीय राजनीति का इस पर सीधा असर नहीं पड़ता।

हेल्थकेयर में निवेश

अगर आपके लिए सीधे शेयर चुनना आसान नहीं है तो ऐसे में हेल्थकेयर म्यूचुअल फंड एक तरीका है. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. यह सेक्टोरल फंड होते हैं, यानी पूरा पैसा एक ही सेक्टर में लगता है. इसलिए इनमें एक अलग तरह का जोखिम होता है जो काफी बड़ा है।

हेल्थकेयर फंड

LIC MF Healthcare Fund

यह आकार में छोटा फंड है, लेकिन फार्मा, अस्पताल और स्पेशलाइज्ड हेल्थकेयर कंपनियों में निवेश करता है। अपोलो हॉस्पिटल और फोर्टिस जैसे अस्पताल शेयर इसके पोर्टफोलियो में प्रमुख हैं। छोटा आकार इसे फ्लेक्सिबिलिटी देता है, लेकिन यही इसकी कमजोरी भी है. एयूएम फिलहाल 82 करोड़ रुपये पर है और एक्सपेंस रेश्यो 0.64 प्रतिशत तक जा सकता है. इसका प्रदर्शन भी बड़े फंड्स के मुकाबले ज्यादा अस्थिर रहा है. इसमें कम से कम 200 रुपये से एसआईपी शुरू की जा सकती है।

आदित्य बिरला सन लाइफ फार्मा एण्ड हेल्थकेयर फंड

यह फंड ग्रोथ संबंधित नजरिया अपनाता है. इसमें बड़े फार्मा शेयरों के साथ मिडकैप शेयर भी शामिल है. कम अवधि में प्रदर्शन सामान्य रहा है, लेकिन 3 से 5 साल में इसने डबल डिजिट रिटर्न दिए हैं. अपोलो हॉस्पिटल और फोर्टिस हेल्थकेयर, थायरोकेयर और विजया डायगोनिस्ट जैसे शेयर इसमें शामिल हैं. हालांकि यह भी सेक्टोरल फंड है और इसमें मिड/स्मॉल कैप एक्सपोजर ज्यादा होने से उतार चढ़ाव बढ़ सकता है. इसका एयूएम 854 करोड़ है और एक्सपेंस रेश्यो 1.02 फीसदी है. इसमें कम से कम 100 रुपये से एसआईपी शुरू कर सकते हैं।

एसबीआई हेल्थकेयर अपोर्चुनिटीज फंड

यह भारत के सबसे पुराने और स्थापित हेल्थकेयर फंड्स में से एक है, इसमें फार्मा, अस्पताल और डायग्नोस्टिक्स, तीनों का एक्सपोजर मिलता है. यह फंड बड़े फार्मा शेयरों से स्थिरता और मिडकैप से ग्रोथ का संतुलन बनाता है, जिससे उतार चढ़ाव बाकियों के मुकाबले थोड़ी कम रहता है. इसके पोर्टफोलियो में अस्पताल सेक्टर का मजबूत एक्सपोजर है. अपोलो अस्पताल एस्टर डीएम हेल्थकेयर फोर्टिस और जुपीटर लाइफ लाइन जैसे नाम शामिल हैं।

हालांकि यह सेक्टोरल फंड है, इसलिए अगर हेल्थकेयर सेक्टर कमजोर रहता है, तो यह अंडरपरफॉर्म कर सकता है. इसका एयूएम 4,076 करोड़ है और एक्सपेंस रेश्यो 0.92 प्रतिशत है. इसमें कम से कम 500 रुपये से एसआईपी शुरू की जा सकती है। बता दें कि तीनों ने निफ्टी हेल्थकेयर टीआरआई के आसपास या उससे बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन जोखिम भी समान रूप से मौजूद है।

निवेश से पहले क्या समझें ?

हेल्थकेयर फंड्स को लेकर बहुत ज्यादा धैर्य रखना होता है. इनकी असली ताकत लंबे समय के निवेश में है। जैसे बढ़ता हेल्थ खर्च और बेहतर मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्कर। इसके अलावा ये सेक्टोरल फंड है. अगर पूरे सेक्टर पर कोई बड़ा खतरा आता है तो आपका फंड भी नीचे जाएगा। जैसे आज आईटी के साथ हो रहा है. जब आईटी गिर रहा है तो इससे जुड़े सेक्टोरल फंड भी गिरे हैं. इसके अलावा इसमें तुरंत उछाल आएगी ये ऐसा सेक्टर नहीं है. यहां समय से ज्यादा जरूरी है टिके रहना। एक चेतावनी भी है। इस सेक्टर पर ग्लोबल रेगुलेशन, कीमत और पॉलिसी का असर पड़ सकता है. इसलिए इसमें ज्यादा निवेश जोखिम को बढ़ा सकता है. हेल्थकेयर सेक्टर आज के समय में सबसे मजबूत डिफेंसिव थीम बनकर उभरा है. इसमें स्थिरता भी है और धीरे-धीरे ग्रोथ की संभावना भी. लेकिन हेल्थकेयर म्यूचुअल फंड्स को मुख्य निवेश नहीं बनाना चाहिए. इन्हें एक छोटे हिस्से के रूप में, सोच-समझकर और लंबे समय के लिए रखना ज्यादा सही रणनीति होती है।

 

Related to this topic: