Breaking News
  • मध्य प्रदेश में 5वीं का रिजल्ट 95%, 8वीं का 94% रह, :टॉप टेन जिलों में नरसिंहपुर नंबर वन
  • 48 साल बाद जगन्नाथ मंदिर के रत्नों की गिनती शुरू: जेमोलॉजिस्ट, बैंक अफसर मौजूद रहे
  • केंद्र से UDAN 2.0 योजना को मंजूरी, 100 एयरपोर्ट बनेंगे
  • 28 मार्च से IPL का सबसे बड़ा सीजन: 84 मैच खेले जाएंगे, हर टीम 16 मुकाबले खेलेगी
  • देश में पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं:कीमतों में भी कोई बढ़ोतरी नहीं हुई- सरकार
  • ईरान का दावा अमेरिकी जंगी जहाज अब्राहम लिंकन पर मिसाइल दागी, इलाका छोड़कर भागा

होम > विशेष

US-Iran War Impact: Global Crisis Deepens

दुनिया पर भारी पड़ता जंग का जुनून

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध से वैश्विक संकट गहरा रहा है। ऊर्जा संकट, बढ़ती कीमतें और आर्थिक मंदी की आशंका ने दुनिया की चिंता बढ़ाई।


दुनिया पर भारी पड़ता जंग का जुनून

राज कुमार सिंह

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का यह चौथा सप्ताह है, लेकिन शांति की कोशिशों के बजाय उसे भड़काने का जुनून ही सिर चढ़ कर बोल रहा है। जंग के पक्ष और सफलता को लेकर इन देशों के अपने-अपने तर्क और दावे हो सकते हैं, पर हकीकत डरावनी होती जा रही है। इस बीच अफवाह युद्ध भी जारी है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के मर जाने या घायल होने का दावा अमेरिका और इजराइल कर रहे हैं तो जवाब में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत का दावा किया जा रहा है। 

सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत ईरान के चार दजर्न शीर्ष नेताओं को अब तक मारने में सफलता के बावजूद वहां कठपुतली सरकार बनाने का अमेरिका-इजराइल का सपना अधूरा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की इच्छा के विपरीत ईरान ने खामेनेई के बेटे मोजतबा को ही अपना नया सर्वोच्च नेता चुना। मोजतबा ने युद्ध विराम से इनकार करते हुए साफ कर दिया है कि ईरानियों के खून का बदला लिया जाएगा और खाड़ी देशों से अमेरिकी सैन्य अड्डे नहीं हटे तो उन पर भी हमले जारी रहेंगे। ईरान को चंद दिनों में घुटनों पर ला देने का दम भरने वाले अमेरिका-इजराइल अब जंग खत्म होने तथा उसमें हो रही जन-धन हानि के सवालों से मुंह चुराने लगे हैं।

अमेरिका अब कन्फ्यूज्ड ज्यादा नजर आ रहा है। कभी ट्रंप कहते हैं कि किसी देश की मदद नहीं चाहिए तो कभी गुहार लगाते हुए धमकाते हैं। अभी तक कह रहे थे कि स्ट्रेट ऑफ होमुंज बंद होने से अमेरिका को फर्क नहीं पड़ता तो अब कह 48 घंटे में ने खुलने पर भयावह परिणामों की धमकी दे रहे हैं। अपनी जवाबी कार्रवाई से चौंका रहे ईरान ने भी धमकी दे दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया तो वह भी अमेरिका के मित्र खाड़ी देशों ऊर्जा ही नहीं, पेयजल संयंत्रों को भी ठिकाना बनाएगा। ध्यान रहे कि इन देशों में उपलब्ध ज्यादातर जल खारा है, जिसे इन संयंत्रों में पीने योग्य बनाया जाता है। ईरान के नतांज परमाणु केंद्र को निशाना बनाया गया तो उसने भी इजराइल के डिमोना परमाणु केंद्र पर हमला करने में देर नहीं लगाई। विडंबना यह है कि जंग के इन जुनूनी बोलों के बीच शांति की समझदारी के सुर अभी तक कहीं से भी सुनाई नहीं पड़े हैं। 

याद रहे कि रूस और यूक्रेन युद्ध के सीमित दायरे के बावजूद युद्ध विराम की कोशिशें और दावे नजर आए थे। अनेक संघर्ष विराम का श्रेय लेते हुए अपने लिए शांति का नोबेल पुरस्कार मांगते रहे ट्रंप ने भी जल्द रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करवाने के दावे किए थे। उसी क्रम में उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की को अमेरिका बुला कर अपमानित किया तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी कई बार बात की, लेकिन बात बनी नहीं और युद्ध चार साल बाद भी जारी है, जिसमें लगभग 18 लाख सैनिक और नागरिक मारे जा चुके हैं। इक्कीसवीं शताब्दी में विश्व व्यवस्था की विद्रूपता देखिए कि खुद को शांतिदूत बताने वाले ट्रंप ने ही इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमले से खुद दुनिया को बड़ी जंग में धकेल दिया है। रूस और यूक्रेन की तरह इजराइल अमेरिका और ईरान के पास अपनी जंग को जायज ठहराने के तर्क हैं। इजराइल और ईरान अरसे से एक-दूसरे की आंखों में खटकते रहे हैं। 

अमेरिका भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम का हौव्वा दिखा कर दुनिया को डराता रहा है। परमाणु कार्यक्रम तथा हमास, हूती और हिज्बुल्लाह सरीखे आतंकी संगठनों को कथित ईरानी मदद के मुद्दे पर अमेरिका और ईरान में तीसरे देश में वार्ताएं भी चलीं। 26 फरवरी को जिनेवा में हुई वार्ता में ईरान परमाणु कार्यक्रम सीमित रखने पर राजी भी हो गया था, बशर्ते उसके विरुद्ध 1979 से लागू अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटा लिए जाएं, जिनके चलते उसकी अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है। आतंकी संगठनों को कथित मदद पर अगली वार्ता में बात आगे बढ़ पाती, उससे पहले ही इजराइल के साथ मिलकर अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला बोल दिया। अब जबकि ईरान ने मित्र देशों के अलावा सभी के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है, ट्रंप की मदद की गुहार उनके दोस्त देश भी नहीं सुन रहे। हाल के इतिहास में विश्व व्यवस्था में अमेरिका इतना अकेला कभी नहीं दिखा। बड़े सुरक्षा अधिकारी जो केंट द्वारा इस्तीफा देते हुए किए गए इस खुलासे ने भी ट्रंप को कठघरे में खड़ा कर दिया है कि अमेरिका को ईरान से कोई खतरा नहीं। 

खामेनेई शासन की कट्टर इस्लामी व्यवस्था के विरोध में ईरान में प्रदर्शन किसी से छिपे नहीं रहे। दमनचक्र के चलते हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। अमेरिका और इजराइल को लगा कि खामेनेई के खात्मे के साथ ही असंतोष और मुखर हो जाएगा, जिसका फायदा उठाते हुए ईरान में कठपुतली सरकार बनवा कर अकूत तेल और गैस संसाधनों पर कब्जा कर लिया जाएगा। खामेनेई के खात्मे के बाद ईरानियों से सड़कों पर निकल कर सत्ता पर कब्जा कर लेने का आव्हान भी किया गया, लेकिन विदेशी आक्रमण के चलते वह आंतरिक असंतोष भी बीते वक्त की बात लगता है। दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध झेलने के बावजूद आधुनिकतम हथियारों से लैस अमेरिका और इजराइल को ईरान जंग में जैसा जवाब दे रहा है, लगता नहीं कि युद्ध जल्द समाप्त होगा। अमेरिकी सैन्य अड्डे वाले खाड़ी देशों को निशाना बनाने के साथ ही अमेरिका और इजराइल पर भी ईरान सीधे हमले कर चौंका रहा है। 

स्ट्रेट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट कितना गहरा सकता है, इसका संकेत इसीसे मिल जाता है कि हाल तक भारत पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव बनाने वाला अमेरिका ही अब उस समेत तमाम देशों को रूस से कच्चा तेल खरीदने को कह रहा है। ईरान से तेल खरीद पर लगा प्रतिबंध भी कुछ समय के लिए हटा लिया गया है। तीन सप्ताह की जंग में ही कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आया उछाल बेहद मुश्किल वक्त की आहट ही है, लेकिन जंग के जुनून के बीच शायद कोई उसे सुनना नहीं चाहता। लंबी जंग से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाली मार आर्थिक मंदी का कारण भी बन सकती है। वैसे यह आपदा रूस और अमेरिका की तेल कंपनियों के लिए जबर्दस्त कमाई का अवसर बन गया है। पिछले महीने कच्चा तेल 52 डॉलर प्रति बैरल बेचने वाला रूस अब 100 डॉलर प्रति बैरल बेच रहा है। अंजाम तो समय बताएगा, लेकिन असर बता रहा है कि दुनिया का चौधरी बनने की सनक में ट्रंप ने दुनिया को ऐसी जंग में झोंक दिया है, जिससे निकलना तो मुश्किल होगा ही, उसके असर से बच पाना नामुमकिन होगा।



 

Related to this topic: