Breaking News
  • छत्तीसगढ़ के सुकमा में 5 लाख रुपए का इनामी नक्सली मारा गया
  • गुजरात के अमरेली में 3.1 मैग्नीट्यूड का भूकंप, 6 दिनों में दूसरा झटका
  • केंद्र सरकार का फैसला: पेट्रोल पम्प पर भी केरोसिन मिलेगा, हर जिले में 2 पम्प पर सुविधा
  • एमपी के 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्त
  • झांसी में कस्टडी से भागे बदमाश का एनकाउंटर, पैर में लगी गोली
  • सुल्तानपुर में वर्दी पहनते समय थाने में इंस्पेक्टर को लगी गोली, लखनऊ रेफर

होम > विशेष

Extramarital Affairs: Social Impact & Reality Chec

विवाहेतर संबंध : रोमांच के नाम पर अव्यवस्था का 'प्रैक्टिकल कोर्स'

विवाहेतर संबंधों का बढ़ता चलन शहरी जीवन में नई चुनौतियां ला रहा है। रोमांच के नाम पर शुरू हुए रिश्ते मानसिक तनाव, अव्यवस्था और सामाजिक असंतुलन को जन्म दे रहे हैं।


विवाहेतर संबंध  रोमांच के नाम पर अव्यवस्था का प्रैक्टिकल कोर्स

कैलास चन्द्र

आधुनिक महानगरीय जीवन आज की एक विचित्र विडंबना है -लोग भावनात्मक रूप से थके हुए भी है और उत्साह की तलाश में भी। इसी विरोधाभासी भूख के बीच एक पुरानी परंपरा है, जिसका नया ग्लैमर पैक्ड संस्करण बाजार में फिर से उभर आया है विवाहेतर संबंध। आज यह किसी शाइन वॉश किए गए रोमांस की तरह पेश किया जाता है, इंस्टा रील्स इसका एड बना देती हैं, और सीरीज इसे 'थ्रिलर' जैसा रूप दे देती हैं। पर असलियत? वह इतनी उलझी हुई, इतनी हास्यास्पद और इतनी आत्मधाती है कि इसे देखकर लगता है-मानव प्रकृक्ति कभी-कभी स्वयं को बर्बाद करने के लिए कितनी मेहनत कर लेती है। इसी जटिल वास्तविकता को समझाने के लिए चलिए एक व्यंग्यात्मक यात्रा पर निकलते हैं-विवाहेतर संबंध नहीं, बल्कि उसकी अव्यवस्था, उसको मजबूरी और उसकी कॉमिक ट्रेजेडी को दुनिया में।

रोमांच की शुरुआतः एक फिसलन, जिसे लोग 'भाग्य' समझ लेते हैं-अफेयर कोई संस्कारी, योजनाबद्ध, रणनीतिक निर्णय नहीं होता-यह अक्सर भावनात्मक थकान का एक छोटा सा झटका होता है। एक मुस्कान, एक संदेश, एक कॉफी और मनुष्य तुरंत मान लेता है कि ब्रह्मांड ने उसे कोई 'अलौकिक अवसर' दिया है। असल में यह opportunity नहीं, मनोवैज्ञानिक फिसलन है। थोड़ा अकेलापन, घोड़ा उत्साह, और थोड़ा flirting और व्यक्ति अचानक खुद को 'आखिर में भी जी रहा है।' के भ्रम में पाता है। सबसे मजेदार यह है कि रोमांच का यह फौरी नशा केवल शुरुआत में होता है। आगे जाकर रोमांच कम होता जाता है और सिरदर्द बढ़ता जाता है।

दोहरी जिंदगी का थियेटर बहाने, झूठ और creativity की forced practice विवाहेतर संबंध का असली रोमांच secret meet-ings में नहीं, बल्कि जुगाड़ में है। हर अफेयर चलाने वाला व्यक्ति अनजाने में एक full-ame scriptwriter बन जाता है। ऑफिस की 'अचानक' मौटिंग जिम का 'extra session मोबाइल की 'battery down Traffic El unusual jam और घर पहुंचकर वह 'धकान में भी मुस्कान' वाला अभिनय। यह वह कला है जिसमें झूठ बार-बार बोला जाता है, पर rehearsal कभी नहीं की जाती। और यही कारण है कि व्यक्ति खुद अपने ही झूठों में फंसता जाता है। इस दोहरी जिंदगी का सबसे हास्यास्पद पहलू यह है कि प्रेम कम और logistics ज्यादा होती है-इतना कि कई लोग प्रेमी से ज्यादा बॉडीगार्ड की तरह व्यवहार करने लगते हैं।

Location का विज्ञानः जहां कोई देख ले, यही आपका भाग्य विधाता बन जाएगा। किसी को लगता है पार्क सुरक्षित है, किसी को होटल। किसी को कॉफी शॉप ठीक लगती है, किसी को मॉल। लेकिन आधुनिक surveillance युग में privacy का नामोनिशान नहीं बचा। CCTV, digital payments, entry logs, mobile location, acci-dental acquaintances हर जगह किसी न किसी deity का आशीर्वाद आपको मिल सकता है: 'देख लिया मैंने।' सबसे बढ़ा व्यंग्य यह है कि दुनिया में जितने स्थान है, उनमें से 99.9% स्थान पकड़े जाने के लिए उपयुक्त हैं। और बाकी 0.1% में पहुंचने के पहले ही दिल की धड़कनें confession कर देती हैं।

भावनात्मक विभाजन एक शरीर, दो पहचानें और तीन गुना थकान। मनुष्य एक ही समय पर सीमित संख्या में भूमिकाएं निभा सकता है। पर विवाहेतर संबंध में उसे दो अलग-अलग versions में अपग्रेड कर दिया जाता है पर का जिम्मेदार, शालीन, संतुलित नागरिक प्रेमिका/प्रेमी के सामने hyper-romantic, poetic, ener getic version समस्या यह है कि battery एक ही है। और इस दोहरी charging में व्यक्ति की emotion al ute धीरे-धीरे low-power mode में चली जाती है। यह cog nitive dissonance यानी दो विपरीत दुनिया साथ लेकर चलने की मजबूरी-लोगों को एक अजीब-सी मानसिक थकावट देती है। व्यक्ति मुस्कुराता जरूर है, पर अंदर खाली होता जाता है।

गलत नाम का खेल रोमांस का सबसे घातक 'टंग-स्लिप' यह tragedy कम और comedy ज्यादा है। भावनाओं की ऊंचाई पर अचानक गलत नाम निकल जाना यह व्यक्ति की दोहरी दुनिया की सबसे ईमानदार अभिव्यक्ति होती है। यह sip किसी dictionary में तो गलती कहलाती है, पर वास्तविक जीवन में यह 'पूर्ण-नाश के शंखनाद' के रूप में जाना जाता है। यही वह क्षण होता है जब प्रेम और हाजिरजवाबी दोनों धोखा दे देते हैं।

Boundaries का टूटनाः एक चाहता commitment, दूसरा चाहता escape विवाहेतर संबंध अपनी प्रकृति से ही असंतुलित होते हैं। किसी एक को भावनाएं गहराई तक ले जाती हैं और दूसरा व्यक्ति केवल tvil के लिए आता है। यह mismatch अंत में एक emotion-al explosion बन जाता है। यह रिश्ता जितना गुप्त होता है, उतना ही fragie होता है। यह thrill की चाह में शुरू होता है और भावनात्मक कर्ज बनकर समाप्त होता है। घर की दुनिया में अचानक आए gifts और overacting शक की पहली घंटी। अफेयर में व्यक्ति guit मिटाने के लिए घर पर extra sweet बन जाता है।

अचानक flowers unnec- essary gifts बेवजह kind ness family time में unusu-al enthusiasm पति/पत्नी इन संकेतों को देखकर एक ही बात समझते है-या तो प्रमोशन मिला है, या कुछ गढ़बड़ है। और अक्सर दूसरा अनुमान सही निकलता है। तकनीक की तलवार जो कुछ छुपाया जाता है, वही cloud पर auto-backup हो जाता है। आज की technology जितनी सुविधा देती है, उतनी ही धोखा देती है। Secret chats, deleted mes sages, hidden alburns, alter nate apps सब किसी न किसी रूप में cloud या backup में जीवित रहते हैं। एक छोटा-सा screenshot, एक गलती से खुला notification, या एक forwarded message पूरी conspiracy को ध्वस्त करने के लिए पर्याप्त है। विवाहेतर संबंध तकनीक में नहीं फंसते, लापरवाही में फंसते हैं।

सामाजिक मनोविज्ञानः शहरी अकेलापन, डिजिटल आकर्षण और प्रेम का भ्रम। आधुनिक शहरों होते हैं। Virtual conversations असली warmth का भ्रम पैदा करती हैं। काम का दबाव, संबंधों की monotony, और instant gratification का आकर्षण-इन सबका मिश्रण विवाहेतर संबंधों को जन्म देता है। लेकिन इनका अंत हमेशा एक ही जगह होता है- उस emotional अंधेरे में, जहां न thrill बचता है, न संतोष, न स्थिरता। विवाहेतर संबंध कोई रोमांस नहीं-एक व्यवस्थित अव्यवस्था है। यह संबंध thrill से अधिक tension देते हैं। रोमांस से अधिक logistics देते हैं। आनंद से अधिक anxiety देते हैं। और अंत में व्यक्ति खुद से, अपने घर से और अपने मानसिक संतुलन से दूर होता जाता है। विवाहेतर संबंध modern glamour की दुनिया में जिस आकर्षक पैकिंग में दिखते हैं, उतनी ही गहरी अव्यवस्था छुपाए हुए होते हैं। यह प्रेम नहीं, अव्यवस्था का एक प्रैक्टिकल कोर्स है जिसे कोई भी समझदार व्यक्ति शुरू ही न करे।