भारत में मुगलों ने क्या किया है, उसके उदाहरण अभी तक टूटे मंदिरों और बदले हुए ऐतिहासिक क्षेत्रों के नामों के रूप में मिलते रहते हैं। भारत की आत्मा पर जो घाव हैं, वे अभी तक भरे नहीं हैं। मगर फ़र भी पश्चिम में ऐसे लोग हैं, जिनकी सुई अभी तक बाबर पर अटकी हुई है। मुगलों पर अटकी हुई है।
द ईकानमिस्ट में एक लेख प्रकाशित हुआ है, जिसका शीर्षक है “What have the Mughals ever done for us? अर्थात मुगलों ने हमारे लिए क्या किया है?” और उसमें तमाम उन कथित उपलब्धियों का वर्णन है, जो लेखक के अनुसार मुगलों की भारत को देन है।
हालांकि इस पूरे लेख में मुगलों द्वारा हिंदुओं पर किये गए अत्याचार शामिल नहीं है। इस लेख में जो सबसे आपत्तिजनक है, वह यह कि 21 अप्रेल की कथित महत्ता को लेखक ने बताया है। जो दिन भारत के इतिहास का सबसे शर्मनाक दिन होना चाहिए था, उसे लेखक ने महान दिन जैसा घोषित किया है। इसमें लिखा है कि नरेंद्र मोदी ने शपथ के समय 1200 वर्षों की गुलामी का जिक्र किया था और मुस्लिम शासन की गुलामी की बात थी, जो अंग्रेजों से पहले भारत में थे।
मुगल उनमें सबसे ज्यादा लंबे समय तक शासन करने वाले थे। इसमें लिखा है कि 21 अप्रेल को पूरे पाँच सौ वर्ष हो गए हैं, जब बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में दिल्ली के अंतिम सुल्तान को हराया था और जब यह अपने चरम पर था, तो दुनिया के सबसे अमीर और सबसे ताकतवर शासन में से एक था और इसके शासकों ने भारतीयता को अपना लिया था, और वे प्रभाव में लगभग पूरे भारतीय ही हो गए थे और उनकी उपलब्धियां भारतीय उपलब्धियां कहलाई जाती हैं।
इसके बाद इसमें वही लिखा है कि कैसे मुगलों ने भारत को व्यंजन दिए, बिरयानी का उल्लेख है। एक प्रकार से भारत की समृद्ध परंपरा को मुगलों की देन बताने का असफल प्रयास है। जब लेखक बिरयानी को मुगलों की देन बताता है, उस समय वह राजा नल द्वारा लिखित पाकदर्पण को भूल जाते हैं, जिसमें मांसौदन नाम से यह उल्लेख है कि कैसे चावल और मांस को मिलाकर पकाया जाता है।
इसमें वे वही फालतू बात दोहरा रहा है कि हिन्दू शब्द का उल्लेख सिंधु के कारण है और यह शब्द बाहरी है। तब वह हिमलयं समारभ्य यावत इन्दुसरोवरं। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते को भूल जाते हैं और जब लेखक ने यह लिखा कि मुगलों के कारण भारतीय वास्तु है, तब मुगलों से पहले के तमाम मंदिरों और किलों को वह भूल जाता है।
दरअसल ऐसे लेख लगातार भारतीय मानस को विमर्श के स्तर पर पराजित करने के लिए लिखे जाते हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर इस लेख को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है और इस लेख की आलोचना भी लगातार हो घी है।
सोनाली मिश्रा