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Oscars विवाद: ध्रुव राठी ने प्रियंका को क्यों कहा

प्रोपोगैंडा फैलाने वाले ध्रुव राठी का प्रियंका चोपड़ा को डरपोक कहना कितना सही?

सोनाली मिश्रा


प्रोपोगैंडा फैलाने वाले ध्रुव राठी का प्रियंका चोपड़ा को डरपोक कहना कितना सही

भारत में और भारत से बाहर के कुछ लोगों की दुनिया “फ्री फिलिस्तीन” तक ही सीमित है। उनकी सुबह भी इसके साथ होती है और रात भी और शायद सपने भी उसी तरह से आते हैं। आज बात ऐसे ही एक प्रोपोगैंडा यू ट्यूबर ध्रुव राठी की हो रही है। ध्रुव राठी ने प्रियंका चोपड़ा पर निशाना साधा है। अपने नए वीडियो में उसने प्रियंका चोपड़ा पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रियंका डरपोक हैं। 

अब प्रियंका चोपड़ा पर निशाना उसने इसलिए नहीं साधा कि प्रियंका ने कुछ गलत कहा या किया, बल्कि उसने निशाना इसलिए साधा कि प्रियंका चोपड़ा ने ऑस्कर्स अवार्ड समारोह में फ्री फिलिस्तीन के नारे पर चुप रहना उचित समझा। प्रियंका वहाँ पर अवार्ड देने के लिए स्टेज पर थीं। जब ऑस्कर अवार्ड समारोह में वे स्टेज पर थीं तो स्टेज पर इस दौरान बेस्ट इन्टरनेशनल फीचर फिल्म के लिए अवार्ड देते समय जेवीयर बारडेम ने राजनीतिक बात करते हुए कहा “नो टू वार एण्ड फ्री फिलिस्तीन”। इस पर उनके साथ अवार्ड देने के लिए गईं प्रियंका चोपड़ा ने न ही उनकी बात का समर्थन किया और न ही विरोध। 

वे बस मुस्कराते हुए वहीं पर खड़ी रहीं। अब इसी बात को लेकर वह भारत के उस वर्ग के निशाने पर हैं, जिसकी सुबह और शाम केवल और केवल प्रोपोगैंडा के साथ होती है और ध्रुव राठी भी उसमें से एक हैं। ध्रुव राठी ने प्रियंका की आलोचना की और उसने यह कहा कि प्रियंका की मुस्कान देखने लायक थी जब यह नारा लगाया गया। प्रोपोगैंडा फैलाने वाले लोग यह कह रहे हैं कि प्रियंका चोपड़ा को इस नारे का समर्थन करना चाहिए था। वह केवल मुस्कराकर रह गई। 

कुछ कह रहे हैं कि प्रियंका ने मुस्कराकर इस नारे का समर्थन किया तो कुछ कह रहे हैं कि प्रियंका को एक स्टैंड लेना चाहिए था। प्रियंका को मुस्कराना नहीं चाहिए था। ध्रुव राठी का कहना है कि प्रियंका चोपड़ा ने समर्थन न देकर गलत किया है। मगर एक बात यह समझ नहीं आती है कि जिस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई एक बहुत बड़ा वर्ग देता रहता है, क्या अभिव्यक्ति की आजादी में यह नहीं आता है कि कोई फ्री फिलिस्तीन के नारे पर चुप रहना चुने? यह अभिव्यक्ति की आजादी इस सीमा तक सिलेक्टिव क्यों है यह समझ में नहीं आता है? 

प्रियंका चोपड़ा को आखिर क्यों डरपोक कहा जाए?

जब इन्हीं प्रियंका चोपड़ा ने दीपावली को लेकर पटाखों को न चलाने की टिप्पणी की थी, तो यही प्रियंका चोपड़ा उस वर्ग की प्रिय हो जाती हैं, जो उन्हें आज डरपोक बता रहा है। और जब वे भारत की सेना के समर्थन में पोस्ट्स आदि लिखती हैं, तो वे पाकिस्तानियों के साथ ही इस पूरे वर्ग के निशाने पर आ जाती हैं। इसका अर्थ यह है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी का जो गैंग है, उसे प्रियंका चोपड़ा या कोई भी व्यक्ति तभी तक अच्छा लगता है जब तक वह हिंदुओं या भारतीय सेना के खिलाफ खड़ा हो, यदि ऐसा नहीं होता है और उनके एजेंडे से कुछ भी इतर होता है तो वह उनका सबसे बड़ा दुश्मन होता है और वे उसके खिलाफ कितना भी नीचे उतरकर लिख सकते हैं, बोल सकते हैं।  जैसा कि अभी प्रियंका चोपड़ा के साथ हो रहा है।

लेखिका - सोनाली मिश्रा