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दिल्ली की नई ईवी नीति जल्द लागू

दिल्ली की नई ईवी नीति से मध्यप्रदेश के लिए सबक

दिल्ली सरकार ने ईवी नीति 2026-30 को मंजूरी दी, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विशेष प्रोत्साहन और सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण पर जोर दिया गया है।


दिल्ली की नई ईवी नीति से मध्यप्रदेश के लिए सबक

(अनुराग तागड़े)

1 जुलाई से राजधानी में लागू होगी नई इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति, अब सवाल क्या मध्यप्रदेश भी बढ़ाएगा हरित परिवहन की रफ्तार?

इंदौर। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली 1 जुलाई से नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति 2026-30 लागू करने जा रही है। दिल्ली मंत्रिमंडल ने लगभग 15,000 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर प्रोत्साहन, पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को स्क्रैप करने पर विशेष अनुदान, चार्जिंग एवं बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क का व्यापक विस्तार तथा सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण पर जोर दिया गया है।दिल्ली की इस पहल ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या मध्यप्रदेश भी अपनी ईवी नीति को नए दौर की आवश्यकताओं के अनुरूप अपडेट करेगा?

मध्यप्रदेश के सामने बड़ा अवसर

मध्यप्रदेश पहले ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटर वाहन कर में रियायत, पंजीयन शुल्क में छूट तथा चार्जिंग स्टेशनों को प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं दे चुका है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल कर छूट पर्याप्त नहीं होगी। यदि राज्य को भविष्य के ऑटोमोबाइल उद्योग में अग्रणी बनना है तो उसे नई पीढ़ी की व्यापक ईवी नीति लानी होगी।

दिल्ली की नीति में क्या है खास?

नई नीति के तहत

  • इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर खरीद प्रोत्साहन।
  • पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को स्क्रैप करने पर अतिरिक्त अनुदान।
  • सड़क कर और पंजीयन शुल्क में छूट।
  • सार्वजनिक चार्जिंग एवं बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क का विस्तार।
  • सरकारी विभागों एवं सार्वजनिक परिवहन के तेजी से विद्युतीकरण का लक्ष्य।
  • बैटरी रीसाइक्लिंग और ईवी उद्योग के लिए अलग पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की योजना।

मध्यप्रदेश क्या कर सकता है?

राज्य सरकार निम्न कदम उठा सकती है 

पीथमपुर, इंदौर, मालनपुर और मंडीदीप को ईवी निर्माण एवं बैटरी विनिर्माण हब के रूप में विकसित किया जाए।इंदौर-भोपाल, इंदौर-उज्जैन, भोपाल-जबलपुर, ग्वालियर और रीवा जैसे प्रमुख मार्गों पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं।नगर बसों, ई-रिक्शा और सरकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बनाया जाए।निजी निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष औद्योगिक पैकेज घोषित किया जाए।बैटरी रीसाइक्लिंग उद्योग और कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाएं।ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क विकसित किया जाए।

रोजगार और निवेश का बड़ा अवसर

ईवी उद्योग केवल वाहन निर्माण तक सीमित नहीं है। बैटरी, चार्जर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर, सर्विसिंग, चार्जिंग नेटवर्क और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में हजारों नए रोजगार सृजित हो सकते हैं। भारत सरकार भी पीएम ई-ड्राइव योजना के माध्यम से ईवी और चार्जिंग अवसंरचना को बढ़ावा दे रही है।

मध्यप्रदेश के लिए समय पर फैसला जरूरी

दिल्ली ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य स्वच्छ और विद्युत आधारित परिवहन का है। यदि मध्यप्रदेश अभी से मजबूत ईवी नीति, चार्जिंग अवसंरचना और विनिर्माण निवेश पर ध्यान देता है, तो वह केवल ईवी बाजार का उपभोक्ता नहीं बल्कि देश का प्रमुख उत्पादन केंद्र भी बन सकता है। आने वाले वर्षों में हरित परिवहन ही औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक विकास का नया आधार बनने जा रहा है।

 

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