सीएम मोहन यादव के जन्मदिन पर विकास, सुशासन और जनकल्याण पर केंद्रित उनकी नीतियों और विजन पर एक नजर।
कृष्णा गौर
25 मार्च का दिन मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का दिन है। आज प्रदेश के यशस्वी, संवेदनशील और जन-जन के प्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का जन्म दिवस है। यह अवसर केवल एक राजनेता को शुभकामनाएं देने का नहीं है, बल्कि उस 40 वर्षों की अविराम तपस्या, कड़े संघर्ष और जनता के प्रति अगाध समर्पण का उत्सव मनाने का है, जिसने एक साधरण कार्यकर्ता को प्रदेश के सर्वोच्च सेवा-पद तक पहुंचाया है। डॉ. यादव केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं हैं, बल्कि वो इस माटी के सच्चे सपूत हैं जो प्रदेश को 'उत्कर्ष' पर ले जाने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं.
डॉ. मुख्यमंत्री मोहन यादव का राजनीतिक जीवन किसी चमत्कार का परिणाम नहीं है. बल्कि यह करीब चार दशकों के पसीने, धैर्य और अथक परिश्रम की गाथा है। उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय से एक आम छत्र के रूप में सबके हितों के लिए आवाज उठाई। एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने वर्षों तक जनता के सुख-दुख में उनका साथ दिया। यह उनकी कर्मठता ही थी कि वे छात्र राजनीति से आगे बढ़े और बाद में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष, विधायक, उच्च शिक्षा मंत्री और फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे। जमीनी संघर्ष ने उन्हें आम आदमी के दर्द, गरीब की पीड़ा और युवाओं की आकांक्षाओं को गहराई से समझने वाली सोच
में निष्ठा और ईमानदारी से समाज की अंतिम पंक्ति का व्यक्ति भी नेतृत्व के शिखर तक पहुंच सकता है। दी। यह दिखाता है कि लोकतंत्र मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालते ही डॉ. मोहन यादव ने अपनी प्रशासनिक दक्षता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का जो परिचय दिया है, वह अद्भुत है। उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास की एक नई 'रफ्तार' पकड़ चुका है।
प्रदेश में रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने 'रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव' जैसे अभिनव प्रयोग किए हैं, जिससे न केवल बड़े शहरों बल्कि छोटे जिलों तक उद्योगों का जाल बिछ रहा है। बावा महाकाल के परम भक्त डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजने का अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। श्रीराम वनगमन पथ से लेकर श्रीकृष्ण पाथेय तक, प्रदेश अपनी जड़ों की ओर गर्व से लौट रहा है। अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ उनकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति ने प्रदेश की जनता और विशेषकर महिलाओं के मन में सुरक्षा का एक गहरा विश्वास जगाया है।
पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमंतु एवं अर्द्धघुमंतु कल्याण मंत्री होने के नाते, मैं मुख्यमंत्री जी की वचित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता को बहुत करीब से देखती हूं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास'
के मंत्र को उन्होंने मध्यप्रदेश में पूरी तरह से जमीन पर उतारा है। हाल ही के राज्य बजट में उनके मार्गदर्शन में हमारे विभाग की योजनाओं के लिए किए गए ऐतिहासिक प्रावधान इस बात के गवाह है कि वे समाज के पिछड़े, अल्पसंख्यक और सदियों से घुमंतु जीवन जी रहे विमुक्त समुदायों की मुख्यधारा में वापसी के लिए कितने संकल्पित हैं। शिक्षा के लिए सर्वसुविधायुक्त छात्रावास हों या युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग, डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व वाली 'डबल इंजन' को सरकार हर कदम पर इन वर्गों के साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश एक 'स्वर्णिम युग' की ओर कदम बढ़ा रहा है। उनका विजन स्पष्ट है कि एक ऐसा आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाएं, जहां किसान समृद्ध हो, युवा रोजगारयुक्त हो, महिला सुरक्षित और समाज सशक्त हो। आज उनके जन्म दिवस के पावन अवसर पर, अपनी और समस्त प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें हृदय से ढेरों शुभकामनाएं देती हूं। भगवान महाकाल से प्रार्थना है कि वे हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और अपार ऊर्जा प्रदान करें, जिससे उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश यूं ही विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करता रहे।