जबलपुर के बरगी बांध क्रूज हादसे ने कई जिंदगियां छीन लीं। मौसम चेतावनी के बावजूद संचालन और लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई परिवार बिखर गए।
जबलपुर। गुरुवार की शाम कुछ लोग उस दिन खुशियां लेकर अपने परिवार के साथ निकले थे, कुछ अपने दोस्तों के साथ हर पल को यादगार बनाने के लिए। किसी ने तस्वीरें लेने की सोची होगी, किसी ने वीडियो और किसी ने बस सुकून के कुछ पलों के लिए इस यात्रा को चुना होगा, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी आखिरी याद बनकर रह जाएगा।
बरगी बांध में हुआ यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि यह हमारी तैयारियों और सिस्टम की परतें खोलता है। जब मौसम की चेतावनी साफ थी कि धूलभरी अंधड़ चलेगी तो सवाल उठता है कि क्या इस तूफान से टकराने में कूज सक्षम था? कूज को आगे बढ़ने की अनुमति क्यों दी गई? कहा जा रहा है कि यात्रियों ने खुद वापस लौटने की बात कही थी, लेकिन उनकी आवाज अनसुनी कर दी गई। यह लापरवाही नहीं, सीधा-सीधा खतरे को नजरअंदाज करना है। हमारे यहां एक कहावत है आग लगने पर ही कुंआ खोदा जाता है और हर बार यह कहावत सच साबित होती है। इस हादसे में कुछ लोगों ने अपनी जिंदगी खो दी और जो बच गए वे शायद जिंदगीभर उस डर और उस पल को भूल नहीं पाएंगे। किसी का पिता, किसी की मां, किसी का बेटा और किसी का साथी एक पल में सब छिन गया। संवेदनाएं अपनी जगह हैं, प्रार्थनाएं भी जरूरी हैं, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है जवाबदेही। सवाल यह है कि सिस्टम की खामी की हर बार निर्दोष लोग ही कीमत क्यों चुकाएं? अंत में सवाल सिर्फ एक है कि क्या यह सिर्फ एक हादसा था या या हमारे सिस्टम की लापरवाही की कीमत ?
जिसे लापता समझा वो जिंदा निकली !
बरगी बांध हादसे को लेकर एक राहत भरी खबर तब सामने आई जब सरकारी सूची में लापता बताई जा रही बंदना थापा को सुरक्षित निकाल लिया गया उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। उनके साथ उनका बच्चा भी पूरी तरह सुरक्षित है। इस घटनाक्रम के बाद थापा परिवार और उनके परिचितों में खुशी का माहौल है। वंदना के पति का नाम रौशन आनंद कोरी है, लेकिन राहत सूची में उनके पति का नाम त्रुटिवश रौशन आनंद वर्मा दर्ज कर लिया गया था, जिससे भ्रम की स्थिति बनी थी। इस सुधार के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है। वंदना और उनके बच्चे का अस्पताल में उपचार चल रहा है और दोनों खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
ननद ने लगाई बचाने की गुहार
हादसे का शिकार एक दिल्ली का परिवार की था, उनके छ सदस्य दूज में सवार थे जिसमें तीन की मौत हो गई है। दिल्ली में रहने वाले उक्त परिवार के सदस्य ने बताया कि हमारी बहल की लनट जो अपने चार साल के बेटे के साथ कूज में सवार वी, उसका कोन आया था जिसमें वे बेहद पबटाई हुई थी और कह रही थी हमे बया लो. इसके कुछ देर बाद उसकोबाइल बंद आने लगा। अपने रिस्तेदार के जबलपुर में बनाये गये ये कान की ओ कार्यक्रम में शामिल होने दिल्ली से परिवार आया था।

जीवित बच निकले व्यक्ति ने सुनाई व्यथा
दुर्घटना में 5 घंटे तक पानी में डूबे रहने के बाद जिंदा बचे सत्तर वर्षीय रियाज ने बताया कि कुछ समय बाद एक दम सन्नाटा छाने लगा था, उनके अपने भी नहीं दिख रहे थे। उन्होंने बताया कि फूज के उपरे हिस्से पर वे फंस गये। थे, जिसमें उनकी गर्दन तक पानी पहुंच गया था, किसी तरह वे सांस लेने की कोशिश कर रहे थे। कुछ समय बाद बचाव दल के लोग पहुंचे और उन्होंने कहा कि हम आ गये है... आप घबराये नहीं, जल्द ही आपको सुरक्षित निकाल लेंगे। उन्होंने ऊपरी हिस्से को किसी तरह तोड़ा और मुझे सुरक्षित निकाला।

गांव वालों की बात मान लेते कैप्टन तो नहीं होती दुर्घटना
बरगी बांध में हुई दुखद घटना को लेकर एक एक कर बाते सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में हादसे में अपनों को खोने वाली बालिका ने बताया कि जब वे क्रूज में थे उसी दौरान तेज हवा चलने पर समीपस्थ गांव के लोगों ने आवाज लगाई कि क्रूज को किनारे की तरफ ले आईये, लेकिन क्रूज चलाने वाले अंकल ने उनकी बात अनसुनी कर दी और वे बांध के बीचोबीच क्रूज ले जा रहे थे। इसी बीच हवा और तेज होने लगी थी। धीरे-धीरे पानी कूज के ऊपरी हिस्से से होते हुये नीचे की तरफ आने लगा। ऊपर वाले लोग नीचे की ओर भागने लगे। क्रूज में अपनों को बचाने के प्रयास हो रहे थे। बालिका ने बताया कि जैसे ही पानी बढ़ रहा था, उसने अपने पापा का हाथ पकड़ लिया। लेकिन इस बीच उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्य नहीं मिले। अपने पापा से बालिका बार-बार अपनी मम्मी के बारे में पूछ रही थी जिसका जवाब उनके पिता नहीं दे पा रहे थे, उनके आंसू लगातार झलक रहे थे। कूज पानी में समा रहा था और सभी जगह पानी भर गया।
इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं
- बारिश और आंधी का यलो अलर्ट मिलने के बाद भी क्रूज चलाने की अनुमति क्यों दी गई?
- क्या कुज रवाना करने से पहले सुरक्षा उपकरणों, लाइफ जैकेट और आपातकालीन व्यवस्था की जांच की गई थी?
- क्या कैप्टन को खराब मौसम में यात्रा रद्द करने का अधिकार था? या फिर दबाव में क्रूज चलाया गया?
- क्या कूज की क्षमता के अनुसार ही उसमें पर्यटकों को बैठाया गया था ? ओवरलोडिंग तो नहीं थी?
- क्या क्रूज का नियमित रखरखाव होता था? क्यों नहीं था?
- क्या कूज पर मौजूद स्टाफ को आपातकालीन स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग दी गई थी?
- क्या खराब मौसम के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की बांध के पास आपात स्थिति से निपटने त्वरित बचाव दल का कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर था?
अधिकारियों के खिलाफ क्यों नहीं हो रही कार्रवाई...?
बरगी बांध में कूज हादसे को 24 घंटे से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। कहा जा रहा है कि यदि ठेकेदार क्रूज का संचालन करता तो अब तक उसके खिलाफ कार्रवाई कर दी गई होती लेकिन इसका संचालन पर्यटन विकास निगम के अधिकारियों की निगरानी में हो रहा था इसलिए अभी तक उनके खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसका मतलब जिम्मेदारों को बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है वो भी तब जब इस हादसे ने मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लोगों को झकझोर दिया है और मुख्यमंत्री समेत तमाम बड़े नेताओं ने जबलपुर में डेरा डाल लिया है।
प्रदेश में क्रूज के संचालन पर फिलहाल रोक लगी
बरगी बांध हादसे के बाद प्रदेश सरकार ने अगले आदेश तक बरगी बांध सहित भोपाल और हनुमतिया तालाब में कूज का संचालन रोक दिया है। पर्स्टन मंत्री धर्मेद्र सिंह लोभी बरगी बांध पहुंचे, यहां पर उन्होंने बताया कि जबलपुर के बरगी बांध के अलावा अन्य जलाशयों में अभी जांच होने तक क्रूज नहीं चलाये जाएंगे। जांच में इस बात का पता लगाया जायेगा कि आखिरकार किस कारण हादसा हुआ, बरगी बांध में जो फून हैं वे ही अन्य जलाशय में हैं। इसीलिये इनके संचालन पर रोक लगाई जा रही है। मंत्री ने कहा कि उन्य तकनीक वाले क्रूज आखिर कैसे दुघर्टनाग्रस्त हो गये इस पर विशेषज्ञ मंथन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को देंगे इसके बाद उप होगा कि आने वाले दिनों में इसे चलाया जाये वा नहीं। क्योंकि आम पयर्टकों के जीवन की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

मृतकों के घर पहुंचे मुख्यमंत्री
शुक्रवार को मुख्यमंत्री सिविल लाइन स्थित दिवंगत रेशमा सैयद और सैयदा शमीम फातिमा के निवास स्थान पहुंचे जहां रियाज हुसैन से मुलाकात की। मुगायमंत्री ने बेस्टलैण्ड खमरिया पहुंच कर कामराज के परिवार से भी मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री कोतवाली स्थित नीतू सोनी के निवास पर भी पहुंच कर दिवंगतों के परिवार से मिल कर उन्हें ढांढस बनाया। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि बरगी का हादसा बहुत ही दुखद है। जैसे ही घटना की जानकारी मिली तत्काल सरकार बचाव में जुट गई थी। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को स्थानीय मीडिया से चर्चा करते हुए भी यह कहा है कि हादसे की प्रत्येक एंगल से जांच करने का आदेश पर्यटन विभाग को दिया हुआ है।
आगरा-हैदराबाद से भी आई बचाव के लिए टीम
बरजी हादसे के बाद बचाव के लिए आगरा और हैदराबाद से भी एनडीआरएफ और सेना की एक विशेष टीम बुलाई गई। बतलाया जा रहा है कि आज वर की सुबह जो बार शव सव और मिले हैं उन्हे इटी विशेष दल की सहायता से निकाला जा सका है जबकि से लापता लोगों की तलाश के लिए कूज को काटान पड़ा है।
यह निकले सुरक्षित-रात्री सोगी, विक्की सोनी, समृद्धि सोनी, इनिया, आराध्या सोनी, रियाज हुसैन पदीधारन, लाल गौड, प्रकाश गौड, अनामिका अनु सोनी, महेश पटेल, मनोज श्रीवास, अहिका श्रीवास तक श्रीवास रोहन आनंद वर्मा, सरिता वर्मा, काश्रीवास कियान वर्मा, दुव्या, मजू याडगा, जम्फर कामराज सुरक्षित निकले हैं।
मात्र 29 टिकट ही अधिकृत जारी हुए हैं-बताया जा रहा है कि इस कूज में महिला-पुरुष और बच्चों के सहित 29 लोग सवार थे। इसके अलावा कूज के चालक सहित अन्य 3 का स्टाफ भी कूज में मौजूद था। कूज हादसे के बाढ़ 15 लोग तैरते हुए जैसे तैसे जान बचाकर तैरते हुए बाहर निकल आए से लेकिन अन्य लोगों के लिए बचाव कार्य जारी रहा जिसके बाढ़ आज शुक्रवार तक कुल 9 लोगों के शथ समाधार सिसी जाने तक बरामद हो चुके है।
20 साल पुराना कूज 12 के पास नहीं थी लाइफ जैकेट - बताया जा रहा है मध्यप्रदेश पर्यटन निगम के पास यह कुज 19 साल से अधिक समय से है। बावजूद इसके गुरुवार को भी 37 पर्यटकों के पास लाइफ जैकेट वी ही नहीं, इस घटना के पहले आनन-फानन में पर्यटकों को लाइफ जैकेट बांटने का प्रयास किया गया है लेकिन फिर भी करीब 14 यात्रियों को लाइफ जैकेट नहीं दी जा सकी है।
प्रधानमंत्री ने दो लाख और सुख्यमंत्री ने चार लाख देने की घोषणा - मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस दुखद घटना के लिए दिवंगतों के परिवार को प्रधानमंत्री नरेंद मोदी द्वारा भी दो-दो लाख रुपए अर्थिक सहायता की घोषणा कर दी गई है। इसके पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मृतकों के पौरजनों को चार-चार लाव रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर दी है।